EWS कोटा डेटा
यूपीएससी 2025: EWS कोटे में एलीट क्लास की सेंध, जानिए चयनितों का पूरा सच
Jinesh Jain | Jun 19, 2026, 16:14 IST
Photograph: (the sootr)
यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में EWS कोटे से 104 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। इस कोटे से कई ऐसे चयनित उम्मीदवार भी हैं, जिनका बैकग्राउंड इस कोटे के मकसद पर सवाल खड़ा कर रहा है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट:
New Delhi: इस साल यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत कई उम्मीदवार सफल हुए हैं। इनमें से कुछ एक सुरक्षा गार्ड के बेटे या रेलवे कुली की बेटी हैं। वहीं, इसी कोटे की सूची में कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिनका बैकग्राउंड बिल्कुल अलग कहानी बयां करता है।
इनमें व्यापारियों के बेटे-बेटियां, IIT स्नातक और निजी स्कूलों के पूर्व छात्र शामिल हैं। इनकी सालाना फीस एक लाख रुपए से अधिक है। सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 10 प्रतिशत EWS कोटे के तहत 104 उम्मीदवारों का चयन हुआ। यह कोटा सामान्य वर्ग के उन परिवारों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम है।
'इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल में इस योजना के घोषित उद्देश्य और इसके तहत लाभ पाने वाले कई लोगों की प्रोफाइल के बीच एक बड़ा अंतर (गैप) सामने आया है। यह गैप इस योजना के मकसद पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इस लिस्ट में कुछ ऐसे नाम भी हैं, जिनकी मौजूदगी उनकी पात्रता (eligibility) पर सवाल खड़े करती है। इसने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के भीतर नियमों को कड़ा करने या अधिक मजबूत जांच-पड़ताल (due diligence) करने की बहस को हवा दे दी है।
पड़ताल से पता चला कि साल 2025 में EWS कोटे के तहत सफल होने वाले उम्मीदवारों में से एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्होंने:
नामी सिविल सेवा कोचिंग संस्थानों से पढ़ाई की (64.4%)
प्राइवेट स्कूलों से शिक्षा हासिल की (44.4%)
ऐसे परिवारों से, जिनके माता-पिता का अपना बिजनेस है (26.9%)
कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरियां कर रहे थे (9.6%)
साल 2019 में शुरू किए गए EWS कोटे के तहत सामान्य वर्ग के उन परिवारों के उम्मीदवारों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं, जिनकी सालाना पारिवारिक आय 8 लाख रुपए से कम है। इसमें कुछ संपत्ति-स्वामित्व की शर्तें भी लागू होती हैं।
मार्च में घोषित नतीजों के आधार पर 2025 में चुने 958 उम्मीदवारों की सूची में से EWS कोटे के तहत क्वालीफाई करने वाले सभी 104 उम्मीदवारों का रिकॉर्ड खंगाला गया। इसमें उनके के सोशल मीडिया प्रोफाइल, कोचिंग संस्थान के रिकॉर्ड, स्कूल और कॉलेज के विवरण शामिल थे।
104: 2025 की सिविल सेवा परीक्षा में चयनित EWS उम्मीदवार।
67: जाने-माने कोचिंग संस्थानों में पढ़े। इनकी सालाना फीस 2.65 लाख रुपए तक है।
28: उम्मीदवारों के माता-पिता के अपने बिजनेस हैं। जैसे दुकानें, स्टील फैब्रिकेशन का काम, कपड़ा और कन्फेक्शनरी का व्यापार।
10: उम्मीदवार प्राइवेट नौकरियों में थे। इनमें MNCs (बहुराष्ट्रीय कंपनियां) भी शामिल हैं।
14: IIT से ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। कम से कम तीन NIT से हैं।
2019 में नॉटिफाइड आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटा सामान्य वर्ग के व्यक्तियों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण देता है। ये SC, ST या OBC आरक्षण के दायरे में नहीं आते हैं। इसमें आवेदक और उनके परिवार शामिल हैं।
केंद्र सरकार के 2019 के कार्यालय ज्ञापन (office memorandum) में स्पष्ट किया है, इस उद्देश्य के लिए परिवार शब्द में वह व्यक्ति शामिल होगा, जो आरक्षण का लाभ चाहता है। उसके माता-पिता, 18 वर्ष से कम उम्र के भाई-बहन और साथ ही उसके पति/पत्नी और 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल होंगे।
कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
परिवार के पास 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए।
इनके पास 1,000 वर्ग फुट या उससे अधिक का आवासीय फ्लैट नहीं होना चाहिए।
महंगी कोचिंग का सहारा: कम से कम 67 उम्मीदवारों ने दिल्ली और अन्य शहरों के नामी कोचिंग संस्थानों (जैसे वाजीराम एंड रवि, वाजीराव एंड रेड्डी और दृष्टि IAS) से पढ़ाई की। इनकी सालाना फीस 2.65 लाख रुपए तक हो सकती है।
कुल मिलाकर 104 में से कम से कम 84 उम्मीदवारों ने सिविल सेवा कोचिंग का लाभ उठाया (कई ने फोरम IAS, नेक्स्ट IAS, किंगमेकर्स IAS और UPSC वाला जैसे कई संस्थानों से पढ़ाई की)। इसमें सरकार द्वारा प्रायोजित या विश्वविद्यालयों द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रम शामिल नहीं हैं।
प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई: कम से कम 46 उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और राज्यों की राजधानियों (जैसे लखनऊ, रायपुर और जयपुर) के प्राइवेट स्कूलों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। यह भी पाया गया कि इन स्कूलों की फीस 45,000 से 1.5 लाख रुपए सालाना के बीच है।
पारिवारिक बिजनेस: कम से कम 28 उम्मीदवारों के माता-पिता के अपने व्यवसाय हैं। मसलन दुकानों से लेकर स्टील फैब्रिकेशन, कपड़ा और कन्फेक्शनरी (मिठाई/बेकरी) तक। इनमें से कम से कम पांच परिवार NCR में, एक राज्य की राजधानी में और आठ अन्य विभिन्न जिला मुख्यालयों में स्थित हैं।
मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरियां: कम से कम 10 उम्मीदवार प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत थे। इनमें कुछ मल्टीनेशनल (MNCs) और बड़ी सॉफ्टवेयर व कंस्ट्रक्शन कंपनियां शामिल थीं। यह उनकी UPSC तैयारी शुरू करने से ठीक पहले की बात है। इनमें से कुछ को अच्छा-खासा वेतन मिल रहा था।
प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री: 104 उम्मीदवारों में से कम से कम 14 उम्मीदवार IIT से स्नातक या स्नातकोत्तर (graduate/post-graduates) हैं। कम से कम तीन NIT से हैं। कम से कम 27 ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और कम से कम तीन ने JNU, दिल्ली से पढ़ाई की है।
इसी सूची में ऐसे उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो वास्तव में इस योजना के असली हकदार हैं। ये इसके उद्देश्य को पूरा करते हैं।
एक उम्मीदवार रिटायर्ड फौजी का बेटा है, जो अब सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। एक अन्य उम्मीदवार स्कूल बस कंडक्टर का बेटा है। एक महिला उम्मीदवार पूर्व रेलवे कुली की बेटी है।
अन्य उम्मीदवार दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगार माता-पिता के परिवारों से आते हैं। कम से कम सात ने जवाहर नवोदय विद्यालयों से पढ़ाई की है। यह मुख्य रूप से ग्रामीण बच्चों के लिए आवासीय सरकारी स्कूल हैं। इनमें से कई किसान पिताओं के ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले हिंदी-माध्यम के छात्र हैं।
29 उम्मीदवारों के माता-पिता किसान हैं। इनमें उत्तर प्रदेश से सात, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश से चार-चार और एक दक्षिणी राज्य के एक ही परिवार से दो उम्मीदवार शामिल हैं।
दस्तावेज दिखाते हैं कि ये 104 उम्मीदवार पूरे देश से चुने गए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश से 25, बिहार से 17, मध्य प्रदेश से 14,हरियाणा से 9 और राजस्थान से 8 उम्मीदवार सफल हुए। इसी तरह गुजरात से 5, उत्तराखंड से 4, कर्नाटक से 4 और केरल से 3 उम्मीदवार कामयाब रहे।
पूर्व और वर्तमान सिविल सेवा अधिकारियों का कहना है कि कई EWS उम्मीदवारों ने दिल्ली में कई सालों तक तैयारी की। इन्होंने महंगी कोचिंग का खर्च उठाया। प्राइवेट स्कूली शिक्षा प्राप्त की। ये चीजें इस बात पर सवाल खड़े करती हैं कि क्या इस कोटे का लाभ अपेक्षाकृत बेहतर वित्तीय और शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले लोगों द्वारा लिया जा रहा है?
