TRAI रिपोर्ट: MP में 5G का कमाल, दिल्ली से बेहतर निकला भोपाल और सागर का नेटवर्क
समझें क्या है पूरा मामला
- फोन की स्क्रीन पर 5G आइकॉन दिखना बेहतर नेटवर्क की गारंटी नहीं है।
- TRAI ने देश के 12 अलग-अलग इलाकों में बड़ा ड्राइव टेस्ट किया है।
- छोटे शहरों का नेटवर्क परफॉर्मेंस दिल्ली और मुंबई से अच्छा पाया गया है।
- हाईवे और ट्रेन रूट पर यात्रा के दौरान नेटवर्क सिग्नल काफी कमजोर हैं।
- इंटरनेट स्पीड और कॉल ड्रॉप में हर कुछ किलोमीटर पर बड़ा अंतर दिखता है।
5G नेटवर्क की असली सच्चाई
Mobile Network Test: क्या आप भी अपने स्मार्टफोन के कोने में 5G का चमचमाता लोगो देखकर यह सोचते हैं कि अब तो इंटरनेट रॉकेट की स्पीड से उड़ेगा? अगर हां, तो जरा ठहरिए। क्योंकि TRAI के ताजा सर्वे ने एक ऐसा सच सामने रखा है, जो आपकी इस गलतफहमी को दूर कर देगा। TRAI ने हाल ही में देशभर के लगभग तीन हजार 491 किलोमीटर लंबे रास्तों पर एक इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट किया।
इस रियलिटी टेस्ट में मेट्रो सिटीज से लेकर छोटे शहर, नेशनल हाईवे और रेल कॉरिडोर तक सब शामिल थे। नतीजे देखकर हर कोई हैरान रह गया। फोन में 5G लिखा आने के बावजूद कॉल ड्रॉप होना और कछुए की चाल से डेटा चलना बहुत आम बात पाई गई। कई जगह तो HD वीडियो तक बिना अटके नहीं चल पा रही थी।
मजेदार बात यह रही कि भोपाल, सागर जैसे नॉन-मेट्रो शहरों का नेटवर्क दिल्ली-मुंबई जैसे चमक-धमक वाले बड़े शहरों से कहीं बेहतर निकला। लेकिन लंबे हाईवे और ट्रेन रूट पर तो स्मूथ कनेक्टिविटी आज भी यूजर्स के लिए एक बहुत बड़ा चैलेंज बनी हुई है। आइए जानें कि आखिर आपके 5G के साथ यह गेम क्यों हो रहा है।
TRAI का क्या काम होता है
TRAI (Telecom Regulatory Authority of India) भारत में टेलीकॉम सेक्टर की सबसे बड़ी सरकारी रेगुलेटरी बॉडी यानी नियामक संस्था है। इसका काम देश में मोबाइल, ब्रॉडबैंड, इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं को सही तरीके से चलाना और कंट्रोल करना है। TRAI का मेन मकसद टेलीकॉम कंपनियों (जैसे Jio, Airtel, Vi) की मनमानी रोकना और आम ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
ये संस्था मोबाइल रिचार्ज प्लान के रेट्स, 5G-4G नेटवर्क की क्वालिटी, कॉल ड्रॉप की समस्या और सिम पोर्टेबिलिटी (MNP) जैसे नियमों को तय करती है। ताकि यूजर्स को सही दाम में बेहतर इंटरनेट और कॉलिंग सुविधाएं मिल सकें।
किन शहरों में हुआ टेस्ट
TRAI की टीम ने मुंबई, मध्यप्रदेश और झारखंड सहित कई शहरों में ये 5जी नेटवर्क ड्राइव टेस्ट किया। हर शहर में अलग-अलग रूट पर नेटवर्क की जांच हुई। कुछ शहरों में डाउनलोड स्पीड बेहतर मिली, जबकि कुछ जगह कॉल ड्रॉप की समस्या भी दिखी।
छोटे शहरों जैसे सागर और भरूच में भी नेटवर्क प्रदर्शन (mobile network) को परखा गया। इन शहरों का प्रदर्शन दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट जैसे बड़े केंद्रों के मुकाबले कई मामलों में बेहतर रहा।
कहां कैसा रहा नेटवर्क का हाल
रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में कवरेज गैप और कॉल ड्रॉप की स्थिति इस तरह रही:
- भोपाल में कवरेज गैप 1.12% और कॉल ड्रॉप 1.10% रहा।
