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ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिषीय और वैज्ञानिक नजरिए से इसका महत्व कम नहीं होता। शास्त्रों के मुताबिक, सूर्य ग्रहण एक अत्यंत संवेदनशील समय माना जाता है।
इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसलिए इस समय सीधे सूर्य देव की पूजा करना वर्जित माना गया है। आइए जानेंं इस ग्रहण का समय और इससे जुड़ी सावधानियां...
2026 कब लगेगा सूर्य ग्रहण
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ये वलयाकार सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को दोपहर 03:26 बजे से शुरू होगा। सूर्य ग्रहण का समय का समापन शाम को लगभग 07:57 बजे के आसपास होगा। यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगने जा रहा है।
हालांकि ये ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा। फिर भी नियम मान्य रहते हैं। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से ठीक 12 घंटे पहले लग जाता है। सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा वर्जित होती है।
भारत में नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, भले ही ग्रहण भारत में न दिखे। लेकिन खगोलीय और ज्योतिषीय घटना के रूप में इसका प्रभाव पूरी पृथ्वी पर पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र मानता है कि राहु-केतु द्वारा सूर्य को ग्रास बनाने से ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा फैलती है।
इससे राशियों को प्रभावित करती है। भले ही भौगोलिक रूप से सूतक केवल दिखने वाली जगहों पर प्रभावी हो। लेकिन अपनी आस्था और मानसिक शुद्धि के लिए कई लोग नियमों का पालन करना बेहतर समझते हैं। इससे मन को शांति और सुरक्षा का अनुभव होता है।
क्या ग्रहण के दौरान अर्घ्य देना सही है
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ग्रहण काल में अर्घ्य देना शुभ नहीं माना जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अर्घ्य देते समय सूर्य को देखा जाता है। ग्रहण के समय सूर्य की ओर सीधे देखना आंखों के लिए बहुत हानिकारक है।
धार्मिक दृष्टि से राहु और केतु सूर्य की सकारात्मक ऊर्जा को ढक लेते हैं। ऐसे में जल अर्पित करने से पूजा का फल नकारात्मक हो सकता है। विद्वानों का मानना है कि ग्रहण समाप्त होने तक प्रतीक्षा करना ही श्रेयस्कर है।
अर्घ्य देने की सही विधि
शास्त्रों (सूर्य ग्रहण की धार्मिक मान्यता) के मुताबिक ग्रहण समाप्त होने के बाद ही अर्घ्य देना चाहिए। ग्रहण खत्म होने पर सबसे पहले स्वयं को स्नान कर शुद्ध करें। इसके बाद पूरे घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव अवश्य करें।
फिर तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर सूर्य को अर्घ्य दें। यदि ग्रहण शाम को खत्म हो, तो अगले दिन सुबह अर्घ्य देना चाहिए। शुद्धिकरण के बाद किया गया यह अर्घ्य विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
ग्रहण काल में क्या करें
मानसिक जाप: इस समय "ॐ सूर्याय नमः" या अपने इष्ट देव के मंत्रों का मन ही मन जाप करना सबसे अच्छा है।
कुश/तुलसी का उपयोग: खाने-पीने की पहले से बनी चीजों में तुलसी के पत्ते या कुशा डाल दें ताकि वे शुद्ध रहें।
ध्यान और योग: ग्रहण के दौरान शांत रहकर ध्यान करना मानसिक शांति और सकारात्मकता के लिए शुभ होता है।
शुद्धिकरण (स्नान): ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद स्नान करना चाहिए ताकि शरीर से नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाएं।
दान-पुण्य: ग्रहण के बाद ब्राह्मणों या गरीबों को अपनी क्षमता के अनुसार अन्न या वस्त्र दान करना बहुत फलदायी है।
ग्रहण काल में क्या न करें
भोजन और कुकिंग: सूर्य ग्रहण सूतकके दौरान न तो खाना बनाना चाहिए और न ही कुछ खाना-पीना चाहिए (बीमार और वृद्धों को छोड़कर)।
मूर्ति स्पर्श: इस काल में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं, इसलिए मूर्तियों को छूना या पूजा करना वर्जित है।
नुकीली चीजों का प्रयोग: कैंची, सुई या चाकू जैसी नुकीली चीजों का इस्तेमाल न करें, खासकर गर्भवती महिलाओं को इससे बचना चाहिए।
नया काम शुरू करना: ग्रहण काल को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ या नया काम शुरू नहीं करना चाहिए।
सीधे न देखें: वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दोनों कारणों से ग्रहण को खुली आंखों से सीधे नहीं देखना चाहिए, यह हानिकारक हो सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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