चैत्र नवरात्रि के महानवमी को मां सिद्धिदात्री को लगाएं हलवा-पूरी का भोग, घर आएगी सुख-समृद्धि
Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व अब अपने अंतिम दिन पर पहुंच गया है। नवरात्रि के नौवें दिन (26-27 मार्च) मां सिद्धिदात्री की विशेष आराधना की जाती है।
मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियां देने वाली देवी माना जाता है। मां का यह दिव्य स्वरूप बहुत ही शक्तिशाली और ममतामयी है। सच्चे मन से मां की पूजा करने पर हर इच्छा पूरी होती है। मां अपने भक्तों के जीवन से सभी दुखों का नाश करती हैं।
मां सिद्धिदात्री की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने मां की कठोर तपस्या की थी। मां की कृपा से ही शिव जी ने आठों सिद्धियां प्राप्त कीं। देवी की कृपा के कारण ही भगवान शिव का शरीर आधा देवी का हुआ।
इसी दिव्य रूप के कारण शिव जी अर्धनारीश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए। मां सिद्धिदात्री का जन्म सभी देवताओं के तेज से हुआ था। उन्होंने महिषासुर जैसे राक्षसों का अंत कर धर्म की रक्षा की थी।
मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि
- नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
- मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- मां को सफेद रंग के वस्त्र पहनाना बहुत ही शुभ माना जाता है।
- धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, मां को सफेद रंग बहुत प्रिय है।
- मां के चरणों में सफेद फूल अर्पित कर प्रार्थना करें।
- मां को तिलक लगाएं और धूप-दीप जलाकर उनकी आरती करें।
मां सिद्धिदात्री का प्रिय भोग
मां सिद्धिदात्री को हलवा, पूरी और खीर का भोग बहुत प्रिय है। मां को नारियल, चना और मौसमी फल भी अर्पित करने चाहिए। नवमी के दिन नौ प्रकार के पुष्प चढ़ाना बहुत शुभ होता है।
इस दिन कन्या पूजन करने से मां का विशेष आशीर्वाद मिलता है। नौ कन्याओं को भोजन कराकर उन्हें श्रद्धा से उपहार भेंट करें। मां को सच्चे हृदय से भोग लगाने पर वे प्रसन्न होती हैं।
मां सिद्धिदात्री की आरती
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