विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा
बीजेपी विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, हैदराबाद में चल रहा था इलाज, लंबे समय से थे बीमार
Harrison Masih | Oct 30, 2026, 17:57 IST
अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, राजनीतिक गलियारों में छाई शोक की लहर
छत्तीसगढ़ की राजनीति से एक दुखद खबर सामने आई है। दुर्ग जिले की अहिवारा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन हो गया है। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका हैदराबाद के यशोदा अस्पताल में इलाज चल रहा था। उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही अहिवारा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
दुर्ग-भिलाई से लेकर राजधानी रायपुर तक राजनीतिक गलियारों में दुख का माहौल है। भाजपा के वरिष्ठ नेता के निधन से पार्टी को बड़ा झटका लगा है।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा छत्तीसगढ़ भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अहम योगदान दिया। उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। वे एक शिक्षक भी रह चुके थे। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी नई पारी शुरू की। धीरे-धीरे वे भाजपा के मजबूत नेताओं में शामिल हो गए। अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान थी।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का जन्म 12 अगस्त 1948 को हुआ था। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया था। इसके साथ ही उन्होंने बीएड की पढ़ाई भी पूरी की थी। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने लंबे समय तक सेवाएं दीं।
![विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा]()
वे व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 1998 में वे इस पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1999 में उन्होंने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद के निजी सहायक के रूप में भी काम किया। इस दौरान उन्हें राजनीति को करीब से समझने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा ने वर्ष 2008 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। भाजपा ने उन्हें अहिवारा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की और पहली बार विधायक बने। इस जीत के बाद क्षेत्र में उनका राजनीतिक कद बढ़ा।
हालांकि, इसके बाद भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में अहिवारा सीट भाजपा के हाथ से निकल गई। वर्ष 2018 में कांग्रेस के गुरु रुद्र कुमार यहां से विधायक चुने गए थे।
इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर डोमनलाल कोर्सेवाड़ा पर भरोसा जताया। पार्टी ने उन्हें अहिवारा से टिकट दिया। इस बार उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे को बड़े अंतर से हराया।
इस चुनाव में डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को कुल 96,717 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे को 71,454 मत प्राप्त हुए थे। इस तरह उन्होंने 25,263 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह उनकी दूसरी विधानसभा जीत थी। इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर अहिवारा सीट पर भाजपा का कब्जा कराया।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को अपने राजनीतिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली थीं। वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बनने के बाद ही उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2010 में उन्हें छत्तीसगढ़ विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था। इस पद पर उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला हुआ था।
विधानसभा में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के कल्याण से जुड़ी समितियों में शामिल रहे। इन समितियों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक वर्गों से जुड़े विषयों पर काम किया।
वर्ष 2023 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद भी उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं। उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा की अलग-अलग समितियों में जगह मिली। इनमें पुस्तकालय समिति के सभापति की जिम्मेदारी भी शामिल थी। इसके अलावा उन्होंने अन्य समितियों में भी अपनी भूमिका निभाई।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के राजनीतिक अनुभव और वरिष्ठता को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। अक्टूबर 2025 में उन्हें अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसके बाद नवंबर 2025 में उन्होंने इस पद का कार्यभार संभाला था।
इस तरह निधन के समय वे दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे। वे अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक थे। साथ ही अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत थे।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। शिक्षक के रूप में करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बने। इसके बाद वर्ष 2023 में दूसरी बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं।
उनके निधन से भाजपा ने अपना एक अनुभवी नेता खो दिया है। वहीं अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए भी यह बड़ी क्षति है। उनके निधन की खबर से समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में दुख है। दुर्ग-भिलाई सहित पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा छत्तीसगढ़ भाजपा के अनुभवी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में अहम योगदान दिया। उनका राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। वे एक शिक्षक भी रह चुके थे। नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी नई पारी शुरू की। धीरे-धीरे वे भाजपा के मजबूत नेताओं में शामिल हो गए। अहिवारा विधानसभा क्षेत्र में उनकी अच्छी पहचान थी।
डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का राजनीतिक सफर
वे व्याख्याता के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 1998 में वे इस पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1999 में उन्होंने दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के तत्कालीन सांसद के निजी सहायक के रूप में भी काम किया। इस दौरान उन्हें राजनीति को करीब से समझने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने जनता के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।
2008 में पहली बार बने अहिवारा के विधायक
हालांकि, इसके बाद भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2013 और 2018 के विधानसभा चुनाव में अहिवारा सीट भाजपा के हाथ से निकल गई। वर्ष 2018 में कांग्रेस के गुरु रुद्र कुमार यहां से विधायक चुने गए थे।
इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर डोमनलाल कोर्सेवाड़ा पर भरोसा जताया। पार्टी ने उन्हें अहिवारा से टिकट दिया। इस बार उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे को बड़े अंतर से हराया।
इस चुनाव में डोमनलाल कोर्सेवाड़ा को कुल 96,717 वोट मिले थे। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल कोसरे को 71,454 मत प्राप्त हुए थे। इस तरह उन्होंने 25,263 वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह उनकी दूसरी विधानसभा जीत थी। इस जीत के साथ उन्होंने एक बार फिर अहिवारा सीट पर भाजपा का कब्जा कराया।
कौन-कौन सी जिम्मेदारियां संभालीं?
विधानसभा में भी उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के कल्याण से जुड़ी समितियों में शामिल रहे। इन समितियों के माध्यम से उन्होंने सामाजिक वर्गों से जुड़े विषयों पर काम किया।
वर्ष 2023 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद भी उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं। उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा की अलग-अलग समितियों में जगह मिली। इनमें पुस्तकालय समिति के सभापति की जिम्मेदारी भी शामिल थी। इसके अलावा उन्होंने अन्य समितियों में भी अपनी भूमिका निभाई।
अक्टूबर 2025 में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बने
इस तरह निधन के समय वे दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे। वे अहिवारा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक थे। साथ ही अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष के पद पर भी कार्यरत थे।
राजनीतिक सफर का हुआ दुखद अंत
उनके निधन से भाजपा ने अपना एक अनुभवी नेता खो दिया है। वहीं अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के लोगों के लिए भी यह बड़ी क्षति है। उनके निधन की खबर से समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में दुख है। दुर्ग-भिलाई सहित पूरे छत्तीसगढ़ के राजनीतिक क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।
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