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आज के दौर में हम सब डिजिटल दुनिया से जुड़े हुए हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह जुड़ाव हमें अंदर से खोखला कर रहा है? हाल ही में आई Global Mind Health 2025 की ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस रिपोर्ट को अमेरिका के Sapien Labs ने तैयार किया है।
इस स्टडी के मुताबिक भारतीय युवा मानसिक रूप से काफी संघर्ष कर रहे हैं। यह सर्वे 84 देशों में हुआ, जिसमें भारत के 78 हजार से ज्यादा इंटरनेट यूजर्स का सर्वे भी शामिल है। इस सर्वे में 18 से 34 साल के युवाओं का स्कोर बहुत कम आया है। रिजल्ट बताते हैं कि भारतीय युवा मेंटल हेल्थ में बहुत पीछे हैं।
84 देशों की लिस्ट में भारत 60वें नंबर पर खड़ा है। युवाओं का माइंड हेल्थ कोशिएंट (MHQ) स्कोर सिर्फ 33 ही रहा। इसके उलट, 55 साल से ऊपर के लोगों का स्कोर 96 रहा। ये आंकड़ा हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी जैसा है।
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क्यों तनाव में हैं भारत के यंग एडल्ट्स
Global Mind Health 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट केवल एक अस्थायी समस्या नहीं है। इसके पीछे कई स्ट्रक्चरल कारण बताए गए हैं।
- पहला कारण पर्यावरण में बढ़ता हुआ प्रदूषण और टॉक्सिन्स हैं।
- दूसरा बड़ा कारण फिजिकल एक्टिविटी या शारीरिक मेहनत की कमी है।
- युवा अब मैदानों के बजाय स्क्रीन पर ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।
- इस वजह से उनकी भावनाओं को कंट्रोल करने की क्षमता घटी है।
- वे छोटी-छोटी बातों पर बहुत जल्दी तनाव में आ जाते हैं।
- उनके लिए रिश्तों को लंबे समय तक निभाना मुश्किल हो रहा है।
- एकाग्रता यानी फोकस की कमी भी एक बड़ी समस्या बन गई है।
यंग एडल्ट्स के चार मेन विलन
स्टडी ने युवाओं की इस हालत के चार मेन रीजन बताए।
पहला कारण स्मार्टफोन का बहुत जल्दी हाथ में आ जाना है। भारत में स्मार्टफोन मिलने की एवरेज एज 16.5 साल है। जल्दी फोन मिलने से मेंटल हेल्थ रिस्क काफी बढ़ जाता है।
दूसरा कारण अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (Ultra-Processed Food) का बढ़ता हुआ सेवन है। 44% युवा नियमित रूप से जंक और पैकेट बंद खाना खाते हैं।
तीसरा कारण परिवार से घटता हुआ जुड़ाव और बॉन्डिंग है। केवल 64% युवा ही अपने परिवार के करीब महसूस करते हैं।
चौथा कारण स्पिरिचुअलिटी से बढ़ती दूरी को भी माना गया है।
हैरानी की बात ये है कि घर के बड़े ज्यादा खुश हैं। 55 साल से ऊपर के लोगों (Baby Boomers 1946–1964) का स्कोर 96 रहा है। वहीं युवाओं का माइंड हेल्थ क्वोशिएंट (MHQ) सिर्फ 33 ही है। ये अंतर दिखाता है कि नई पीढ़ी मानसिक रूप से कमजोर हुई है। बुजुर्गों की मानसिक क्षमता युवाओं के मुकाबले बहुत ज्यादा बेहतर पाई गई है।
सरकार का सोशल मीडिया पर कड़ा प्रहार
इसी बीच, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) अब केवल जरिया नहीं हैं, वे अब एक पब्लिशर (Publisher) की तरह काम कर रहे हैं। इसलिए उन्हें अपने कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी ही होगी।
अश्विनी वैष्णव ने कंटेंट क्रिएटर्स को फेयर कंपनसेशन देने की मांग की। सोशल मीडिया कंपनियां सारा मुनाफा खुद नहीं रख सकतीं। उन्हें पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटर्स के साथ कमाई बांटनी होगी। उन्होंने डीपफेक और फर्जी खबरों को समाज के लिए खतरनाक बताया।
कंटेंट क्रिएटर्स को मिलना चाहिए सही मुआवजा
IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने क्रिएटर्स के हक में भी आवाज उठाई है। उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपनी कमाई का उचित हिस्सा कन्टेंट क्रिएटर्स (mental health) के साथ शेयर करना होगा। पत्रकार, प्रोफेसर और कलाकार कड़ी मेहनत से कंटेंट बनाते हैं।
इस पर कंपनियां भारी मुनाफा कमाती हैं। ये मुनाफा अब क्रिएटर्स के साथ ईमानदारी से शेयर होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इंटेलेक्चुअल डेवलपमेंट पूरी तरह रुक जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ऑनलाइन गेमिंग के खतरनाक एल्गोरिदम और साइबर फ्रॉड पर लगाम कसेगी। अब कंपनियों को अवैध कंटेंट और नशे जैसी लत लगाने वाले गेम्स के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सबसे जरूरी है। प्लेटफॉर्म्स को अपनी जिम्मेदारी से अब पीछे नहीं हटना चाहिए। अगर आईपी (Intellectual Property) का सम्मान नहीं हुआ, तो प्रोग्रेस पर रोक लगाया जाएगा।
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