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Adhik Maas 2026: साल 2026 का हिंदू नववर्ष बेहद अनोखा होने वाला है। इस साल कैलेंडर में 12 नहीं, बल्कि 13 महीने होंगे। पंचांग के मुताबिक, इस बार ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा।
17 मई से ज्येष्ठ अधिक मास शुरू हो जाएगा जो 15 जून तक रहेगा। दरअसल खगोलीय गणना के कारण यह अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। ऐसा सौर और चंद्र वर्ष को मिलाने के लिए किया जाता है।
हर तीन साल में यह अद्भुत संयोग बनता है और इसे भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं। यह समय भक्ति और साधना के लिए उत्तम है। इस महीने दान-पुण्य करने से बहुत लाभ मिलता है।
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कैसे होती है अधिक मास की गणना
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का माना जाता है। वहीं सौर वर्ष में करीब 365 दिन होते हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो शास्त्रों के मुताबिक, चंद्र वर्ष चंद्रमा की गति (354 दिन) पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष सूर्य की परिक्रमा (365 दिन) पर।
इस तरह दोनों के बीच हर साल 11 दिन का अंतर आता है। तीन साल में यह अंतर 33 दिनों का हो जाता है। इस तरह एक अतिरिक्त महीना मिल जाता है, जो अधिक मास कहलाता है। आपको अंग्रेजी वर्ष को लीप ईयर तो याद ही होगा, जहां हर चौथे साल की फरवरी 29 दिन की होती है।
इसी तरह अधिकमास को ज्योतिष विज्ञान में बहुत सटीक गणना माना गया है। इससे ऋतुओं और त्योहारों का तालमेल बना रहता है। हिंदू नववर्ष 2026 में भी इसी कारण ज्येष्ठ महीना दोबारा आएगा।
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पुरुषोत्तम मास और भगवान विष्णु की कथा
इसी अधिक मास (Hindu New Year) को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित रहता है। पौराणिक कथा के मुताबिक इसका संबंध हिरण्य कश्यप से है। हिरण्य कश्यप को अमर होने का अहंकार हो गया था। उसे ब्रह्मा जी से बहुत कठिन वरदान मिला था।
वह साल के 12 महीनों में कभी नहीं मर सकता था। तब विष्णु जी ने इस अतिरिक्त महीने का निर्माण किया। उन्होंने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्य कश्यप का अंत किया था। विद्वानों के मुताबिक, यह समय आत्मिक शुद्धि का है। पौराणिक कथाएं
इस दौरान अधिक मास महात्म्य का पाठ करना चाहिए। लोग इस महीने में जप, तप और हवन करते हैं। यह समय सांसारिक मोह से दूर रहने का है।
भगवान विष्णु की पूजा से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भक्त इस समय गीता और धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं। साधना के लिए यह महीना बहुत ही श्रेष्ठ है। आध्यात्मिक उन्नति के लिए यह वरदान माना जाता है।
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अधिक मास में क्या करें
भगवान विष्णु की विशेष पूजा करें:
इस पूरे महीने 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपें। विष्णु जी की भक्ति से सुख-शांति मिलती है।
दान और सेवा कार्य करें:
गरीबों को अन्न और वस्त्र का दान दें। जरूरतमंदों की मदद करना बहुत फलदायी होता है।
धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें:
श्रीमद्भागवत कथा और गीता का पाठ जरूर करें। अधिक मास महात्म्य सुनना भी शुभ होता है।
दीपदान की परंपरा निभाएं:
शाम को मंदिर या तुलसी के पास दीपक जलाएं। इससे घर की दरिद्रता दूर हो जाती है।
सात्विक जीवनशैली अपनाएं:
इस दौरान सात्विक भोजन और शुद्ध विचार रखें। यह समय आत्मिक शुद्धि के लिए उत्तम है।
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अधिक मास में क्या न करें
विवाह और सगाई न करें:
इस महीने शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं। ग्रहों की स्थिति इसके लिए शुभ नहीं होती।
मुंडन और जनेऊ संस्कार टालें:
बच्चों का मुंडन या जनेऊ संस्कार न करें। ये संस्कार शुभ मुहूर्त में ही करने चाहिए।
नया व्यापार शुरू न करें:
नए बिजनेस या दुकान की शुरुआत न करें। अधिक मास में निवेश करना शुभ नहीं मानते।
गृह प्रवेश या नया निर्माण:
नए घर में प्रवेश या नींव न रखें। इस समय को केवल भक्ति के लिए रखें।
तामसिक भोजन और बुराई से बचें:
मांस-मदिरा और नशीली चीजों का सेवन न करें। किसी की निंदा या बुराई करने से बचें।
अधिक मास का यह समय पुण्य कमाने का महाकुंभ है। इस महीने में दीपदान का बहुत महत्व होता है। शाम को मंदिर में दीपक जरूर जलाना चाहिए।
इससे घर की दरिद्रता हमेशा के लिए खत्म होती है। भगवान विष्णु (श्रीमद्भागवत गीता) को पीले फल अर्पित करना शुभ है। तुलसी की माला से जाप करना बहुत फलदायी है। श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मानसिक शांति मिलती है। यह समय खुद को सुधारने का अच्छा मौका है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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