चंद्र ग्रहण के कारण इस बार बदलेगी रंगों वाली होली की तारीख, जानें सूतक काल का सही समय

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होली पर लगेगा। इसके कारण रंगों वाली होली अब 4 मार्च को मनाई जाएगी। होली पर दिखेगा ब्लड मून का अद्भुत नजारा होगा।

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Kaushiki
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Chandra Grahan 2026: साल 2026 की शुरुआत धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से बहुत ही खास होने वाली है। इस साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी 3 मार्च को लगेगा। ज्योतिषों की मानें तो ये ग्रहण कोई सामान्य घटना नहीं है क्योंकि यह 122 साल बाद लग रहा है। 

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, यह ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लगने जा रहा है। ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग गहरा लाल यानी ब्लड मून जैसा दिखेगा।

यह ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। ग्रहण का असर होली के त्योहार और होलिका दहन की परंपराओं पर पड़ेगा।

चंद्र ग्रहण का सही समय क्या है

पंचांग के मुताबिक, चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को दोपहर में शुरू होगा। इसकी शुरुआत दोपहर 3:19 बजे होगी और समापन शाम 6:48 बजे होगा। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाएगा।

3 मार्च की सुबह 9:00 बजे से ही सूतक काल मान्य हो जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे और पूजा वर्जित होगी।

भारत के साथ-साथ ये ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और अफ्रीका के हिस्सों में भी दिखेगा। इस दौरान किसी भी नए काम की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता है।

होली के त्योहार पर ग्रहण का बड़ा असर

पंचांग के मुताबिक, इस साल चंद्र ग्रहण के कारण रंगों वाली होली की तारीखों में बदलाव की संभावना है। 3 मार्च को पूर्णिमा होने के बावजूद लोग रंगों की होली नहीं खेलेंगे। ग्रहण और सूतक के कारण रंगों का उत्सव अब 4 मार्च को मनेगा।

हालांकि होलिका दहन का समय पंचांग की गणना के मुताबिक पहले जैसा ही रहेगा। ग्रहण काल में रंग खेलना और उत्सव मनाना धार्मिक रूप से वर्जित होता है। भक्तों को ग्रहण खत्म होने के बाद ही होली की तैयारी करनी चाहिए। 4 मार्च की सुबह स्नान और दान के बाद ही रंग खेला जाएगा।

फाल्गुन मास में दो ग्रहणों का दुर्लभ संयोग

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, साल 2026 के फाल्गुन महीना में कुल दो बड़े ग्रहण लगने वाले हैं। पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा जो रिंग ऑफ फायर कहलाएगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसका असर रहेगा।

इसके ठीक बाद 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा। एक ही महीने में दो ग्रहण होना ज्योतिषीय रूप से काफी महत्वपूर्ण है। ये संयोग प्रकृति और मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। विद्वानों के मुताबिक इस दौरान संयम और साधना का पालन करना चाहिए।

ग्रहण के दौरान क्या करें

  • मांत्र जाप: ग्रहण के समय अपने इष्ट देव के मंत्रों का मन ही मन जाप करना सबसे शुभ और फलदायी माना जाता है।

  • तुलसी के पत्ते: सूतक लगने से पहले ही दूध, दही और पके हुए भोजन में तुलसी के पत्ते डाल दें ताकि वे अशुद्ध न हों।

  • दान-पुण्य: ग्रहण समाप्त होने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार अनाज, काले तिल या वस्त्रों का दान करें, इससे नकारात्मकता दूर होती है।

  • शुद्धिकरण: ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और खुद भी स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।

  • देव स्नान: घर के मंदिर की सफाई करें और मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराकर ही दोबारा पूजा-पाठ शुरू करें।

ग्रहण के दौरान क्या न करें

  • भोजन से परहेज: सूतक काल और ग्रहण के दौरान खाना बनाना और खाना खाना वर्जित होता है (बुजुर्गों और बीमारों को छोड़कर)।

  • नुकीली चीजों का उपयोग: इस समय चाकू, कैंची, सुई या किसी भी धारदार और नुकीली वस्तु का इस्तेमाल भूलकर भी न करें।

  • गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानी: गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर निकलने या काटने-सिलने जैसे कामों से बचना चाहिए।

  • पूजा और कपाट: सूतक काल शुरू होते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, इस दौरान मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित है।

  • शुभ कार्य: ग्रहण के समय किसी भी नए व्यापार, प्रॉपर्टी डील या मांगलिक कार्य की शुरुआत करना अशुभ माना जाता है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

FAQ

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण भारत में कब और कहां दिखेगा?
साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगेगा और भारत में दिखेगा। इसका समय दोपहर 3:19 बजे से लेकर शाम 6:48 बजे तक रहेगा। भारत के अलावा यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के कई देशों में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण के कारण होली की तारीख में क्या बदलाव हुआ है?
ग्रहण और सूतक काल 3 मार्च को होने के कारण उस दिन होली नहीं होगी। रंगों वाली होली अब अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 को खेली जाएगी। धार्मिक शुद्धि के बाद ही रंगों का उत्सव मनाना शास्त्र सम्मत माना गया है।
सूतक काल क्या होता है और यह कब से शुरू होगा?
सूतक काल ग्रहण से पहले का वह समय है जब शुभ कार्य वर्जित होते हैं। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण का सूतक सुबह 9:00 बजे से शुरू होगा। इस दौरान मंदिरों में पूजा-पाठ बंद रहेगा और केवल मानसिक जप किया जाएगा।

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