आज मनाई जाएगी शीतला अष्टमी, जानें इस दिन चूल्हा जलाना क्यों है वर्जित?

Kaushiki | Mar 08, 2026, 13:03 IST
Basoda 2026
बसोड़ा या शीतला अष्टमी आज 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन माता शीतला को बासी भोजन का भोग लगता है। जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और वैज्ञानिक महत्व।

Sheetala Ashtami 2026: भारतीय संस्कृति में त्योहारों का गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व होता है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देशभर में शीतला अष्टमी मनाया जाता है। इसे आम बोलचाल में बसोड़ा भी कहा जाता है। साल 2026 में ये पर्व आज 11 मार्च को मनाया जाएगा।



यह दिन आरोग्य की देवी माता शीतला को समर्पित है। मां शीतला हमें बीमारियों से बचाकर शीतलता प्रदान करती हैं। इस त्योहार की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलता। मां को एक दिन पहले बने बासी भोजन का भोग लगाया जाता है।



शीतला अष्टमी 2026 की सही तारीख

चूल्हा न जलाने की परंपरा

मान्यता के मुताबिक, बसोड़ा के दिन घर का चूल्हा जलाना पूरी तरह वर्जित होता है। भक्त एक दिन पहले ही सारा भोजन तैयार कर लेते हैं। सप्तमी की रात को मीठे चावल, पूड़ी और हलवा बनता है।



अष्टमी के दिन माता को इसी बासी भोजन का भोग लगता है। मां शीतला को ठंडा भोजन अत्यंत प्रिय माना जाता है। चूल्हा जलाने से माता शीतला रुष्ट हो सकती हैं। पूरा परिवार प्रसाद के रूप में ठंडा भोजन ही ग्रहण करता है।



शीतला अष्टमी का वैज्ञानिक कारण

बसोड़ा का पर्व मौसम बदलने के समय पर आता है। इस समय सर्दी खत्म होती है और गर्मी शुरू होती है। मौसम के इस बदलाव में संक्रामक बीमारियां बढ़ने लगती हैं।



चेचक और खसरा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में ठंडा और संतुलित भोजन स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। गर्मी के दस्तक देते ही पाचन शक्ति भी थोड़ी कम होती है। इसलिए ठंडा भोजन शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करता है।



शीतला अष्टमी की पूजा विधि

  • पूजा के लिए एक दिन पहले शुद्ध भोजन बना लें।
  • अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें।
  • पूजा की थाली में हल्दी, रोली और अक्षत रखें।
  • मां शीतला की प्रतिमा को जल और भोग अर्पित करें।
  • पूजा के बाद बचा हुआ जल घर में छिड़क दें।
  • इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और खुशहाली आती है।
  • परिवार के सभी सदस्य माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



ये खबरें भी पढ़ें...



बाबा महाकाल ने भक्तों संग खेली होली, हुआ भव्य श्रृंगार, कल से बदलेगा पूजा का समय



इस बार 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा हिंदू नववर्ष 2026, जानें क्यों जुड़ रहा कैलेंडर में एक्स्ट्रा महीना



जानें हिंदू कैलेंडर के अंतिम महीने फाल्गुन माह का महत्व, भूल के भी न करें ये काम



घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कपूर आरती के साथ शामिल करें ये चीज, नेगेटिव एनर्जी रहेगी दूर



Tags:
  • भारतीय संस्कृति
  • पूजा विधि
  • चैत्र माह
  • शीतला अष्टमी
  • पंचांग