TMC के बागी सांसदों का NCPI को समर्थन, काकोली घोष बोलीं-NDA के साथ काम करेंगे
समझें क्या है पूरा मामला
- TMC के 20 सांसदों ने बगावत की घोषणा की।
- सभी सांसदों ने NCPI में विलय किया।
- गुट ने NDA और PM मोदी को समर्थन दिया।
- लोकसभा में अलग सीट की मांग रखी गई।
- TMC की असली पहचान पर भी विवाद जारी है।
कैसे हुआ TMC में बड़ा विभाजन
TMC के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने पार्टी से बगावत कर ली। बागी गुट की अगुवाई काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। रविवार शाम उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर इस विलय का औपचारिक ऐलान किया। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने कहा कि उनका गुट पहले ही NCPI में विलय कर चुका है। स्पीकर से मुलाकात की तस्वीरों में 17 TMC सांसद दिखे।
बीजेपी प्रभारी से भी हुई मुलाकात
स्पीकर से मिलने से पहले बागी सांसदों ने बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की। इसके बाद लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपा गया। इससे साफ है कि इस पूरे कदम में BJP की भूमिका भी रही है।
क्या है दल-बदल कानून का दांव
बागी सांसद सीधे BJP में नहीं गए। इसके पीछे दल-बदल विरोधी कानून से बचने की रणनीति है। नियम के मुताबिक अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद अलग होकर किसी दूसरी पार्टी में विलय करें तो उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं होता।
TMC के 28 सांसदों में से 20 अलग हुए हैं जो दो-तिहाई से ज्यादा हैं। इसीलिए इन्होंने पहले NCPI में विलय किया। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि जुलाई में वे TMC का नाम और चुनाव चिन्ह अपने नाम करने की मांग करेंगे और कोर्ट तय करेगा कि असली TMC कौन है।
क्या है NCPI
NCPI यानी नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया का गठन 2023 में हुआ था। यह मुख्य रूप से बंगाली भाषी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है। पार्टी चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है लेकिन मान्यता प्राप्त नहीं है। त्रिपुरा में दो विधानसभा सीटों पर यह पार्टी चुनाव लड़ चुकी है। TMC के बागी सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम में बंगाली समुदाय की आवाज बनने का दावा करती है।
ममता गुट का पलटवार
ममता बनर्जी गुट ने इस बगावत को चुनौती दी है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर बागी गुट को कोई मान्यता न देने की मांग की। ममता गुट का कहना है कि असली TMC वही है और बागी सांसदों को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है।
आगे क्या होगा
यह लड़ाई अब तीन मोर्चों पर होगी। संसद में स्पीकर तय करेंगे कि बागी गुट को अलग मान्यता मिलेगी या नहीं। कोर्ट में जुलाई में TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावे की लड़ाई होगी। राजनीतिक मैदान में NDA के समर्थन से बागी गुट बंगाल में नई ताकत बनने की कोशिश करेगा।
बदल जाएगा संसदीय गणित
इधर, अगर स्पीकर इस विलय को मंजूरी देते हैं, तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा। इससे लोकसभा में पार्टी की ताकत घटकर 20 की संख्या तक रह जाएगी। साथ ही विपक्ष का पार्लियामेंट का अर्थमैटिक बदल सकता है। 1998 में ममता बनर्जी ने टीएमसी की स्थापना की थी। अब तीन दशक बाद यह एक सबसे बड़ी टूट होगी।
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