20 मिनट के संबोधन में ट्रंप ने ईरान-इजराइल युद्ध की खोल के रख दी पोल, कहा- जल्द करेंगे बड़ा हमला
News In Short
- ट्रंप ने ईरान जंग पर 20 मिनट का राष्ट्रीय संबोधन दिया।
- उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह बर्बाद बताया।
- ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से तेल की जरूरत नहीं है।
- ट्रंप ने अगले 2 से 3 हफ्तों में ईरान पर और बड़े हमले का ऐलान किया है।
- ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने देंगे, यह साफ कर दिया।
News In Detail
ट्रंप का संबोधन: जंग जारी है पर जीत का दावा भी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2026 की सुबह भारतीय समयानुसार करीब 6:30 बजे अपने देश को संबोधित किया। यह उनका पहला प्राइम-टाइम भाषण था, जो इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले शुरू करने के एक महीने से ज्यादा समय बाद आया है। पूरा संबोधन करीब 20 मिनट का रहा।
ट्रंप ने संबोधन की शुरुआत जीत के बड़े दावे से की। उन्होंने कहा कि पिछले चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने युद्ध के मैदान में तेज, निर्णायक और भारी जीत हासिल की है। उनके मुताबिक, ऐसी जीत बहुत कम लोगों ने इतिहास में देखी होगी।
ईरान की सेना का हाल क्या है?
ट्रंप ने संबोधन में दावा किया कि ईरान की नौसेना अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। वायुसेना को भी बर्बाद बताया। साथ ही कहा कि आईआरजीसी (IRGC - Islamic Revolutionary Guard Corps) यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कमांड और कंट्रोल लगातार तबाह किया जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन दागने की ईरान की क्षमता को भी बड़े पैमाने पर कमजोर किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के इतिहास में किसी दुश्मन को इतने कम हफ्तों में इतना भारी नुकसान नहीं हुआ। यह बयान ट्रंप की उस कोशिश का हिस्सा था जिसमें वे अपने सैन्य अभियान को सफल साबित करना चाहते थे।
होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा बयान
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है। ईरान इसे बंद करने की धमकी देता रहा है। वहीं, ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को होर्मुज स्ट्रेट से लगभग कोई तेल नहीं मिलता, इसलिए इसकी जरूरत उसे नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन देशों को होर्मुज से तेल मिलता है, उन्हें खुद उसकी रखवाली करनी चाहिए।
ट्रंप का यह बयान उन देशों के लिए एक बड़ा संकेत है, जो मध्य-पूर्व से तेल आयात करते हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे ही यह जंग खत्म होगी, होर्मुज अपने आप खुल जाएगा।
2-3 हफ्तों में और बड़े हमले का ऐलान
जहां एक तरफ ट्रंप ने जीत के दावे किए, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन हफ्तों में ईरान पर बेहद कड़ा हमला किया जाएगा। उन्होंने यह भी इशारा दिया कि जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
यह बयान उन खबरों के बीच आया जब कहा जा रहा था कि ईरान ने सीजफायर (ceasefire) यानी युद्धविराम की मांग की है। ट्रंप ने इसकी पुष्टि की, हालांकि जमीनी हालात से इसकी पूरी तरह तसदीक नहीं होती।
कूटनीति और दबाव, दोनों एक साथ
ट्रंप ने बताया कि पर्दे के पीछे बातचीत जारी है और कूटनीतिक रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका अपना काम बहुत तेजी से पूरा करेगा।
यह दोहरा रुख यानी एक तरफ बातचीत और दूसरी तरफ हमले की धमकी, ट्रंप की उस रणनीति को दिखाता है जिसमें दबाव और कूटनीति को साथ-साथ चलाया जाता है। अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस संघर्ष को अपनी शर्तों पर खत्म करना चाहते हैं।
ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे
ट्रंप ने अपने संबोधन में सबसे सख्त बयान परमाणु कार्यक्रम को लेकर दिया। उन्होंने एकदम साफ कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) नहीं बनाने दिए जाएंगे। पहले ट्रंप यह धमकी दे चुके थे कि अगर ईरान शिपिंग के लिए होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता तो वे ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला करेंगे।
उन्होंने संबोधन में यह भी कहा कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों के अंतिम चरण के करीब है। मिशन अभी पूरा नहीं हुआ, लेकिन बहुत दूर भी नहीं है।
वेनेजुएला और मध्य-पूर्व से ऊर्जा आजादी
ट्रंप ने अपने भाषण में वेनेजुएला (Venezuela) का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने वहां के विशाल तेल और गैस भंडारों को विकसित करने और बेचने पर काम शुरू कर दिया है। वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है।
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने मध्य-पूर्व से ऊर्जा के मामले में आजादी पा ली है। लेकिन वे यह भी बोले कि अपने सहयोगी देशों की मदद के लिए अमेरिका मध्य-पूर्व में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगा।
जंग का अंत कब होगा?
यही सबसे बड़ा सवाल है जो ट्रंप के संबोधन के बाद भी अनुत्तरित रहा। एक तरफ वे कह रहे हैं कि हम जीत के करीब हैं और मिशन के अंतिम चरण में हैं। दूसरी तरफ वे यह भी मान रहे हैं कि कई जंगें लंबी चलती हैं। यह बयान खुद बताता है कि अमेरिका भी यह नहीं जानता कि यह संघर्ष कब तक खिंचेगा।
ट्रंप का 20 मिनट का यह संबोधन एक साथ कई बातें कह गया। जीत का जश्न भी, हमले की धमकी भी और बातचीत की उम्मीद भी। यह मिला-जुला संदेश ही बताता है कि मध्य-पूर्व की यह जंग अभी और मोड़ लेने वाली है।
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