जानें कैसा रहा यूपीएससी के 100 साल का सफर, पीएम मोदी ने जारी किया सिक्का और डाक टिकट
भारत मंडपम शताब्दी समारोह की झलक
यह भारत मंडपम शताब्दी समारोह 2 दिन चलेगा। देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य शामिल हैं।
केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद भी इसमें हैं। यूपीएससी के अधिकारी भी हिस्सा ले रहे हैं।
आयोजन में राज्यों के आयोगों के प्रतिनिधि भी आए हैं। यानी सिर्फ केंद्र नहीं, राज्यों की भर्ती संस्थाएं भी इस जश्न से जुड़ी हैं।
स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी
आयोग के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दोनों जारी हुए। स्मारक सिक्का किसी खास मौके की याद में निकाला जाता है। डाक टिकट वही छोटा टिकट है, जो चिट्ठी पर लगता है।
प्रधानमंत्री ने सिक्का और डाक टिकट के साथ विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया। तीनों काम 1 अक्टूबर को भारत मंडपम में हुए।
अब जरा पीछे चलते हैं।
यूपीएससी स्थापना दिवस: 1926 की कहानी
सौ साल पहले यह आयोग कैसे शुरू हुआ था? 1 अक्टूबर 1926 को पब्लिक सर्विस कमीशन की स्थापना हुई थी। इसी तारीख पर यूपीएससी स्थापना दिवस का शताब्दी समारोह हुआ।
तारीख वही रही, 1 अक्टूबर। ठीक सौ साल बाद उसी दिन आयोग का शताब्दी समारोह हुआ।
लॉर्ड ली की सिफारिश पर बना कमीशन
यह कमीशन लॉर्ड ली की अध्यक्षता वाले रॉयल कमीशन की सिफारिश पर बना था। इसका पूरा नाम रॉयल कमीशन ऑन द सुपीरियर सिविल सर्विसेज इन इंडिया था।
सर रॉस बार्कर थे पहले कमीशन प्रमुख
पहले पब्लिक सर्विस कमीशन के प्रमुख सर रॉस बार्कर थे। शुरुआती दौर में कमीशन की भूमिका सीमित थी। वह सलाह देने तक ही सीमित था।
फिर देश आजाद हुआ।
लोक सेवा आयोग का इतिहास: नया दर्जा
आजादी के बाद भारतीय संविधान के तहत आयोग को संवैधानिक संस्था का दर्जा मिला। संवैधानिक संस्था यानी वह संस्था, जिसका जिक्र संविधान में है।
पहले इसे लोक सेवा आयोग के नाम से जाना जाता था। अब इसे संघ लोक सेवा आयोग कहा जाता है। इस तरह 1926 का पब्लिक सर्विस कमीशन आज संघ लोक सेवा आयोग है। नाम बदला और भूमिका भी बदली।
संघ लोक सेवा आयोग का काम क्या है?
आज यह आयोग क्या करता है? इसका मुख्य काम केंद्र सरकार की सेवाओं और पदों की भर्ती परीक्षा कराना है। अलग-अलग विभागों और सेवाओं के लिए उम्मीदवार इन्हीं परीक्षाओं से चुने जाते हैं।
सोचिए एक बार। सरकारी सेवाओं के लिए योग्य उम्मीदवार चुनने में आयोग की अहम भूमिका रही है।
सिविल सेवा परीक्षा के तीन चरण कौन से?
सिविल सेवा परीक्षा यूपीएससी की प्रमुख परीक्षाओं में शामिल है। यह तीन चरणों में होती है। पहला चरण प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) है। दूसरा मुख्य परीक्षा (Mains) और तीसरा व्यक्तित्व परीक्षण यानी इंटरव्यू है।
इससे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी चुने जाते हैं। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में भी चयन होता है। भारतीय विदेश सेवा (IFS – Indian Foreign Service) भी इसी रास्ते से मिलती है।
और कौन सी परीक्षाएं कराता है आयोग?
सिविल सेवा के अलावा आयोग कई और प्रतियोगी परीक्षाएं कराता है। इनमें इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा और संयुक्त चिकित्सा सेवा परीक्षा शामिल हैं। संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा भी आयोग ही कराता है।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी एवं नौसेना अकादमी परीक्षा भी इसी सूची में है। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल परीक्षा और भारतीय वन सेवा परीक्षा भी शामिल हैं। भारतीय आर्थिक सेवा और भारतीय सांख्यिकी सेवा की परीक्षा भी होती है।
यूपीएससी के 100 साल का पड़ाव
यूपीएससी के 100 साल सलाहकार कमीशन से संवैधानिक संस्था तक का सफर हैं। 1926 में सीमित भूमिका थी। आज आयोग केंद्र की सेवाओं की भर्ती परीक्षाएं कराता है।
आज यही आयोग IAS, IPS और IFS जैसी सेवाओं के लिए अधिकारी चुनता है। 1926 से 2026 तक का यह रास्ता कितना लंबा रहा?
यह खबर क्यों जरूरी है
संघ लोक सेवा आयोग देश की सरकारी सेवाओं के लिए उम्मीदवार चुनता है। आजादी के बाद भारतीय संविधान के तहत इसे संवैधानिक संस्था का दर्जा मिला। यानी भर्ती की यह प्रक्रिया संविधान से जुड़ी है। सौ साल का यह पड़ाव खास है।
चयन की यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। योग्यता पर आधारित चयन बराबरी के अवसर के विचार से जुड़ा है। सिविल सेवा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के लिए यह इतिहास मायने रखता है।
FAQ
- यूपीएससी की स्थापना कब हुई थी?
संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी। तब इसे पब्लिक सर्विस कमीशन कहा गया था। इसके पहले प्रमुख सर रॉस बार्कर थे। - यूपीएससी के 100 साल पर प्रधानमंत्री ने क्या जारी किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने एक विशेष पुस्तक का भी विमोचन किया। समारोह 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ। - सिविल सेवा परीक्षा कितने चरणों में होती है?
सिविल सेवा परीक्षा तीन चरणों में होती है। ये हैं प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और व्यक्तित्व परीक्षण यानी इंटरव्यू। इससे आईएएस, आईपीएस और भारतीय विदेश सेवा जैसी सेवाओं के अधिकारी चुने जाते हैं।