टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: मात्र 34 हजार में दी गई थी हत्या की सुपारी, पुलिस का दावा, सुपारी किलर गिरफ्तार
ट्रेन में बाल काटे, कपड़े भी बदले
अंधेरी वेस्ट फायरिंग के बाद आरोपी सीधे स्टेशन की तरफ भागे। पुलिस के मुताबिक वे अंधेरी वेस्ट स्टेशन से लोकल ट्रेन में चढ़े। दो से तीन स्टेशन बाद वे उतर गए। फिर ऑनलाइन टैक्सी लेकर सूरत पहुंचे।
सूरत से उन्होंने पुणे-जयपुर एक्सप्रेस के जनरल कोच में सफर शुरू किया। तीनों अलग-अलग सीट पर बैठे थे। Tiger Shroff firing case में यही रास्ता पुलिस के लिए कड़ी बना। आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए ट्रेन में ही बाल काटे। कपड़े भी बदल लिए थे। पुलिस को इनसे पिस्टल नहीं मिली है।
कोटा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार
मुंबई पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV - Closed Circuit Television) की कड़ियां जोड़ीं। इन कैमरों में आरोपियों के ट्रेन में चढ़ने का फुटेज मिला। इसके बाद सोमवार सुबह 9:40 बजे मुंबई पुलिस ने कोटा पुलिस को अलर्ट किया। अलर्ट के बाद कोटा में मुंबई पुलिस की गिरफ्तारी की तैयारी हुई।
इस Mumbai police arrest में दो राज्यों की पुलिस ने मिलकर काम किया। कोटा पुलिस ने स्टेशन पर 36 जवानों की छह टीमें तैनात कीं। पुणे-जयपुर एक्सप्रेस सुबह 10:17 बजे स्टेशन पहुंची। उसी समय एक आरोपी को ट्रेन से नीचे उतरते दिखें। पुलिस ने उसे दबोच लिया। दो और आरोपी कोच के अंदर से पकड़े गए।
तीन आरोपी, तीन भूमिकाएं
कोटा एसपी (SP - Superintendent of Police) तेजस्वी गौतम के मुताबिक तीनों बालिग हैं। रिहान उर्फ सुक्का मुंबई में मजदूरी करता है। उस पर पहले से चोरी और आर्म्स एक्ट (हथियार रखने से जुड़ा कानून) के केस दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक रिहान ने ही ज्यादा गोलियां चलाईं। रितिक कुर्मी अंधेरी वेस्ट में रैपिडो टैक्सी चलाता है। वह एक महीने से रेकी (किसी जगह की पहले से जानकारी जुटाना) कर रहा था।
हमले के वक्त वह बाइक पर बैठा था। फूलसिंह ने कार के शीशे पर पिस्टल सटाकर गोली चलाने की कोशिश की। पिस्टल जाम हो गई। इसी वजह से टाइगर बच गए। तीनों एक महीने से मुंबई में ही थे।
गैंगस्टर अनिल पंडित पर आरोप
पुलिस के मुताबिक अनिल पंडित, Lawrence Bishnoi gang का कथित गुर्गा है। गैंगस्टर अनिल पंडित ने रिहान से हत्या की डील की थी। डील 34 हजार रुपए में तय हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, Anil Pandit gangster अमेरिका के कैलिफोर्निया से गैंग चलाता है। उसने आरोपियों को विदेश में सेटल करने का ऑफर भी दिया था। पुलिस सूत्रों का दावा है कि साजिश साबरमती जेल में रची गई। जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की गैंग इसके पीछे बताई जा रही है। ये सभी बातें अभी पुलिस के दावे हैं।
अमेरिका से पेमेंट, फोन पर लाइव
बता दें कि वारदात की जगह यानी पुष्पा पार्क की रेकी हुई थी। होटल, खाने और सूरत भागने के टैक्सी बिल का भुगतान ऑनलाइन हुआ। सूत्रों के मुताबिक, अनिल पंडित गैंगस्टर ने यह पूरा भुगतान अमेरिका से किया।
फायरिंग के वक्त वह मोबाइल पर रिहान से लाइव जुड़ा था। यह भी पुलिस सूत्रों का दावा है। तीनों कथित सुपारी किलर गिरफ्तार हो चुके हैं। पर साजिश का कथित सूत्रधार अमेरिका में बताया जा रहा है।
टाइगर श्रॉफ को धमकी से आगे
यह टाइगर श्रॉफ को धमकी देने भर का मामला नहीं है। मुंबई पुलिस के मुताबिक आरोपी टाइगर की हत्या करने आए थे। पुलिस ने पूरे मामले की कड़ियां 15 घंटे में जोड़ लीं। रविवार शाम की गोलीबारी से सोमवार सुबह की गिरफ्तारी तक सब तेजी से हुआ।
आरोपियों को 48 घंटे के लिए पुलिस रिमांड पर सौंपा गया है। रिमांड (अदालत की इजाजत से पुलिस हिरासत) में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। बता दें कि पुलिस को इनसे पिस्टल नहीं मिली है। इसलिए हथियार कहां गया, यह सवाल अभी खुला है। टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में जांच की दिशा इसी पर टिकी है।
यह खबर क्यों जरूरी है
इस मामले में 18 से 22 साल के तीन युवक आरोपी हैं। पुलिस का दावा है कि रिहान से 34 हजार रुपए में डील हुई थी। उसे विदेश में बसाने का ऑफर भी दिया गया था। पुलिस के मुताबिक संगठित गिरोह दूसरे देश से भी वारदात करा सकते हैं।
कानून का राज हर नागरिक की सुरक्षा की गारंटी है, चाहे वह मशहूर हो या आम। मुंबई और कोटा पुलिस के तालमेल से आरोपी 15 घंटे में पकड़े गए। अदालत में दोष साबित होने तक वे आरोपी ही हैं। तीनों आरोपी कोटा रेलवे स्टेशन पर पकड़े गए। पुलिस के मुताबिक वे जयपुर से बस लेकर दिल्ली और फिर नेपाल जाने वाले थे।
FAQs:
- टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आरोपियों ने पहचान छिपाने के लिए क्या किया?
आरोपियों ने ट्रेन में बाल काटे और कपड़े बदल लिए ताकि उनकी पहचान छिपाई जा सके। - टाइगर श्रॉफ पर हमला करने वाले तीनों आरोपी किन शहरों से पकड़े गए?
तीनों आरोपी मुंबई से सूरत होते हुए, बाद में कोटा रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किए गए। - क्या पुलिस ने टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में जांच के दौरान पिस्टल बरामद की है?
नहीं, पुलिस को आरोपियों से पिस्टल नहीं मिली है, जो जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है।