आज से शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
Kaushiki | Jun 24, 2026, 14:00 IST
chaturmas 2026
साल 2026 में आषाढ़ महीना आज (30 जून) से शुरू हो रहा है। इसी महीने 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होगी। इसके बाद अगले चार महीनों तक विवाह और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी।
Month of Ashadha 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक, आषाढ़ का महीना बेहद खास माना जाता है। इस साल आषाढ़ मास आज (30 जून) से शुरू होने जा रहा है। यह पवित्र महीना 29 जुलाई तक रहेगा। धार्मिक और सेहत के लिहाज से यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।
इस महीने में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य देव को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। शास्त्रों में सूर्य देव प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले देवता हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानें क्या करें और क्या न करें...
![Sun Worship]()
पुराणों में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिनकी पूजा का बहुत अधिक महत्व है। भविष्य पुराण और मत्स्य पुराण जैसे ग्रंथों में सूर्य उपासना को सुख, समृद्धि और अच्छी सेहत देने वाला बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा की बात बताई थी। उन्होंने कहा था कि सूर्य ही एक मात्र प्रत्यक्ष देवता हैं। आषाढ़ में रविवार का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
पुराणों के मुताबिक, सूर्य देव ब्रह्मांड की आत्मा हैं और उनकी पूजा करने से इंसान को सभी प्रकार के रोगों, विशेषकर त्वचा और आंखों की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
सूर्य को जल अर्पित करने और उनके मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संक्रांति और छठ जैसे महापर्व भी इसी महिमा को दर्शाते हैं।
वाल्मीकि रामायण में भी सूर्य पूजा का एक सुंदर प्रसंग है। लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने सूर्य देव की पूजा की थी। उन्होंने सूर्य देव को जल चढ़ाकर विजय का आशीर्वाद मांगा था। इससे उन्हें रावण पर जीत हासिल करने में मदद मिली थी।
![Month of Ashadha]()
स्कंद पुराण के मुताबिक, आषाढ़ मास में भगवान वामन की पूजा होती है। आषाढ़ महीने के मुख्य देवता भगवान वामन ही माने गए हैं। वामन पुराण के अनुसार इनकी पूजा से संतान सुख मिलता है। इससे शरीर की परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं।
पौराणिक कथा के मुताबिक, सतयुग में असुर राजा बलि का राज था। राजा बलि ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लिया। उन्होंने वामन रूप में एक बौने ब्राह्मण का अवतार लिया।
जब राजा बलि एक बड़ा यज्ञ कर रहे थे, तब वामनदेव पहुंचे। उन्होंने राजा बलि से दान में तीन पग धरती मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने राजा बलि को दान देने से मना किया था। लेकिन बलि ने अपना वचन बदलने से साफ मना कर दिया।
वचन मिलते ही भगवान वामन ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया। उन्होंने एक पग में पूरी धरती को नाप लिया। दूसरे पग में उन्होंने पूरे स्वर्गलोक को माप लिया। अब तीसरा पैर रखने के लिए कोई जगह नहीं बची थी।
तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया। उन्होंने कहा कि तीसरा पैर उनके सिर पर रख दें। भगवान ने जैसे ही पैर रखा, बलि पाताल लोक पहुंच गए। भगवान ने खुश होकर उन्हें पाताल का स्वामी बना दिया।
![chaturmas 2026]()
आषाढ़ महीने में ही देवशयनी एकादशी का बड़ा पर्व आता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार यह एकादशी 25 जुलाई को है। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है। चातुर्मास का समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर होगा।
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं। वे पाताल लोक में राजा बलि के द्वार पर रहते हैं। भगवान विष्णु के सोने के कारण मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दौरान शादी-ब्याह जैसे शुभ काम नहीं किए जाते।
चातुर्मास के दौरान मुख्य रूप से चार महीनों का आगमन होता है। इसमें सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के महीने शामिल हैं। इन चार महीनों में असुर शक्तियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय व्रत जरूर रखना चाहिए। चातुर्मास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हमें अनुशासन और भक्ति के रास्ते पर ले जाता है। गृहस्थ लोगों के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।
