UPSC Result 2025: क्या सचमुच गरीब हैं EWS कोटे से चुने गए 104 अभ्यर्थी
UPSC Result 2025. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 2025 सिविल सेवा रिजल्ट में EWS कोटे से 104 अभ्यर्थी चुने गए हैं। इनमें से कई ऐसे हैं जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं। इन चुने गए लोगों में निजी स्कूल में पढ़े, महंगी कोचिंग लेने वाले और संपन्न कारोबारी परिवारों के बच्चे शामिल हैं।
64.4 फीसद चुने गए अभ्यर्थियों ने कोचिंग ली थी। इस खुलासे ने EWS आरक्षण की व्यवस्था और उसकी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
EWS कोटा किसके लिए बना था
सरकार ने 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए 10 फीसद आरक्षण लागू किया था। यह उन परिवारों के लिए था जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है। इसके अलावा जमीन और संपत्ति की सीमा भी तय की गई थी। मकसद था उन युवाओं को मौका देना जो आर्थिक तंगी की वजह से प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं।
कोटे से चयन पर क्या सवाल उठे
मीडिया की पड़ताल में सामने आया है कि EWS कोटे से चुने गए 104 अभ्यर्थियों में से कई का बैकग्राउंड काफी मजबूत है। इनमें से 44.4 फीसदी ने निजी स्कूलों में लाखों रुपए की फीस देकर पढ़ाई की है। 26.9 फीसदी अभ्यर्थियों का परिवार मजबूत कारोबारी पृष्ठभूमि से है।वहीं 9.6 फीसद कॉर्पोरेट नौकरी कर चुके हैं। इसका मतलब इनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर नहीं दिखती है।
लिस्ट में कुछ ऐसे भी हैं जिनकी मेहनत असली है। बस कंडक्टर और सुरक्षा गार्ड की बेटियां इस परीक्षा में पास हुई हैं, तो किसी ने जैसे-तैसे गुजारा करते हुए पढ़ाई की। किसी ने फीस भरने के लिए पार्टटाइम काम भी किया है।
इस प्रकार कोटे का असली मकसद कुछ हद तक पूरा हो रहा है। लेकिन बड़ा हिस्सा उन लोगों के पास जा रहा है जिन्हें इसकी जरूरत नहीं थी।
958 में से 104 पास हुए, आंकड़े क्या कहते हैं
- कुल उम्मीदवार और परिणाम: परीक्षा में EWS कोटे से कुल 958 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से 104 उम्मीदवार सफल रहे।
- निजी कोचिंग का ट्रेंड: सफल उम्मीदवारों में से 64.4% ने प्राइवेट कोचिंग का सहारा लिया था।
- महंगी कोचिंग का विकल्प: 67 उम्मीदवारों ने देश के नामी संस्थानों में 2.75 लाख रुपए तक की भारी-भरकम फीस देकर कोचिंग की।
- निजी स्कूलों से शिक्षा: 46 उम्मीदवारों ने प्राइवेट स्कूलों में 45 हजार से लेकर 1.25 लाख रुपए तक की सालाना फीस देकर अपनी पढ़ाई पूरी की थी।
- आधिकारिक कोचिंग का लाभ: 84 उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए सरकार या संस्था द्वारा चलाए जाने वाले आधिकारिक कोचिंग प्रोग्राम का हिस्सा बनकर तैयारी की।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: 28 सफल उम्मीदवारों के परिवार काफी संपन्न कारोबारी पृष्ठभूमि (स्ट्रांग बिजनेस बैकग्राउंड) से ताल्लुक रखते हैं।
राज्यवार EWS चयन की तस्वीर
- उत्तर प्रदेश: सबसे अधिक 25 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
- बिहार: यहां से कुल 17 अभ्यर्थी चुने गए।
- मध्य प्रदेश: कुल 14 अभ्यर्थियों ने सफलता प्राप्त की।
- हरियाणा: यहां से 9 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
- राजस्थान: कुल 8 अभ्यर्थी सफल रहे।
- गुजरात: यहाँ से 5 अभ्यर्थियों ने बाजी मारी।
- उत्तराखंड और कर्नाटक: दोनों राज्यों से 4-4 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
- केरल: यहां से 3 अभ्यर्थी चुने गए।
क्या स्व-घोषणा की व्यवस्था पर्याप्त है
ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए उम्मीदवार खुद अपनी आय और संपत्ति की जानकारी देते हैं। इसे सरकारी अधिकारी प्रमाणित करते हैं, लेकिन गहरी जांच नहीं होती है। पूर्व अधिकारियों का कहना है कि आयकर रिटर्न और संपत्ति के दस्तावेज आधार बनाए जाने चाहिए। सिर्फ स्व-घोषणा काफी नहीं है। यह खामी व्यवस्था को कमजोर बनाती है।
आरक्षण का उद्देश्य विफल हो रहा है क्या
दिल्ली जैसे शहरों में महंगी कोचिंग और निजी स्कूल में पढ़ने की क्षमता रखने वाले परिवार आर्थिक रूप से कमजोर नहीं कहे जा सकते हैं। इसके बाद भी वे ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ उठा रहे हैं।
दूसरी ओर असली जरूरतमंद युवा सामान्य श्रेणी से कॉम्पटीशन करने में पिछड़ जाते हैं। इस स्थिति ने यह बहस छेड़ दी है कि आरक्षण और विशेष अवसर का लाभ सही लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं।
FAQ
- ईडब्ल्यूएस कोटा क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 2019 में 10 फीसद आरक्षण लागू किया गया था। इसका लाभ उन्हें मिलता है जिनके परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम हो। इसके साथ जमीन और मकान की भी सीमा तय है। - यूपीएससी ईडब्ल्यूएस कोटे पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
2025 के परिणाम में ईडब्ल्यूएस कोटे से चुने 104 में से कई अभ्यर्थियों के परिवार संपन्न पाए गए। निजी स्कूल, महंगी कोचिंग और कारोबारी पृष्ठभूमि ने यह सवाल उठाया कि क्या ये वाकई आर्थिक रूप से कमजोर थे। प्रमाणपत्र की जांच प्रक्रिया कमजोर बताई जा रही है।
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