वंदे मातरम को लेकर बड़ा अपडेट! 5 महीने में दूसरी बार सरकार ने राज्यों को याद दिलाया प्रोटोकॉल

Sandeep Kumar | Jul 10, 2026, 23:59 IST
वंदे मातरम को लेकर बड़ा अपडेट
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर नया निर्देश जारी किया है। किसी भी कार्यक्रम में पहले वंदे मातरम और फिर जन-गण-मन गाया जाएगा। यह आदेश सभी राज्यों और मंत्रालयों को भेजा गया।

समझें क्या है पूरा मामला

केंद्र सरकार ने नया निर्देश जारी किया है।


कार्यक्रमों में पहले वंदे मातरम गाया जाएगा।


इसके बाद जन-गण-मन का गायन होगा।


आदेश सभी राज्यों और मंत्रालयों को भेजा गया है।


सिनेमाघरों को इन नियमों से बाहर रखा गया है।



पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम

केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है, यह नियमों में पहले से तय है।


मंत्रालय ने साफ किया कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे मातरम और फिर जन-गण-मन गाया जाएगा। जिन राज्यों में अपना राज्य गीत भी होता है, वहां भी इसी क्रम का पालन करना होगा। यह पत्र 9 जुलाई को भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई।



जनवरी में भी आया था ऐसा आदेश

इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसके तहत सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा। वंदे मातरम के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना अनिवार्य होगा।



राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि 3.10 मिनट है। इससे पहले सिर्फ पहले दो अंतरे ही गाए जाते थे। सिनेमा हॉल को इन नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना अनिवार्य नहीं होगा। अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के तौर पर राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो उस दौरान दर्शकों का खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।



बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था वंदे मातरम

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के दिन लिखा था। यह पहली बार 1882 में उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा।



1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच से वंदे मातरम गाया था। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें उस समय नम हो गई थीं।



वंदे मातरम मूल रूप से एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका अर्थ है मां को नमन। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ रहे सेनानियों का नारा बन गया था।



गणतंत्र दिवस परेड में भी दिखा वंदे मातरम

इस साल दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हुई 77वीं गणतंत्र दिवस परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इस मौके पर वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड भी मिला था।



संसद में भी हो चुका है विवाद

वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर खास चर्चा हुई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार बंगाल चुनाव को ध्यान में रखते हुए इसे मुद्दा बना रही है।



भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम के कुछ हिस्से हटाने का आरोप लगाया। इसके समर्थन में 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी का हवाला दिया गया।



भाजपा का दावा था कि उस चिट्ठी में नेहरू ने गीत की कुछ पंक्तियों पर मुस्लिम समुदाय की आपत्ति का जिक्र किया था। बहस के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान और तिरंगे के बराबर दर्जा देने की मांग रखी।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम लीग के दबाव में गीत के हिस्से हटाने का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने अपनी करीब एक घंटे की स्पीच में वंदे मातरम शब्द का 121 बार जिक्र किया था।



FAQ

  1. सरकार का नया आदेश क्या कहता है?
    सरकार ने कहा है कि किसी भी कार्यक्रम में पहले वंदे मातरम और फिर जन-गण-मन गाया जाएगा। यह आदेश सभी राज्यों और मंत्रालयों को भेजा गया। जिन राज्यों का अपना राज्य गीत है, वहां भी यही क्रम लागू होगा।
  2. वंदे मातरम किसने और कब लिखा था?
    वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था। यह पहली बार 1882 में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सार्वजनिक मंच पर गाया था।

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