सिर्फ संस्कार नहीं, सेहत का खजाना भी है चरण स्पर्श, जानें इसके फायदे
Feet Touching Benefits: भारतीय संस्कृति में बड़ों के पैर छूना बहुत आम बात है। घर से निकलते समय हम अक्सर बुजुर्गों के पैर छूते हैं। आज की नई पीढ़ी को यह परंपरा थोड़ी पुरानी लग सकती है। लेकिन अगर हम इसे ध्यान से देखें तो यह एक अनोखी विधि है। विज्ञान के नजरिए से इसके पीछे बहुत गहरा रहस्य छिपा हुआ है।
इससे हमें बहुत ज्यादा मानसिक और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। हमारे प्राचीन ऋषियों को इस विज्ञान की पूरी जानकारी थी। उन्होंने इसे हमारे रोज के जीवन का हिस्सा बना दिया था। ताकि हम बिना किसी विशेष प्रयास के हमेशा स्वस्थ रह सकें।
शरीर में ऊर्जा प्रवाह का मुख्य केंद्र
हमारे शरीर के भीतर लगातार ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है। विज्ञान भी मानता है कि हर जीवित शरीर में एक इलेक्ट्रिक फील्ड होती है। इस पूरी ऊर्जा का नियंत्रण केंद्र हमारा मस्तिष्क होता है।
हमारे हाथ और पैर इस ऊर्जा के अंतिम छोर माने जाते हैं। इन्हें ऊर्जा का आदान-प्रदान करने वाला केंद्र भी कहा जाता है। जब हम झुककर किसी बुजुर्ग के पैर छूते हैं तब एक खास क्रिया होती है।
हमारे हाथों की उंगलियां उनके पैरों के अंगूठे के संपर्क में आती हैं। इस स्पर्श से शरीर में तुरंत एक क्लोज्ड सर्किट बन जाता है। इससे बड़ों की सकारात्मक ऊर्जा हमारे भीतर प्रवेश करने लगती है।
अहंकार का विसर्जन और मानसिक स्वास्थ्य
झुकना हमेशा से ही विनम्रता का सबसे बड़ा प्रतीक माना गया है। जब हम किसी के सामने आदर से झुकते हैं तो हमारा अहंकार कम होता है। अहंकार कम होने से हमारे मस्तिष्क को बहुत राहत मिलती है।
इससे दिमाग में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन का स्तर घट जाता है। ये क्रिया हमारे आत्म-सम्मान और मानसिक शांति को बहुत बढ़ाती है। जो व्यक्ति दूसरों के सामने झुकना जानता है वह हमेशा खुश रहता है।
उसका मानसिक स्वास्थ्य उन लोगों से बहुत बेहतर होता है जो हमेशा गुस्से में रहते हैं। प्रतिस्पर्धा और तनाव से बचने का यह सबसे आसान तरीका है। इसलिए पैर छूने से हमारा स्वभाव भी बहुत शांत और गंभीर बनता है।
ऑक्सीटोसिन हार्मोन और आशीर्वाद का विज्ञान
जब कोई बुजुर्ग हमारे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देता है तो बहुत अच्छा लगता है। इस अफ्फेक्टिव टच का हमारे शरीर पर गहरा असर होता है। बुजुर्गों के हाथ के स्पर्श से हमारे मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन हार्मोन निकलता है।
इस हार्मोन को विज्ञान की भाषा में लव हार्मोन भी कहते हैं। ये हार्मोन हमें सुरक्षा, प्यार और अपनेपन का अहसास कराता है। इससे डिप्रेशन और अकेलेपन जैसी गंभीर मानसिक समस्याएं तुरंत दूर होती हैं।
यह सुंदर परंपरा परिवारों को आपस में जोड़े रखने का एक बहुत बड़ा जरिया है। जब बच्चे बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं तो बड़ों को अपनी उपयोगिता का अहसास होता है। ये अहसास बुजुर्गों की उम्र बढ़ाने में भी काफी सहायक साबित होता है।
सबकॉन्शियस माइंड में बस जाते हैं मीठे शब्द
झुककर पैर छूना शरीर के लिए एक बेहतरीन योग भी है। इससे हमारी रीढ़ की हड्डी में बहुत अच्छा लचीलापन आता है। साथ ही हमारे पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन भी बढ़ता है।
आशीर्वाद के समय बुजुर्गों के मुंह से हमेशा सकारात्मक शब्द ही निकलते हैं। ये शुभ शब्द सीधे व्यक्ति के अवचेतन मन (Subconcious Mind) पर गहरा प्रभाव डालते हैं। शोध बताते हैं कि जो बच्चे दादा-दादी के करीब रहते हैं वे ज्यादा मजबूत होते हैं।
उनमें विपरीत परिस्थितियों को झेलने की शक्ति बहुत अधिक होती है। बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना केवल एक सामाजिक औपचारिकता नहीं है। बल्कि यह अपनी जड़ों से जुड़ने और सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने का शुद्ध विज्ञान है।
चरण स्पर्श से जुड़ी एक पौराणिक कथा
पैर छूने के महत्व पर हमारे पुराणों में एक बहुत ही सुंदर और प्रेरक कथा मिलती है। यह कथा भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय से जुड़ी हुई है। एक बार दोनों भाइयों के बीच ब्रह्मांड का चक्कर लगाने की शर्त लगी थी।
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर तुरंत पूरी दुनिया की परिक्रमा करने निकल गए। लेकिन गणेश जी के सामने चुनौती बड़ी थी क्योंकि उनका वाहन एक छोटा सा चूहा था। गणेश जी ने अपनी तीव्र बुद्धि का उपयोग किया और एक अनोखा रास्ता चुना।
उन्होंने आदरपूर्वक अपने माता-पिता माता पार्वती और भगवान शिव को एक स्थान पर बिठाया। इसके बाद उन्होंने बहुत ही श्रद्धा के साथ उनके चरण स्पर्श किए। पैर छूने के बाद उन्होंने माता-पिता की सात बार परिक्रमा पूरी की।
माता-पिता के चरणों में ही है पूरा संसार
जब भगवान शिव ने गणेश जी से इसका कारण पूछा तो उन्होंने बहुत ही सुंदर उत्तर दिया। गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही पूरा संसार समाया हुआ है। माता-पिता की सेवा और उनके चरण स्पर्श से बढ़कर कोई तीर्थ नहीं है।
गणेश जी की यह श्रद्धा और ज्ञान देखकर भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान दे दिया। यह पौराणिक कथा हमें सिखाती है कि बड़ों के चरणों में कितनी शक्ति होती है।
बुजुर्गों का आशीर्वाद (Indian Traditions) हमें जीवन की हर चुनौती से लड़ने की एक अदृश्य मानसिक शक्ति देता है। अगली बार जब आप किसी बुजुर्ग के पैर छुएं तो इस बदलाव को खुद महसूस कीजिएगा। आपके भीतर ऊर्जा का एक बिल्कुल नया प्रवाह शुरू हो जाएगा।
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