अब आम आदमी की पहुंच में होगा सेलिब्रिटीज वाला वेट लॉस सीक्रेट
समझें क्या है पूरा मामला
- सेमाग्लूटाइड का आविष्कार करने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क (Novo Nordisk) का पेटेंट समाप्त हो गया है।
- पेटेंट खत्म होने के बाद से 40 से ज्यादा कंपनियों ने इसके जेनेरिक वर्जन लॉन्च किए हैं या करने वाले हैं।
- बाजार में आ रही इन नई दवाइयों की कीमत ₹2,000 से शुरू हो रही है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के 13 करोड़ 6 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और 23 प्रतिशत लोग ओवरवेट हैं।
एलोन मस्क से लेकर हॉलीवुड स्टार्स तक, जिस 'मैजिक ड्रग' ने वजन घटाने की दुनिया में क्रांति ला दी थी। वह अब भारत में बेहद किफायती दाम पर मिलने वाली है। ओजम्पिक और वेगोवी जैसे ब्रांड्स की जिस दवा के लिए लोग मोटी रकम खर्च करते थे, उसका जेनेरिक वर्जन अब मात्र ₹2,000 से शुरू हो रहा है। लेकिन क्या सस्ता होने का मतलब गुणवत्ता से समझौता है? सेमाग्लूटाइड के इस बदलते बाजार और इसके फायदों-नुकसानों पर देखिए हमारी यह विशेष रिपोर्ट।
क्या है सेमाग्लूटाइड?
सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) वेट लॉस दवाइयों का मुख्य कंपाउंड है जो GLP-1 नाम के नेचुरल हार्मोन की तरह काम करता है। GLP‑1 (ग्लूकागन लाइक पेप्टाइड‑1) वह हार्मोन है जो खाना खाने के बाद बनता है। यह (वेट लॉस इंजेक्शन)भूख कम करती है और इंसुलिन बढ़ाती है। इसे ज्यादातर लाइफस्टाइल डिजीज जैसे टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के लिए डॉक्टरों द्वारा दिया जाता है। इसका इस्तेमाल लंबे समय तक ब्लड शुगर कंट्रोल और वेट लॉस के लिए किया जाता है।
भारत में सेमाग्लूटाइड का बाजार साल 2022 के ₹11 करोड़ से बढ़कर अब लगभग ₹474 करोड़ तक पहुंच गया है।
बाजार में बढ़ रहे सस्ते वर्जन्स
हाल ही में सेमाग्लूटाइड का आविष्कार करने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क का पेटेंट समाप्त हो गया। पेटेंट समाप्त होने पर आविष्कार सार्वजनिक डोमेन (Public Domain) में आ जाता है, जिससे कोई भी व्यक्ति या कंपनी बिना अनुमति या रॉयल्टी दिए उस तकनीक का उपयोग, उत्पादन या बिक्री कर सकती है। खास बात यह है कि सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त होने के कुछ ही हफ्तों में बाजार में उसी फॉर्मूला वाली दवाइयां उपलब्ध हो गईं। जहां सेमाग्लूटाइड का ओरिजिनल वर्जन ₹15,000 से ज्यादा में मिलता था, वहीं बाजार में आ रही इन नई दवाइयों की कीमत ₹2,000 से शुरू हो रही है।
क्यों बढ़ रही सेमाग्लूटाइड की डिमांड?
भारत में इन दवाइयों की जरूरत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश के 13 करोड़ 6 लाख लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। देश की 24 प्रतिशत महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट हैं। हर साल 28 प्रतिशत मौतें दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं। शहरों में मोटापे और उससे होने वाली दिक्कतों को लेकर सजगता बढ़ रही है। लेकिन देश के टियर 2 और 3 शहरों या ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी मोटापा, डायबिटीज और उसके इलाज के लिए लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। कई लोग एक या दो साल के इलाज के बाद ठीक होने पर ट्रीटमेंट बंद कर देते हैं। 50 प्रतिशत से भी कम लोग लॉन्ग टर्म ट्रीटमेंट लेते हैं।
एक्सपर्ट्स जता रहे संदेह
सेमाग्लूटाइड को एक विशेष वातावरण में पूरी ध्यान से बनाया जाता है। इसके लिए टेम्परेचर कंट्रोल से लेकर क्वालिटी कंट्रोल हर चीज का ध्यान रखना जरूरी होता है। सेमाग्लूटाइड इतना डेलिकेट होता है कि उसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रखा जाता है। इसलिए इसकी एक शीशी ₹15,000 से ज्यादा की होती है। बाजार में उपलब्ध इसके जेनेरिक वर्जन्स की डिमांड बढ़ रही है, ऐसे में उनके क्वालिटी कंट्रोल और स्टोरेज को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा डॉक्टरों को इन दवाइयों को रिकमेंड करने से पहले सही ट्रेनिंग देने की जरूरत है।
सेमाग्लूटाइड के उपयोग से पहले इन चीजों का जरूर ध्यान रखें:
1. इनको लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। सोशल मीडिया पर रिव्यू देखकर कोई भी वेट लॉस दवा न लें।
2. सेमाग्लूटाइड लेने के बाद उल्टी, जी मचलना और चक्कर जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं।
3. गंभीर केस में यह पैनक्रियास में सूजन का कारण भी बन सकता है।
4. वेट मैनेजमेंट के लिए सिर्फ दवाई के भरोसे ना बैठें। इसके साथ लाइफस्टाइल चेंज, डाइट कंट्रोल और एक्सरसाइज भी जरूरी हैं।
5. अगर डायबिटीज या वेट मैनेजमेंट के लिए यह दवाई लेते हैं तो डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन बंद न करें।
क्या सेमाग्लूटाइड एक जादूई दवा है?
