वंदे मातरम गरिमा विवाद: इंदौर हाईकोर्ट ने पार्षद रुबीना खान और फौजिया शेख को नोटिस किया जारी
Jitendra Shrivastava | Apr 16, 2026, 22:52 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. मप्र हाईकोर्ट इंदौर बेंच ने वंदे मातरम गरिमा विवाद में पार्षद रुबीना खान और फौजिया शेख को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। शासन से इस मामले में जवाब मांगा है।
News In Short
- इंदौर हाईकोर्ट ने पार्षदों को नोटिस जारी किया।
- वंदे मातरम गरिमा पर PIL दाखिल हुई।
- अनुच्छेद 51A(a) का हवाला दिया गया।
- प्रमुख सचिव व गृह सचिव से मांगा जवाब।
- राष्ट्रीय गीत के लिए नियामक ढांचे की मांग।
News In Detail
PIL दाखिल: क्या है पूरा मामला?
इंदौर नगर निगम में हुए एक विवाद के बाद यह PIL सामने आई। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता योगेश हेमनानी ने स्वयं न्यायालय में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर अनुशासन की जरूरत है। राष्ट्रीय गीत के गायन के दौरान मर्यादा टूटना चिंताजनक है। यह मामला पूरे प्रदेश का ध्यान खींचने में सफल रहा।
हाईकोर्ट का सख्त रुख और नोटिस
इसके साथ ही फौजिया शेख अलीम को भी नोटिस भेजा गया। दोनों से न्यायालय ने विस्तृत जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई इंदौर नगर निगम की घटना के बाद की गई। न्यायालय का यह कदम संवैधानिक जिम्मेदारी (Constitutional Responsibility) की याद दिलाता है।
नियामक ढांचे की मांग क्यों जरूरी?
अधिवक्ता हेमनानी ने न्यायालय से संविधान के अनुरूप दिशा-निर्देश माँगे हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति का आचरण आदर्श होना चाहिए। ऐसे में स्पष्ट कानूनी दिशा-निर्देश (Legal Guidelines) जरूरी हो जाते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 51A(a) का उल्लेख
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम भी इसी दायरे में आता है। सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों की यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उनका आचरण समाज के लिए एक आदर्श (Ideal Conduct) प्रस्तुत करता है।
शासन से भी मांगा गया जवाब
यह दर्शाता है कि न्यायालय मामले को बेहद संजीदगी से ले रहा है। शासन की जवाबदेही (Government Accountability) इस पूरे प्रकरण में केंद्रीय विषय है। न्यायालय का यह कदम एक नई मिसाल कायम कर सकता है।
भविष्य के लिए क्या है संदेश?
राष्ट्रीय गीत की गरिमा (National Anthem Dignity) की रक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यह याचिका उस जिम्मेदारी की कानूनी पुष्टि की मांग करती है।
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