वैष्णो देवी मंदिर के चढ़ावे में महाघोटाला, 550 करोड़ की चांदी निकली महज 30 करोड़ की, जानें पूरा मामला
Vaishno Devi Silver Scam: माता वैष्णो देवी के दरबार में हर साल करोड़ों भक्त अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं। वे अपनी श्रद्धा के मुताबिक चांदी के सिक्के और आभूषण भी चढ़ाते हैं, लेकिन हाल ही में एक खबर ने सबको हैरत में डाल दिया है। मंदिर के खजाने में जमा चांदी जब जांच के लिए भेजी गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया।
श्राइन बोर्ड जिसे बेशकीमती खजाना समझ रहा था, वह दरअसल मिलावटी कचरा निकला। स्थानीय दुकानदारों ने चांदी के नाम पर लोगों को ऐसी धातु बेची जो मिलावटी होने के साथ-साथ जहरीली भी है। यह खुलासा तब हुआ जब श्राइन बोर्ड ने चांदी गलाने का फैसला लिया। सरकारी टकसाल (Mint) की रिपोर्ट ने इस पूरे घोटाले की परतें खोल कर रख दी हैं।
550 करोड़ की चांदी निकली महज 30 करोड़ की
वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने मां वैष्णो देवी मंदिर में इकट्ठा हुई करीब 20 टन चांदी सरकारी टकसाल भेजी थी। बोर्ड को उम्मीद थी कि इसकी बाजार में कीमत करीब 550 करोड़ रुपए होगी, लेकिन जब टकसाल के अधिकारियों ने इसकी बारीकी से जांच की तो उनके होश उड़ गए। 20 टन के इस भारी-भरकम ढेर में असली चांदी बहुत कम मात्रा में थी।
जांच में सामने आया कि कुल वजन में से केवल 5% ही शुद्ध चांदी है। आसान भाषा में कहें तो, 70 किलो के लॉट में सिर्फ 3 किलो चांदी निकली। बाकी सब लोहा और कैडमियम मिलाकर बनाया गया घटिया मिश्रण था। इस वजह से 550 करोड़ का खजाना सिमटकर महज 30 करोड़ का रह गया।
जानें मिलावटी कैडमियम क्यों है खतरनाक
नकली चांदी बनाने में कैडमियम नाम की जहरीली धातु का इस्तेमाल हुआ था। कैडमियम दिखने में बिल्कुल चांदी जैसी चमक देती है, इसलिए पहचानना मुश्किल होता है। सरकारी मिंट (टकसाल) के कर्मचारियों ने पहले इसे गलाने से साफ मना कर दिया था।
सरकारी टकसाल वह आधिकारिक कारखाना या संस्थान है जहां सरकार की देखरेख में सिक्के ढाले जाते हैं। इसे गर्म करने पर निकलने वाला धुआं इंसानी फेफड़ों के लिए कैंसरकारी होता है। धुएं से किडनी खराब होने और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण का खतरा बना रहता है।
कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सरकारी मिंट (टकसाल) को 25 लाख के विशेष सेंसर खरीदने पड़े। इन आधुनिक उपकरणों की मदद से जहरीली गैस को नियंत्रित किया जा सका। तभी जाकर इस मिलावटी चांदी को गलाने का काम शुरू हो पाया।
कहां से आ रही है यह नकली चांदी
हैरानी की बात यह है कि ऐसा मामला अन्य मंदिरों में नहीं देखा गया। तिरुपति और सिद्धिविनायक जैसे मंदिरों के चढ़ावे में ऐसी मिलावट नहीं मिली है। इससे यह शक गहरा गया है कि यह खेल स्थानीय स्तर पर चल रहा है। आशंका है कि कटरा और मंदिर मार्ग के दुकानदार ही यह जालसाजी कर रहे हैं।
दुकानदार भक्तों को चांदी के नाम पर यह जहर बेच रहे हैं। भक्तों को लगता है कि वे माता को शुद्ध भेंट चढ़ा रहे हैं, लेकिन असल में वे धोखाधड़ी का शिकार होकर मंदिर को कचरा दे रहे हैं। प्रशासन को इस कालाबाजारी पर लगाम लगाने की सख्त जरूरत महसूस हो रही है।
प्रामाणिक दुकानों से ही करें खरीदारी: श्राइन बोर्ड
सरकारी टकसाल ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कई कदम उठाए हैं। पिछले एक साल में उपराज्यपाल और श्राइन बोर्ड(Mata vaishno devi mandir) को कई चिट्ठियां लिखी गईं। अधिकारियों को बार-बार चेताया गया कि कटरा के बाजारों में मिलावट हो रही है। अभी तक इस जहरीले सामान की बिक्री पर कोई बड़ी कार्यवाही नहीं हुई।
भक्तों की आस्था और सेहत दोनों के साथ यह बहुत बड़ा खिलवाड़ है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो यह घोटाला और बढ़ेगा। श्राइन बोर्ड को अब अपनी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने की सख्त जरूरत है। भक्तों को भी सलाह दी गई है कि वे प्रामाणिक दुकानों से ही खरीदारी करें।
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