दुनिया के सबसे अमीर बिजनसमैन एलन मस्क के ओजेंपिक यूज के दावे के बाद से इसे मोटापे के खिलाफ जीवनरक्षक की तरह समझा जाने लगा था। हालांकि नोवो नॉर्डिक्स इंडिया के एमडी विक्रांत श्रोत्रीय इसे सिर्फ एक लाइफ गार्ड मानते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "ये कोई मैजिक पिल नहीं है कि मैं जाकर पार्टी करूं और फिर जाकर इंजेक्शन ले लूं। ये कुछ ऐसी है कि अगर डाइट और एक्सरसाइज से भी वजन कम नहीं हो रहा है तो ये रेस्क्यू करती है, यानी ये आपके लिए लाइफगार्ड की तरह काम करती है। ये सिर्फ एक दवाई है।" वह आगे कहते हैं, "ये दवाई दिमाग को बताती है कि आप अब मत खाओ। ये सेंस ऑफ फुलनेस को बढ़ावा देती है। ये आपको वेट कम करने में मदद करती है। इसलिए इसे मिसयूज नहीं करना चाहिए।"
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर हमें देश में बढ़ते वेट लॉस बाजार के प्रति सजग कराती है। भारत में मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियां दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। ऐसे में ₹15,000 में मिलने वाली एक दवाई ₹2,000 में बाजार में उपलब्ध होने लगे, तो इसका सेवन बढ़ना निश्चित है। भारत के बढ़ते वेट लॉस बाजार में हर बड़ी कंपनी दांव लगा रही है। लेकिन क्या ₹2,000 की दवाई में वह गुणवत्ता हासिल होगी जो ₹15,000 की दवाई में थी? इन दवाइयों के क्वालिटी कंट्रोल और प्रामाणिकता पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही सभी लोगों को इन दवाइयों के सही इस्तेमाल के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
FAQ
- सेमाग्लूटाइड क्या है और कैसे काम करती है?
सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) वेट लॉस दवाइयों का मुख्य कंपाउंड है जो GLP-1 नाम के नेचुरल हार्मोन की तरह काम करता है। GLP‑1 (ग्लूकागन लाइक पेप्टाइड‑1) वह हार्मोन है जो खाना खाने के बाद बनता है। यह भूख कम करती है और इंसुलिन बढ़ाती है। इसे ज्यादातर लाइफस्टाइल डिजीज जैसे टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे के लिए डॉक्टरों द्वारा दिया जाता है। - क्या है सेमाग्लूटाइड की कीमत कम होने के पीछे मुख्य वजह?
हाल ही में सेमाग्लूटाइड का आविष्कार करने वाली कंपनी नोवो नॉर्डिस्क का पेटेंट समाप्त हो गया। पेटेंट समाप्त होने पर आविष्कार सार्वजनिक डोमेन में आ गया जिससे देश भर की फार्मा कंपनियां सेमाग्लूटाइड दवाइयां लॉन्च करने लगीं। पेटेंट खत्म होने के बाद से 40 से ज्यादा कंपनियों ने इसके जेनेरिक वर्जन लॉन्च किए हैं या करने वाली हैं। इनमें सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब, जाइडस लाइफसाइंस और टोरेंट जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन दवाइयों के कमर्शियल हो जाने से सेमाग्लूटाइड के रेट में गिरावट हुई है। - क्या सेमाग्लूटाइड के साइड इफेक्ट्स हैं?
सेमाग्लूटाइड लेने के बाद उल्टी, जी मचलना और चक्कर जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। गंभीर केस में यह पैनक्रियास में सूजन का कारण भी बन सकता है। अगर इस दवाई का सेवन डॉक्टर से बिना पूछे बंद किया जाए तो वजन और शुगर लेवल पहले जैसे होने के चांसेस होते हैं।
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