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा का कहना है कि EWS कोटा आय और संपत्ति के मानदंडों पर निर्भर करता है। दावों का सत्यापन करते समय जारी करने वाले अधिकारियों को केवल स्व-घोषणा (self-declaration) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें आयकर रिटर्न और गहन जांच-पड़ताल करनी चाहिए। अगर संपन्न लोग इस लाभ को हड़प लेंगे, तो EWS आरक्षण का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
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इनमें व्यापारियों के बेटे-बेटियां, IIT स्नातक और निजी स्कूलों के पूर्व छात्र शामिल हैं। इनकी सालाना फीस एक लाख रुपए से अधिक है। सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 10 प्रतिशत EWS कोटे के तहत 104 उम्मीदवारों का चयन हुआ। यह कोटा सामान्य वर्ग के उन परिवारों के लिए है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम है।
'इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल में इस योजना के घोषित उद्देश्य और इसके तहत लाभ पाने वाले कई लोगों की प्रोफाइल के बीच एक बड़ा अंतर (गैप) सामने आया है। यह गैप इस योजना के मकसद पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
क्या सच में जरूरतमंदों को मिल रहा है हक?
पड़ताल से पता चला कि साल 2025 में EWS कोटे के तहत सफल होने वाले उम्मीदवारों में से एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्होंने:
नामी सिविल सेवा कोचिंग संस्थानों से पढ़ाई की (64.4%)
प्राइवेट स्कूलों से शिक्षा हासिल की (44.4%)
ऐसे परिवारों से, जिनके माता-पिता का अपना बिजनेस है (26.9%)
कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरियां कर रहे थे (9.6%)
क्या है EWS कोटा?
मार्च में घोषित नतीजों के आधार पर 2025 में चुने 958 उम्मीदवारों की सूची में से EWS कोटे के तहत क्वालीफाई करने वाले सभी 104 उम्मीदवारों का रिकॉर्ड खंगाला गया। इसमें उनके के सोशल मीडिया प्रोफाइल, कोचिंग संस्थान के रिकॉर्ड, स्कूल और कॉलेज के विवरण शामिल थे।
UPSC 2025: EWS कोटा डेटा
67: जाने-माने कोचिंग संस्थानों में पढ़े। इनकी सालाना फीस 2.65 लाख रुपए तक है।
28: उम्मीदवारों के माता-पिता के अपने बिजनेस हैं। जैसे दुकानें, स्टील फैब्रिकेशन का काम, कपड़ा और कन्फेक्शनरी का व्यापार।
10: उम्मीदवार प्राइवेट नौकरियों में थे। इनमें MNCs (बहुराष्ट्रीय कंपनियां) भी शामिल हैं।
14: IIT से ग्रेजुएट या पोस्ट-ग्रेजुएट हैं। कम से कम तीन NIT से हैं।
EWS के तहत कौन पात्र?
