अब गाड़ियां भी करेंगी बातें: सड़क हादसों को रोकने सरकार ला रही बोलने वाली कार

Amresh Kushwaha | Jul 28, 2026, 12:20 IST
v2v system
केंद्र सरकार ने नई गाड़ियों में V2V सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। यह नियम 1 अक्टूबर 2028 से लागू हो सकता है। अंधे मोड़ और चौराहों पर पहले अलर्ट मिलेगा।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • केंद्र सरकार ने नई गाड़ियों में V2V सिस्टम का ड्राफ्ट नियम जारी किया है।
  • 1 अक्टूबर 2028 से यह सिस्टम अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
  • गाड़ियां आपस में लोकेशन, स्पीड और ब्रेक की जानकारी साझा करेंगी।
  • अंधे मोड़ और चौराहों पर चालक को पहले अलर्ट मिलेगा।
  • विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा और डेटा चोरी की आशंका भी जताई है।

भारत में गाड़ियां अब आपस में बात कर सकेंगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए नया ड्राफ्ट नियम जारी किया है। इसका मकसद सड़क हादसे कम करना है।



सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक नया प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव मोटर वाहन अधिनियम, 1989 में संशोधन से जुड़ा है। इसमें नई गाड़ियों में V2V (Vehicle-to-Vehicle) सिस्टम अनिवार्य करने की बात है। यह तकनीक वाहनों को आपस में जोड़ेगी।



क्या है सरकार का प्रस्ताव

सड़क परिवहन मंत्रालय के मुताबिक एक तय तारीख से यह सिस्टम अनिवार्य होगा। यह तारीख 1 अक्टूबर 2028 रखी गई है। यानी अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है, अंतिम नियम नहीं। ड्राफ्ट पर लोगों से सुझाव मांगे गए हैं।



आम लोग और कंपनियां 23 अगस्त तक अपनी राय दे सकते हैं। इसके बाद ही सरकार इस नियम को अंतिम रूप देगी। यह प्रक्रिया आमतौर पर बड़े नियमों में अपनाई जाती है।



किन वाहनों पर होगा लागू

यह नियम तीन तरह के वाहनों पर लागू होने का प्रस्ताव है। पहली श्रेणी एल है, जिसमें दोपहिया, ई-स्कूटर और ऑटो-रिक्शा आते हैं। दूसरी श्रेणी एम है, जिसमें कार, एसयूवी, टैक्सी और यात्री बस शामिल हैं।



तीसरी श्रेणी एन है, जिसमें पिकअप, ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन आते हैं। यानी लगभग सभी तरह के वाहन इस दायरे में आएंगे। इससे सड़क सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।



एक और अहम तारीख भी सामने आई है। यह तारीख 1 अक्टूबर 2027 की है। इस तारीख से V2V सिस्टम को एक तय मानक का पालन करना होगा। इसे AIS-230 (AIS यानी Automotive Industry Standard) नाम दिया गया है।



V2V तकनीक कैसे करेगी काम

व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V एक वायरलेस संचार प्रणाली है। इसमें सड़क पर चल रहे वाहन आपस में जानकारी साझा करते हैं। इसमें लोकेशन, रफ्तार, दिशा और ब्रेक जैसी जानकारियां शामिल होती हैं।



इससे एक वाहन दूसरे वाहन की मौजूदगी पहले से भांप सकता है। भले ही वह वाहन सीधे दिखाई न दे। यही इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत है।



हर V2V वाहन लगातार एक खास मैसेज भेजता रहेगा। इसे बेसिक सेफ्टी मैसेज या BSM (BSM यानी Basic Safety Message) कहा जाता है। आसपास के वाहन इस मैसेज को रिसीव करेंगे।



इसके बाद वाहन खुद संभावित टक्कर का आकलन करेंगे। यदि खतरा दिखता है, तो चालक को तुरंत अलर्ट मिलेगा। कुछ एडवांस गाड़ियों में सिस्टम खुद इमरजेंसी ब्रेक भी लगा सकेगा।



अंधे मोड़ पर मिलेगा अलर्ट

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा अंधे मोड़ पर दिखेगा। जहां सामने से आ रहा वाहन दिखाई नहीं देता, वहां भी अलर्ट मिल जाएगा। इससे कई बड़े हादसे टल सकते हैं।



चौराहों पर भी यह तकनीक काफी काम आएगी। धुंध वाले मौसम में भी यह सिस्टम मदद करेगा। जब सामने का वाहन नजर नहीं आता, तब भी अलर्ट मिलेगा। बड़े ट्रक के पीछे छिपे वाहन का भी पहले पता चल सकेगा।