- सागर में कवरेज गैप 5.34%, कॉल ड्रॉप 0.87% मिला।
- भरूच में कवरेज गैप 3.35% और कॉल ड्रॉप 0.73% रहा।
- मुंबई में कवरेज गैप 9.67%, कॉल ड्रॉप 1.79% रहा।
- उत्तर दिल्ली में कवरेज गैप 17.23% और कॉल ड्रॉप 3.18% मिला।
- दिल्ली एयरपोर्ट पर कवरेज गैप 18.33%, कॉल ड्रॉप 7.84% रहा।
- बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे रूट पर कवरेज गैप 23.38%, कॉल ड्रॉप 8.10% मिला।
- जोधपुर-अहमदाबाद रेल रूट पर कवरेज गैप 14.77%, कॉल ड्रॉप 3.74% रहा।
इन आंकड़ों (5G network in India) से साफ है कि भोपाल का प्रदर्शन बाकी शहरों के मुकाबले सबसे बेहतर रहा। वहीं बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे पर स्थिति सबसे कमजोर मिली।
हाईवे और रेल रूट पर बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे रूट पर हर चौथा सिग्नल कमजोर मिला। यह आंकड़ा बाकी सभी क्षेत्रों से ज्यादा है। इससे इस रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को कॉल और डेटा दोनों में दिक्कत हो सकती है।
जोधपुर-अहमदाबाद रेल लाइन पर भी नेटवर्क को लेकर चुनौतियां सामने आईं। रेल यात्रा के दौरान नेटवर्क बार-बार बदलने से सिग्नल क्वालिटी पर असर पड़ता है। यही वजह है कि इन रूट पर कवरेज गैप ज्यादा दर्ज हुआ है।
डाउनलोड स्पीड में भी अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे अधिक डाउनलोड स्पीड 150 से 282 एमबीपीएस (Mbps) के बीच मिली। वहीं उत्तर दिल्ली और दिल्ली एयरपोर्ट जैसे इलाकों में न्यूनतम स्पीड काफी कम रही। इन जगहों पर सामान्य वीडियो स्ट्रीमिंग करना भी मुश्किल हो रहा है।
साइलेंस कॉल में सागर का प्रदर्शन बेहतर
रिपोर्ट में साइलेंस कॉल का जिक्र भी किया गया है। साइलेंस कॉल का मतलब है कॉल के दौरान तीन सेकंड से ज्यादा आवाज गायब रहना। इस मामले में मध्य प्रदेश के सागर का प्रदर्शन दिल्ली एयरपोर्ट से बेहतर रहा। सागर में यह आंकड़ा कम मिला, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट पर यह ज्यादा रहा।
मध्यप्रदेश के भोपाल में भी कॉल ड्रॉप का प्रतिशत काफी कम दर्ज हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि छोटे शहरों में नेटवर्क प्रबंधन कई मामलों में बड़े शहरों से बेहतर साबित हो रहा है।
FAQ
- ट्राई ने कितने क्षेत्रों में ड्राइव टेस्ट किया?
ट्राई ने देश के 12 क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का ड्राइव टेस्ट किया। यह टेस्ट जून-जुलाई में 3,491 किलोमीटर से ज्यादा दूरी में हुआ। इसमें मुंबई, एमपी और रांची जैसे शहर शामिल रहे। - किस रूट पर सिग्नल सबसे कमजोर मिला?
बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे रूट पर सिग्नल सबसे कमजोर मिला। यहां हर चौथा सिग्नल कमजोर पाया गया। यह आंकड़ा सभी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा रहा। - किस शहर का नेटवर्क प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा?
एमपी के भोपाल का नेटवर्क प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। यहां कवरेज गैप और कॉल ड्रॉप दोनों सबसे कम दर्ज हुए। सागर का प्रदर्शन भी अन्य बड़े शहरों से बेहतर रहा।
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