![Chaturmas 2026: चातुर्मास शुरू होते ही 4 महीने तक बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य, जानिए क्या करें और क्या नहीं-Chaturmas 2026 start and end date Dos and Don'ts devshayani ekadashi rules 4]()
चातुर्मास के दौरान भोजन को लेकर कई कड़े नियम होते हैं। इस समय कुछ खास चीजों को खाने की मनाही होती है। लोग इन चार महीनों में गुड़ और तेल का सेवन नहीं करते। इसके अलावा बैंगन और हरी सब्जियां भी नहीं खाई जातीं।
मसालेदार और नमकीन भोजन से भी पूरी तरह परहेज किया जाता है। वैष्णव परंपरा के लोग इस समय सात्विक भोजन ही करते हैं। वे तैलीय, ज्यादा नमक या मीठा खाने से बचते हैं। भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग बिल्कुल नहीं होता।
हर महीने के हिसाब से भी कुछ नियम बनाए गए हैं। सावन के महीने में पालक और हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए। भाद्रपद के महीने में दही खाने से बचना चाहिए। यह सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
आश्विन के महीने में दूध पीने की मनाही होती है। कार्तिक के महीने में मांसाहार का सेवन बिल्कुल न करें। इस महीने में खासकर मछली खाने से बचना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
चातुर्मास में पूजा करने के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है। आप अपने घर पर ही आसान तरीके से पूजा कर सकते हैं। रोज सुबह सूर्योदय से पहले उठने की आदत डालें। उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद भगवान विष्णु के सामने एक दीपक जलाएं। भगवान को ताजी तुलसी के पत्ते जरूर अर्पित करें। पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना बहुत अच्छा होता है। आप हरे कृष्ण महामंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
इन चार महीनों में एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। अपनी किसी एक बुरी आदत का त्याग करने का संकल्प लें। इसे ही आपका व्यक्तिगत व्रत माना जाएगा। इसके साथ ही भागवत पुराण या रामायण का पाठ सुनें।
चातुर्मास में दान-पुण्य करने से बहुत लाभ मिलता है। गरीबों को भोजन कराना और अन्न का दान करना सबसे अच्छा है। आप मंदिर में जाकर सेवा भी कर सकते हैं। इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
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इस महीने में सूर्य देव की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य देव को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। शास्त्रों में सूर्य देव प्रत्यक्ष दर्शन देने वाले देवता हैं। उनकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानें क्या करें और क्या न करें...
Sun Worship
पुराणों में सूर्य पूजा का महत्व
पुराणों के मुताबिक, सूर्य देव ब्रह्मांड की आत्मा हैं और उनकी पूजा करने से इंसान को सभी प्रकार के रोगों, विशेषकर त्वचा और आंखों की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
सूर्य को जल अर्पित करने और उनके मंत्रों का जाप करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संक्रांति और छठ जैसे महापर्व भी इसी महिमा को दर्शाते हैं।
वाल्मीकि रामायण में भी सूर्य पूजा का एक सुंदर प्रसंग है। लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने सूर्य देव की पूजा की थी। उन्होंने सूर्य देव को जल चढ़ाकर विजय का आशीर्वाद मांगा था। इससे उन्हें रावण पर जीत हासिल करने में मदद मिली थी।
Month of Ashadha
आषाढ़ माह का महत्व
पौराणिक कथा के मुताबिक, सतयुग में असुर राजा बलि का राज था। राजा बलि ने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर कब्जा कर लिया था। तब भगवान विष्णु ने देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लिया। उन्होंने वामन रूप में एक बौने ब्राह्मण का अवतार लिया।
जब राजा बलि एक बड़ा यज्ञ कर रहे थे, तब वामनदेव पहुंचे। उन्होंने राजा बलि से दान में तीन पग धरती मांगी। गुरु शुक्राचार्य ने राजा बलि को दान देने से मना किया था। लेकिन बलि ने अपना वचन बदलने से साफ मना कर दिया।
वचन मिलते ही भगवान वामन ने अपना विशाल रूप धारण कर लिया। उन्होंने एक पग में पूरी धरती को नाप लिया। दूसरे पग में उन्होंने पूरे स्वर्गलोक को माप लिया। अब तीसरा पैर रखने के लिए कोई जगह नहीं बची थी।