केंद्र सरकार के 2019 के कार्यालय ज्ञापन (office memorandum) में स्पष्ट किया है, इस उद्देश्य के लिए परिवार शब्द में वह व्यक्ति शामिल होगा, जो आरक्षण का लाभ चाहता है। उसके माता-पिता, 18 वर्ष से कम उम्र के भाई-बहन और साथ ही उसके पति/पत्नी और 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल होंगे।
पात्रता के मानदंड:
परिवार के पास 5 एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि नहीं होनी चाहिए।
इनके पास 1,000 वर्ग फुट या उससे अधिक का आवासीय फ्लैट नहीं होना चाहिए।
IAS अधिकारी
यह तथ्य सामने आए पड़ताल में
कुल मिलाकर 104 में से कम से कम 84 उम्मीदवारों ने सिविल सेवा कोचिंग का लाभ उठाया (कई ने फोरम IAS, नेक्स्ट IAS, किंगमेकर्स IAS और UPSC वाला जैसे कई संस्थानों से पढ़ाई की)। इसमें सरकार द्वारा प्रायोजित या विश्वविद्यालयों द्वारा चलाए जाने वाले कार्यक्रम शामिल नहीं हैं।
प्राइवेट स्कूलों से पढ़ाई: कम से कम 46 उम्मीदवारों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और राज्यों की राजधानियों (जैसे लखनऊ, रायपुर और जयपुर) के प्राइवेट स्कूलों से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। यह भी पाया गया कि इन स्कूलों की फीस 45,000 से 1.5 लाख रुपए सालाना के बीच है।
पारिवारिक बिजनेस: कम से कम 28 उम्मीदवारों के माता-पिता के अपने व्यवसाय हैं। मसलन दुकानों से लेकर स्टील फैब्रिकेशन, कपड़ा और कन्फेक्शनरी (मिठाई/बेकरी) तक। इनमें से कम से कम पांच परिवार NCR में, एक राज्य की राजधानी में और आठ अन्य विभिन्न जिला मुख्यालयों में स्थित हैं।
मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरियां: कम से कम 10 उम्मीदवार प्राइवेट सेक्टर में कार्यरत थे। इनमें कुछ मल्टीनेशनल (MNCs) और बड़ी सॉफ्टवेयर व कंस्ट्रक्शन कंपनियां शामिल थीं। यह उनकी UPSC तैयारी शुरू करने से ठीक पहले की बात है। इनमें से कुछ को अच्छा-खासा वेतन मिल रहा था।
प्रतिष्ठित संस्थानों से डिग्री: 104 उम्मीदवारों में से कम से कम 14 उम्मीदवार IIT से स्नातक या स्नातकोत्तर (graduate/post-graduates) हैं। कम से कम तीन NIT से हैं। कम से कम 27 ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और कम से कम तीन ने JNU, दिल्ली से पढ़ाई की है।
ये हैं योजना के असली हकदार
एक उम्मीदवार रिटायर्ड फौजी का बेटा है, जो अब सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। एक अन्य उम्मीदवार स्कूल बस कंडक्टर का बेटा है। एक महिला उम्मीदवार पूर्व रेलवे कुली की बेटी है।
अन्य उम्मीदवार दिहाड़ी मजदूरों और बेरोजगार माता-पिता के परिवारों से आते हैं। कम से कम सात ने जवाहर नवोदय विद्यालयों से पढ़ाई की है। यह मुख्य रूप से ग्रामीण बच्चों के लिए आवासीय सरकारी स्कूल हैं। इनमें से कई किसान पिताओं के ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले हिंदी-माध्यम के छात्र हैं।
29 उम्मीदवारों के माता-पिता किसान हैं। इनमें उत्तर प्रदेश से सात, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश से चार-चार और एक दक्षिणी राज्य के एक ही परिवार से दो उम्मीदवार शामिल हैं।
EWS डेटा
इन राज्यों से आए सफल अभ्यर्थी
फिर तो फेल हो जाएगा मकसद
पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा का कहना है कि EWS कोटा आय और संपत्ति के मानदंडों पर निर्भर करता है। दावों का सत्यापन करते समय जारी करने वाले अधिकारियों को केवल स्व-घोषणा (self-declaration) पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें आयकर रिटर्न और गहन जांच-पड़ताल करनी चाहिए। अगर संपन्न लोग इस लाभ को हड़प लेंगे, तो EWS आरक्षण का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
FAQ
- EWS कोटे के लिए कौन पात्र है?
सामान्य वर्ग के वे परिवार जिनकी सालाना आय 8 लाख रुपए से कम है। जिनके पास 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि या 1000 वर्ग फुट से बड़ा फ्लैट नहीं है। SC, ST और OBC पहले से इस कोटे के दायरे से बाहर हैं। - UPSC 2025 में EWS कोटे से कितने उम्मीदवार सफल हुए?
958 कुल सफल उम्मीदवारों में से 104 EWS कोटे के तहत चुने गए। इनमें राजस्थान से 8, उत्तर प्रदेश से 25 और बिहार से 17 उम्मीदवार हैं। - EWS कोटे में धांधली कैसे होती है?
EWS प्रमाणपत्र सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर बनता है। आयकर रिटर्न या संपत्ति की गहन जांच नहीं होती। इसी कारण अपेक्षाकृत संपन्न परिवारों के बच्चे भी इस कोटे का लाभ उठा लेते हैं।
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