भारत के बाद अमेरिका में भी SIR, करोड़ों वोटर्स के कटेंगे नाम!

Aman Vaishnav | Mar 11, 2026, 14:39 IST
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अमेरिका में वोटिंग नियमों को लेकर घमासान मचा हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सेव अमेरिका एक्ट को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इस कानून से दो करोड़ से ज्यादा नागरिकों के वोटिंग अधिकार पर खतरा मंडरा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वोटिंग नियमों को सख्त बनाने वाले सेव अमेरिका एक्ट* को लेकर कांग्रेस (अमेरिकी कांग्रेस) को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प का कहना है कि जब तक यह बिल पास नहीं होता वे किसी और बिल पर साइन नहीं करेंगे। यह बिल 2023 में कांग्रेस में पेश किया गया था।



साथ ही ये 2026 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पास हो चुका है, लेकिन सीनेट में 60 वोट की शर्त के कारण यह अटका हुआ है। वोट डालने और पंजीकरण के दौरान पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या अन्य सरकारी दस्तावेज दिखाना जरूरी होगा। ये नए कानून के तहत है जोकि नागरिकता साबित करने के लिए जरूरी है।



अमेरिका में 50 लाख भारतीय नागरिक

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले 8 महीनों में अमेरिकी मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। इसमें हाउस की 435 सीटों और सीनेट की 33 सीटों पर वोटिंग होगी। अमेरिका में लगभग 50 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इनमें से 25 लाख लोग वोट देने के योग्य हैं। इनमें से बहुत से लोग नेचुरलाइज्ड नागरिक हैं, और उनके पास पुराने दस्तावेज हमेशा नहीं होते हैं।



52% अमेरिकियों के पास पासपोर्ट नहीं

ब्रेनन सेंटर के अनुसार अमेरिका में करीब दो करोड़ 13 लाख योग्य नागरिक ऐसे हैं, जिनके पास तुरंत नागरिकता साबित करने वाला कोई दस्तावेज नहीं है। इसके अलावा लगभग 52% अमेरिकियों के पास पासपोर्ट नहीं है। इसका मतलब यह हो सकता है कि कई लोग मतदाता पंजीकरण से बाहर रह सकते हैं।



विशेषज्ञों का कहना है कि अश्वेत लोगों के पास वैध फोटो आईडी नहीं होने की संभावना श्वेतों से लगभग तीन गुना ज्यादा है। इस वजह से मतदान में नस्लीय असमानता बढ़ने का खतरा है।



अमेरिका में वोटर फ्रॉड के मामले

अमेरिका में वोटर फ्रॉड के मामले बेहद कम पाए गए हैं। ये 0.0001% से भी कम हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि, अधिकारियों को नए वोटर्स के पंजीकरण के डर से मुकदमे का सामना करने का खतरा हो सकता है। इसलिए वे पंजीकरण करने से बच रहे हैं।



सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के मुताबिक अमेरिका में 6.9 करोड़ महिलाएं (जो महिला वोटरों का 20% हैं) शादी के बाद अपना उपनाम बदल चुकी हैं। पुराने नाम से दस्तावेज होने की वजह से सत्यापन में परेशानी आती है।



Sootr Knowladge

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