तब राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया। उन्होंने कहा कि तीसरा पैर उनके सिर पर रख दें। भगवान ने जैसे ही पैर रखा, बलि पाताल लोक पहुंच गए। भगवान ने खुश होकर उन्हें पाताल का स्वामी बना दिया।
chaturmas 2026
कब शुरू होगा चातुर्मास
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए सो जाते हैं। वे पाताल लोक में राजा बलि के द्वार पर रहते हैं। भगवान विष्णु के सोने के कारण मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इस दौरान शादी-ब्याह जैसे शुभ काम नहीं किए जाते।
चातुर्मास के दौरान मुख्य रूप से चार महीनों का आगमन होता है। इसमें सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के महीने शामिल हैं। इन चार महीनों में असुर शक्तियां ज्यादा सक्रिय हो जाती हैं। इसलिए लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय व्रत जरूर रखना चाहिए। चातुर्मास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हमें अनुशासन और भक्ति के रास्ते पर ले जाता है। गृहस्थ लोगों के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।
Chaturmas 2026: चातुर्मास शुरू होते ही 4 महीने तक बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य, जानिए क्या करें और क्या नहीं-Chaturmas 2026 start and end date Dos and Don'ts devshayani ekadashi rules 4
चातुर्मास में खान-पान के नियम
मसालेदार और नमकीन भोजन से भी पूरी तरह परहेज किया जाता है। वैष्णव परंपरा के लोग इस समय सात्विक भोजन ही करते हैं। वे तैलीय, ज्यादा नमक या मीठा खाने से बचते हैं। भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग बिल्कुल नहीं होता।
हर महीने के हिसाब से भी कुछ नियम बनाए गए हैं। सावन के महीने में पालक और हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए। भाद्रपद के महीने में दही खाने से बचना चाहिए। यह सेहत के लिए अच्छा माना जाता है।
आश्विन के महीने में दूध पीने की मनाही होती है। कार्तिक के महीने में मांसाहार का सेवन बिल्कुल न करें। इस महीने में खासकर मछली खाने से बचना चाहिए। इन नियमों का पालन करने से शरीर स्वस्थ रहता है।
चातुर्मास में घर पर कैसे करें पूजा
इसके बाद भगवान विष्णु के सामने एक दीपक जलाएं। भगवान को ताजी तुलसी के पत्ते जरूर अर्पित करें। पूजा के समय विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना बहुत अच्छा होता है। आप हरे कृष्ण महामंत्र का जाप भी कर सकते हैं।
इन चार महीनों में एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। अपनी किसी एक बुरी आदत का त्याग करने का संकल्प लें। इसे ही आपका व्यक्तिगत व्रत माना जाएगा। इसके साथ ही भागवत पुराण या रामायण का पाठ सुनें।
चातुर्मास में दान-पुण्य करने से बहुत लाभ मिलता है। गरीबों को भोजन कराना और अन्न का दान करना सबसे अच्छा है। आप मंदिर में जाकर सेवा भी कर सकते हैं। इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
FAQ
- साल 2026 में चातुर्मास कब से शुरू हो रहा है और कब समाप्त होगा?
साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी। इसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस दौरान भगवान विष्णु चार महीने तक योगनिद्रा में रहते हैं। - आषाढ़ के महीने में सूर्य देव को जल चढ़ाने का क्या महत्व है?
आषाढ़ मास में सूर्य पूजा से आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। भविष्य पुराण के मुताबिक, सूर्य ही एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं। भगवान श्रीराम ने भी रावण पर विजय पाने के लिए सूर्य देव की पूजा की थी। - चातुर्मास के दौरान खान-पान के मुख्य नियम क्या हैं?
चातुर्मास में गुड़, तेल, बैंगन, प्याज, लहसुन और हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खाई जाती हैं। सावन में पालक, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक के महीने में मांसाहार या मछली का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है।
चातुर्मास में भगवान विष्णु क्यों करते हैं पाताल लोक में निवास, कौन संभालता है सृष्टि का संचालन
कमजोर सूर्य को मजबूत करेंगी सूर्य नमस्कार की ये 12 योग मुद्राएं, जानें तरीका
आर्द्रा नक्षत्र में हुआ सूर्य देव का गोचर, जानें सभी 12 राशियों के उपर इसका प्रभाव
इस दिन लगेगा 21वीं सदी का दूसरा सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, 6 मिनट तक अंधेरे में डूबेगी दुनिया
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