भारतीय छात्रों में क्यों कम हो रहा अमेरिका का क्रेज, यूरोपीय देशों की तरफ बढ़े छात्र

Kaushiki | Jun 27, 2026, 12:10 IST
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अमेरिका में वीजा मिलने में देरी और नौकरी की मुश्किलों के कारण 30 हजार भारतीय छात्रों ने पढ़ाई के बीच ही देश छोड़ दिया है। अब भारतीय स्टूडेंट्स की पहली पसंद जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देश बन रहे हैं जहां पढ़ाई सस्ती है।

Indian Students Leaving US: इंडियन स्टूडेंट्स के बीच अब अमेरिकन ड्रीम का क्रेज धीरे-धीरे कम होने लगा है। कल तक जो युवा पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना चाहते थे, वे अब दूसरा रास्ता चुन रहे हैं। हाल ही में आए US Study Data ने सबको हैरान कर दिया है।



आंकड़े बताते हैं कि भारतीय छात्र अब बीच में ही अमेरिका छोड़ रहे हैं। पिछले एक साल में लगभग 30 हजार भारतीय छात्रों ने अमेरिका से अपना नाता तोड़ लिया है। उन्होंने वहां अपनी पढ़ाई को बीच में ही रोक दिया।



इन छात्रों ने अब यूरोपीय देशों की बड़ी यूनिवर्सिटीज का रुख कर लिया है। वे वहां नए सिरे से अपना करियर बनाने की कोशिश में जुट गए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में छात्रों ने बीच में पढ़ाई छोड़ी है। एक्सपर्ट्स इसे भारतीय छात्रों का एक बड़ा पलायन मान रहे हैं।



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वीजा और जॉब की बढ़ती मुश्किलें

अमेरिका छोड़ने की सबसे बड़ी वजह वहां का वीजा सिस्टम और नौकरी की कमी है। पढ़ाई पूरी करने के बाद वहां रुकना मुश्किल हो गया है। पहले पढ़ाई के बाद दो साल तक काम करने की आसान छूट मिलती थी। लेकिन अब इस नियम का फायदा उठाने में काफी अड़चनें आ रही हैं।



नियमों की सख्ती के कारण छात्रों को मनपसंद जॉब ढूंढने में बहुत परेशानी हो रही है। इस वजह से छात्रों का लाखों रुपया दांव पर लगा है। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के बाद वीसा नियम और कड़े हुए हैं।



अब नए छात्रों को वीसा मिलने में महीनों का समय लग रहा है। वीसा इंटरव्यू के लिए छात्रों को 10 से 11 महीने तक का इंतजार करना पड़ता है। इतने लंबे समय तक छात्र सिर्फ तारीख का इंतजार करते हैं।



भारत में मौजूद US एम्बेसी में इंटरव्यू की डेट आसानी से नहीं मिल रही है। काउंसलर ऑफिस के चक्कर काटकर छात्र पूरी तरह परेशान हो चुके हैं।



जर्मनी और फ्रांस बने पहली पसंद

अमेरिका की इस सख्ती का सीधा फायदा अब यूरोपीय देशों को मिल रहा है। भारतीय छात्रों के लिए अब जर्मनी और फ्रांस पहली पसंद बन चुके हैं।



यूरोप के ये देश भारतीय युवाओं का खुलकर स्वागत कर रहे हैं। यहां की नीतियां और नियम विदेशी छात्रों के लिए बहुत आसान बनाए गए हैं। जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे देशों में वीजा की प्रक्रिया बहुत तेज है।



छात्रों को वहां वीजा के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता है। सबसे बड़ी बात यह है कि ये देश पढ़ाई के बाद नौकरी की गारंटी देते हैं। इससे छात्रों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है।



यूरोप के इन देशों में पढ़ाई खत्म होने के बाद वर्क परमिट आसानी से मिलता है। वहां दो साल तक काम करने की कानूनी मंजूरी दी जाती है। इस मंजूरी के कारण छात्र अपनी पढ़ाई का खर्च और लोन आसानी से चुका पाते हैं। यही वजह है कि छात्र अमेरिका की जगह यूरोप चुन रहे हैं।



