अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन
समझें क्या है पूरा मामला...
- अमेरिका और ईरान के बीच जंग रोकने वाले MoU पर साइन हुए हैं।
- ट्रंप और पेजेश्कियान ने बुधवार,17 जून को औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं।
- यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
- ईरान चाहता है तेल बिक्री और संपत्ति पर प्रतिबंध हटें।
- अब 60 दिन तक दोनों देशों को संयम बरतना होगा।
ट्रंप ने चिल्लाकर कहा इट्स साइन्ड
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आखिरकार उस एमओयू (MoU) पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए, जिसका इंतजार कई महीनों से था। यह समझौता दोनों देशों के बीच चल रही जंग को खत्म करने के लिए तैयार किया गया था। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों राष्ट्रपतियों ने बुधवार को इस पर साइन किए हैं। साइन होने के साथ ही यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ डिनर के दौरान इस एग्रीमेंट की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए हैं। साइन की गई कॉपी ईरान और मध्यस्थता कर रहे देशों को भेज दी गई है।
इलेक्ट्रॉनिक साइन पहले ही हो गए थे
इससे पहले रविवार, 14 जून को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने इस एमओयू पर इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन कर दिए थे। यानी डिजिटल मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, बुधवार को सिर्फ औपचारिक और हार्ड कॉपी पर साइन हुए। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस हस्ताक्षर के साथ दोनों देशों के बीच करीब चार महीने से चला आ रहा संघर्ष अब खत्म हो गया है।
जिनेवा वार्ता का क्या होगा
हालांकि एक दिलचस्प मोड़ यह है कि शुक्रवार को दोनों देशों के वार्ता दलों का जिनेवा में मिलने का कार्यक्रम अभी भी तय है। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस बैठक का मकसद समझौते पर हस्ताक्षर करना नहीं है, क्योंकि वह काम पहले ही हो चुका है।
यह बैठक होगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला अगले कुछ घंटों में लिया जाना था। इससे यह भी संकेत मिलता है कि दस्तावेज पर डिजिटल हस्ताक्षर पहले ही हो चुके थे, इसलिए स्विट्जरलैंड में आमने-सामने वाला कोई बड़ा हस्ताक्षर समारोह नहीं रखा जाएगा।
ईरान की मांग, तेल बिक्री में मिले आजादी
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपना वर्जन साफ रखा। उनका कहना है कि तेहरान को अपने तेल की बिक्री बिना किसी परिवहन या बीमा संबंधी प्रतिबंध के करने की इजाजत मिलनी चाहिए। इससे होने वाली पूरी आय पर भी ईरान की सीधी पहुंच होनी चाहिए। बघाई ने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान की फ्रीज पड़ी संपत्तियों तक पहुंच की बाधाएं हटाने की प्रतिबद्धता जताई है।
साफ शब्दों में कहें तो ईरान चाहता है कि उसके तेल को ले जाने वाले जहाजों और बीमा सेवाओं पर कोई रोक न रहे। तेल बिक्री से मिलने वाला पैसा सीधे उसके खाते में आना चाहिए, बिना किसी अड़चन के।
60 दिन तक रहना होगा संयमित
ईरान का कहना है कि अब अगले 60 दिनों तक दोनों देशों को संयम बरतना होगा। इस दौरान कोई भी ऐसा राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे समझौते के क्रियान्वयन या आपसी भरोसे पर असर पड़े। यह 60 दिन की अवधि दोनों पक्षों की सहमति से आगे भी बढ़ाई जा सकती है। इसी दौरान अंतिम समझौते की बारीकियां तय की जाएंगी।
यह सिर्फ शुरुआती ढांचा था
इससे पहले स्विट्जरलैंड के लूजर्न शहर के पास बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में शुक्रवार को होने वाले हस्ताक्षर समारोह की तैयारियों के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने एक अहम चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि यह समझौता सिर्फ एक प्रारंभिक ढांचा है और दोनों पक्ष किसी भी समय इससे पीछे हट सकते हैं।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा था कि आगे की वार्ता ही यह तय करेगी कि यह ढांचा पूर्ण और स्थायी समझौते में बदलेगा या नहीं। अब हस्ताक्षर हो जाने के बाद यह देखना बाकी है कि अगले 60 दिनों में यह समझौता कितना मजबूत रूप ले पाता है।
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि यह समझौता 14 शर्तों पर आधारित है।
समझौते की 14 अहम शर्तें
- ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और जुड़े एक्सपोर्ट पर लगी सभी पाबंदियां हटा दी जाएंगी।
- ईरान को अपने फाइनेंशियल रिसोर्सेज का पूरा एक्सेस फिर से मिल जाएगा।
- 60 दिन की बातचीत के दौरान फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इसमें 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही मिल जाएंगे।
- अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए करीब 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करेंगे।
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर चल रहा युद्ध तुरंत और हमेशा के लिए खत्म होगा।
- अमेरिका ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल न देने और उसकी संप्रभुता का सम्मान करने का वादा करेगा।
- अमेरिका की तरफ से लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटाई जाएगी।
- अमेरिकी सेनाएं ईरान के आसपास के इलाकों से वापस हटा ली जाएंगी।
- होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की व्यवस्था के तहत 30 दिनों में दोबारा खोल दिया जाएगा।
- परमाणु मुद्दों और पाबंदियों को पूरी तरह हटाने के लिए अंतिम समझौते तक पहुंचने की 60 दिन की बातचीत शुरू होगी।
- ईरान अपने NPT (परमाणु अप्रसार संधि) के तहत परमाणु हथियार न बनाने के वादे को दोहराएगा।
- अमेरिका बातचीत के दौरान इस क्षेत्र में सेना न बढ़ाने और नई पाबंदियां न लगाने पर सहमत होगा।
- एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा जो पूरे समझौते के लागू होने पर नजर रखेगा, और किसी भी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलेगी।
- ईरान का मिसाइल प्रोग्राम और रेजिस्टेंस ग्रुप्स को समर्थन इस समझौते का हिस्सा नहीं होगा।
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