देश में बढ़ती गर्मी से बच्चों में बढ़ रहा ठिगनापन, यूनिसेफ रिपोर्ट में खुलासा

Manya Jain | Jun 23, 2026, 12:55 IST
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यूनिसेफ और आईसीआरआईएसएटी की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु जोखिम बढ़ने से भारत में बच्चों में ठिगनापन और कुपोषण 15% तक बढ़ सकता है। बिहार सबसे संवेदनशील राज्य है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • यूनिसेफ इंडिया और ICRISAT ने बच्चों के स्वास्थ्य पर एक संयुक्त रिपोर्ट जारी की है।
  • बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी के कारण बच्चों में कुपोषण का खतरा बढ़ गया है।
  • जलवायु जोखिम वाले संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों में ठिगनापन 15% तक बढ़ सकता है।
  • इस खतरे की सूची में बिहार देश का सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बनकर उभरा है।
  • विशेषज्ञों ने बच्चों को बचाने के लिए पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने की सलाह दी है।

गर्मी और कम बारिश बन रहे बच्चों के दुश्मन

देश मेंमानसून अनियमित होता जा रहा है। गर्मी हरसाल नए रिकॉर्ड तोड़ रही है। इसका सबसेबुरा असर उन बच्चों पर पड़ रहा है जोपहले से कुपोषण की चपेट में हैं।



यूनिसेफइंडिया और आईसीआरआईएसएटी (ICRISAT –International Crops Research Institutefor the Semi-Arid Tropics) ने एकसंयुक्त रिपोर्ट में यह खुलासा किया है।रिपोर्ट के अनुसार जलवायु जोखिम वालेक्षेत्रों में बच्चों में ठिगनापन यानीस्टंटिंग (Stunting) और कुपोषण 15% तकबढ़ सकता है।



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बिहार सबसे खतरे में, MP भी पीछे नहीं

रिपोर्ट में राज्यों कीरैंकिंग दी गई है। इसमें जलवायु जोखिम औरठिगनेपन के आधार पर राज्यों को परखा गयाहै।



बिहार का डायमेंशनल क्लाइमेटवल्नरेबिलिटी इंडेक्स (MVI –Multidimensional Vulnerability Index)0.836 है। यह देश में सबसे अधिक है।उत्तर प्रदेश (0.834), झारखंड (0.829),छत्तीसगढ़(0.827) औरमध्यप्रदेश (0.816) टॉप 5में शामिल हैं।



UNICEF REPORT ON STUNTING


ठिगनेपन केमामले में देखेंतो बिहार में29.6%, उत्तरप्रदेश में 33.2%,झारखंड में 37.2%,छत्तीसगढ़ में 40.8%और मध्यप्रदेशमें 44.6%बच्चे प्रभावितहैं।



संवेदनशील जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट केअनुसार अत्यधिकजलवायु संवेदनशीलक्षेत्रों में बच्चोंमें स्टंटिंग कीदर 44.6% दर्जकी गई है।जबकि कम जोखिमवाले इलाकों मेंयह दर 29%है। यह फर्कबताता है किजलवायु और बच्चोंके स्वास्थ्यका सीधा संबंधहै।



गर्भावस्था में सबसे ज्यादा खतरा

जर्नल साइंसएडवांसेज में छपेएक अध्ययन काहवाला देते हुएरिपोर्ट में कहागया है किगर्भावस्था (प्रेगनेंसी) के अंतिममहीनों में अधिकगर्मी और उमस सेबच्चे के विकासपर सीधा असरपड़ता है। इससेजन्म के समयबच्चे का वजन औरलंबाई दोनोंप्रभावित हो सकतीहै।



सिर्फ खाना नहीं, पूरा तंत्र चाहिए

रिपोर्ट मेंस्पष्ट किया गयाहै किबच्चों को कुपोषणसे बचाने केलिए सिर्फखाना देनाकाफी नहीं है।स्वास्थ्य सेवाएं,शिक्षा, सामाजिकसुरक्षा और कृषिव्यवस्था सभी कोएक साथ मजबूतकरना होगा।



साथहीआंगनबाड़ी और स्कूलपोषण कार्यक्रमको असरदारबनाना जरूरी है।जल संचरण,भूजल संरक्षणऔर स्थानीयफसल विविधताभी इस लड़ाईमें जरूरीबताई गई है।



क्या करें सरकारें और समाज

विशेषज्ञमानते हैं किजलवायु परिवर्तनका बेहतरसामना करने केलिए स्थानीयस्तर पर कामकरना होगा।पानी की बचत,पोषणकार्यक्रमों की पहुंचऔर बेहतरस्वास्थ्य सुविधाएंएक साथ जरूरीहैं। बिना इसतालमेल के बच्चोंकी सेहतसुधरना मुश्किलहै।



FAQ

  1. यूनिसेफ की रिपोर्ट में बच्चों में ठिगनापन क्यों बढ़ने की बात कही गई है?
    यूनिसेफ और आईसीआरआईएसएटी की रिपोर्ट के अनुसार कम मानसून और बढ़ती गर्मी से खाद्य उत्पादन घटता है। इससे बच्चों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता। जलवायु जोखिम वाले इलाकों में यह समस्या 15% तक बढ़ सकती है।
  2. भारत में सबसे ज्यादा खतरे में कौन से राज्य हैं?
    बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश सबसे अधिक जलवायु संवेदनशील राज्य हैं। इनमें बच्चों में ठिगनेपन की दर भी सबसे अधिक है। बिहार इस सूची में पहले स्थान पर है।
  3. बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए क्या करना होगा?
    रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और जल संरक्षण को एक साथ मजबूत करना होगा। आंगनबाड़ी और स्कूल पोषण कार्यक्रम असरदार बनाने होंगे। साथ ही जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना भी जरूरी है।

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