अचानक ब्रेक लगने जैसी स्थितियों में भी चालक को समय रहते जानकारी मिलेगी। इससे पीछे से होने वाली टक्कर के मामलों में कमी आ सकती है। ब्लाइंड स्पॉट से जुड़े हादसे भी घट सकते हैं।



विशेषज्ञों की राय क्या है

इस नई तकनीक को लेकर कुछ चुनौतियां भी सामने रखी गई हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक वायरलेस संचार आधारित इस सिस्टम में जोखिम भी हैं। साइबर सुरक्षा इनमें सबसे अहम मुद्दा माना जा रहा है।



विशेषज्ञों ने डेटा चोरी की आशंका भी जताई है। वाहन लगातार लोकेशन जैसी जानकारी भेजते रहेंगे। ऐसे में लोकेशन ट्रैकिंग का खतरा भी बना रहेगा।



इसी वजह से विशेषज्ञ मजबूत डेटा सुरक्षा मानकों की जरूरत बता रहे हैं। सिस्टम लागू करते समय साइबर सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। तभी यह तकनीक सुरक्षित तरीके से काम कर पाएगी।



आगे क्या होगा असर

यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो सफर ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। खासकर हाईवे और शहरों के व्यस्त चौराहों पर हादसे घटने की उम्मीद है। नई गाड़ियां खरीदने वालों को भी यह सुविधा मिलेगी। हालांकि अभी यह सिर्फ ड्राफ्ट नियम है। जनता और वाहन कंपनियों की राय के बाद ही अंतिम फैसला होगा। तब तक इस प्रस्ताव पर चर्चा जारी रहने की उम्मीद है।



आने वाले सालों में भारत की सड़कों पर यह तकनीक आम हो सकती है। इससे सड़क सुरक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का मकसद हादसों की संख्या घटाना है।



सड़क हादसों में आएगी कमी

देश में हर साल सड़क हादसों में हजारों जानें जाती हैं। ज्यादातर हादसे अचानक सामने आए वाहन या ब्रेक की देरी से होते हैं। V2V जैसी तकनीक इन कारणों पर सीधा असर डाल सकती है। बड़े शहरों के अलावा हाईवे पर भी यह तकनीक अहम साबित हो सकती है। तेज रफ्तार वाले ट्रक और बस के लिए यह खास मददगार होगी। इससे लंबी दूरी के सफर में भी सुरक्षा बढ़ सकती है।



फिलहाल वाहन बनाने वाली कंपनियां भी इस ड्राफ्ट पर अपनी राय देंगी। तकनीकी बदलाव के साथ लागत में भी कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर आने वाले समय में गाड़ियों की कीमत पर भी दिख सकता है।



यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर हर आम वाहन चालक और यात्री से जुड़ी है। सड़क हादसों में हर साल लाखों लोग घायल होते हैं और कई की जान भी जाती है। V2V जैसी तकनीक इन हादसों को कम करने में मदद कर सकती है, इसलिए यह जनहित का विषय है।



साथ ही डेटा सुरक्षा और निजता का सवाल भी जुड़ा है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। सरकार ने यह नियम ड्राफ्ट रूप में रखा है और जनता से सुझाव मांगे हैं, जो लोकतांत्रिक और पारदर्शी प्रक्रिया दिखाता है। ऐसी खबरें लोगों को नीति-निर्माण में भागीदार बनने का मौका भी देती हैं।



FAQ

  1. V2V सिस्टम गाड़ियों में कब से अनिवार्य होगा?
    सरकार के ड्राफ्ट प्रस्ताव के मुताबिक 1 अक्टूबर 2028 से बनने वाले वाहनों में V2V सिस्टम अनिवार्य किया जा सकता है। अभी यह सिर्फ प्रस्ताव है और 23 अगस्त तक इस पर सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। अंतिम नियम इसके बाद ही तय होगा।
  2. V2V तकनीक कैसे काम करती है?
    V2V वाहनों के बीच वायरलेस तरीके से लोकेशन, रफ्तार, दिशा और ब्रेक की जानकारी साझा करती है। हर वाहन बेसिक सेफ्टी मैसेज भेजता है, जिसे आसपास के वाहन रिसीव कर टक्कर का खतरा भांप लेते हैं। खतरा होने पर चालक को तुरंत अलर्ट मिल जाता है।
  3. V2V नियम किन वाहनों पर लागू होगा?
    यह नियम एल कैटेगरी यानी दोपहिया, ई-स्कूटर, ऑटो-रिक्शा पर लागू होगा। एम कैटेगरी यानी कार, एसयूवी, टैक्सी, बस पर भी लागू होगा। एन कैटेगरी यानी पिकअप, ट्रक और मालवाहक वाहनों पर भी यह नियम लागू करने का प्रस्ताव है।

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