कम फीस और फ्री एजुकेशन का फायदा

यूरोपीय देशों की तरफ आकर्षित होने का एक और बड़ा कारण वहां की पढ़ाई का खर्च है। अमेरिका के मुकाबले यूरोप में पढ़ाई बहुत सस्ती है।



जर्मनी और फ्रांस की कई सरकारी यूनिवर्सिटीज में तो फीस बिल्कुल माफ है। वहां विदेशी छात्रों से ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है। बिना फीस के अच्छी शिक्षा मिलना किसी भी छात्र के लिए एक बड़ा सपना होता है।



इससे रहने और खाने का खर्च भी काफी कम हो जाता है। अमेरिका की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई का खर्च करोड़ों रुपए तक पहुंच जाता है।



इसके लिए भारतीय परिवारों (H-1B वीजा) को बड़ा बैंक लोन लेना पड़ता है। लोन के दबाव और नौकरी की अनिश्चितता के कारण छात्र अब अमेरिका से दूरी बना रहे हैं। वे सस्ते और सुरक्षित विकल्प की तलाश में हैं।



यूएस स्टडी डेटा क्या कहता है

यूएस स्टडी डेटा (Study Abroad)के मुताबिक जून 2026 में अमेरिका में 3 लाख 52 हजार भारतीय छात्र थे। जबकि पिछले साल यह संख्या 3 लाख 82 हजार थी।



साफ है कि भारतीय छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई एक साल में ही संख्या में भारी गिरावट आई है। अमेरिकी एजुकेशन काउंसलर्स भी इस बदलाव से काफी चिंतित नजर आ रहे हैं।



एजुकेशन काउंसलर्स ने आशंका जताई है कि आने वाले समय में ये संकट और बढ़ेगा। अगले एक साल में 70 हजार और छात्र अमेरिका छोड़ सकते हैं। अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो अमेरिका अपना सबसे बड़ा स्टूडेंट बेस खो देगा। भारतीय छात्रों के बिना वहां की



यूनिवर्सिटीज (US वीजा नियम) को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा। अब भारतीय युवा केवल ब्रांड नेम के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वे अपने सुरक्षित भविष्य, कम खर्च और नौकरी की गारंटी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।



सोर्स क्रेडिट:

  • अमेरिकी शिक्षा काउंसलर्स रिपोर्ट और यूएस स्टडी डेटा जून 2026 (US Study Data)
  • न्यूयॉर्क मीडिया पब्लिकेशन इंटरनेशनल स्टूडेंट माइग्रेशन रिपोर्ट (New York Media Report)

FAQ

  1. भारतीय छात्र अमेरिका छोड़कर जर्मनी और फ्रांस क्यों जा रहे हैं?
    भारतीय छात्र अमेरिका छोड़कर जर्मनी और फ्रांस इसलिए जा रहे हैं क्योंकि वहां पढ़ाई का खर्च बहुत कम है। कई सरकारी यूनिवर्सिटीज में फीस पूरी तरह माफ है। साथ ही वहां पढ़ाई के बाद वीजा और नौकरी मिलने की पक्की गारंटी मिलती है।
  2. अमेरिका में भारतीय छात्रों को वीसा मिलने में कितना समय लग रहा है?
    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राज में वीजा नियम कड़े हो गए हैं। भारत में अमेरिकी दूतावास में इंटरव्यू की डेट मिलने में दिक्कत आ रही है। इसके कारण छात्रों को वीसा इंटरव्यू के लिए 10 से 11 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
  3. पिछले एक साल में कितने भारतीय छात्रों ने अमेरिका छोड़ा है?
    यूएस स्टडी डेटा के मुताबिक पिछले एक साल के दौरान लगभग 30 हजार भारतीय छात्रों ने अमेरिका में अपने कोर्स को बीच में ही छोड़ दिया। इसके बाद इन सभी छात्रों ने यूरोप की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दाखिला ले लिया है।

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