दिवाली 2026 की सही तारीख का सस्पेंस खत्म, पंचांग के हिसाब से जानें 8 या 9 नवंबर कब जलेगा पहला दीया?

Kaushiki | Oct 25, 2026, 12:53 IST
दिवाली 2026 में कब है लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
Confused about Diwali 2026 sahi tarikh between Nov 8 and 9? According to the Panchang, Kartik Amavasya and Lakshmi Puja shubh muhurt fall on November 8.
Diwali 2026: दीपों का पर्व दिवाली हमारे देश का सबसे बड़ा और खुशी देने वाला त्योहार माना जाता है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर यह पावन पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी दिन भगवान श्री राम 14 साल का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। उनके लौटने की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीयों की रोशनी से सजाया था।

तभी से हर घर में दीये जलाकर दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है। माना जाता है कि दिवाली की रात जो लोग सच्चे मन से पूजन करते हैं उनके घर में सुख और शांति आती है। लेकिन इस साल दिवाली की सही तारीख को लेकर लोगों के मन में थोड़ा भ्रम बना हुआ है। आइए जानें दिवाली की सही तिथि।



अमावस्या तिथि और सही समय

कार्तिक अमावस्या तिथि का हमारे शास्त्रों में बहुत बड़ा स्थान माना गया है। इस साल अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 9 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।



हिंदू धर्म में त्योहार की तारीख प्रदोष काल के हिसाब से तय होती है। दिवाली की पूजा हमेशा शाम और रात के समय में की जाती है।



8 नवंबर की शाम को अमावस्या तिथि और प्रदोष काल दोनों एक साथ मौजूद रहेंगे। इसी वजह से 8 नवंबर का दिन ही दिवाली पूजन के लिए सबसे सही माना गया है।



9 नवंबर की शाम को अमावस्या तिथि नहीं रहेगी। इसलिए 8 नवंबर को ही दीप जलाना शुभ होगा।



लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा की जरूरी सामग्री

दिवाली की पूजा शुरू करने से पहले सभी जरूरी चीजें पास में रख लें। इससे पूजा के दौरान बार-बार उठना नहीं पड़ता है। सबसे पहले माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्ति लेकर आएं।



पूजा की एक साफ लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा रखें। रोली, कुमकुम, अक्षत, चंदन और कलावा अपने पास संभाल कर रख लें।



इसके अलावा पान के पत्ते, सुपारी, ताजा नारियल और गंगाजल भी बहुत जरूरी है। कलश की स्थापना के लिए आम के पत्ते और जनेऊ की जरूरत भी पड़ती है।



ताजे फूल, दूर्वा, धूप, कपूर और रुई की बत्ती तैयार रखें। भोग लगाने के लिए खील, बताशे, ताजे फल और शुद्ध मिठाई पूजा की थाली में रखें। मिट्टी के दीये और सरसों का तेल भी पहले से रख लें।



गणेश लक्ष्मी पूजन विधि

भगवान का स्नान और श्रृंगार

मूर्तियों की स्थापना के बाद भगवान गणेश और मां लक्ष्मी को स्नान कराएं। स्नान कराने के लिए साफ जल और गंगाजल का प्रयोग करें। इसके बाद दोनों मूर्तियों को चंदन, रोली और कुमकुम का तिलक लगाएं। फिर भगवान को सुंदर वस्त्र और अक्षत अर्पित करें।



गणेश जी को दूर्वा बहुत पसंद है इसलिए उन्हें दूर्वा जरूर चढ़ाएं। माता लक्ष्मी को लाल फूल और कमल का फूल अर्पित करना शुभ होता है। इसके बाद कलश और दीप की भी विधिवत पूजा करें।



भगवान को मौली और जनेऊ अर्पित करें। श्रृंगार पूरा होने के बाद ही भोग लगाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इससे पूजा स्थल का वातावरण बहुत पावन हो जाता है।



पूजा के अगले चरण में भगवान को प्रिय चीजों का भोग लगाया जाता है। माता लक्ष्मी और गणेश जी को खील और बताशे का भोग लगाएं। साथ में मौसम के ताजे फल और मिठाई भी भगवान के आगे रखें।



इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर भगवान का ध्यान करें। भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करें और फिर लक्ष्मी जी के मंत्र पढ़ें। मंत्र जाप के बाद पूरे परिवार के साथ खड़े होकर आरती करें।



सबसे पहले गणेश जी की आरती गाएं और फिर माता लक्ष्मी की आरती करें। आरती का धुआं पूरे घर में फैलाएं। आरती के बाद अपने परिवार की सुख और समृद्धि के लिए हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।



घर में दीये जलाने का नियम

आरती पूरी होने के बाद घर को दीयों की रोशनी से सजाया जाता है। सबसे पहला दीया पूजा की चौकी पर जलाकर रखें। दूसरा दीया घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ बाहर की ओर रखें। तीसरा दीया तुलसी के पौधे के पास जलाकर रखना चाहिए।



घर के पानी रखने वाले स्थान पर भी एक दिया जरूर जलाएं। इसके बाद घर के सभी कमरों और छत पर दीये सजाएं। दीये जलाने से घर की सभी नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं। चारों तरफ रोशनी होने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है। दिवाली की रात घर में कहीं भी अंधेरा नहीं रहना चाहिए। रोशनी का यह पर्व आपके जीवन में नया सवेरा लेकर आता है।



दिवाली का सामाजिक महत्व

दिवाली केवल पूजा पाठ का पर्व नहीं बल्कि आपस में प्रेम बांटने का दिन है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को मिठाई देते हैं। पुराने मनमुटाव भूलकर लोग एक दूसरे को गले लगाते हैं। गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने से बड़ा कोई पुण्य नहीं है।



दिवाली पर दूसरों के जीवन में भी खुशी फैलाने का प्रयास करना चाहिए। अपने घर के साथ-साथ दूसरों के चेहरों पर भी मुस्कान लाएं। साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाएं। पटाखे कम जलाएं और दीयों की रोशनी से खुशियां मनाएं।



यह त्योहार हमें अच्छाई की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। आपसी भाईचारे से मनाया गया पर्व ही सच्चा त्योहार कहलाता है। दिवाली का यह पावन पर्व हर इंसान के जीवन में उम्मीद की नई किरण लाता है। माता लक्ष्मी की कृपा से घर में धन और धान्य की बरकत होती है।



गणेश जी की कृपा से बुद्धि और ज्ञान का विकास होता है। इस साल 8 नवंबर को सही समय पर पूजा करके आप पुण्य पा सकते हैं। शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करके पूजा संपन्न करें। अपने बड़ों का आशीर्वाद लें और छोटों को प्यार दें। रोशनी का यह पावन पर्व आपके परिवार में ढेर सारी खुशियां लाए।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQs:



  1. दिवाली की सही तारीख क्या है?
    इस साल दिवाली की सही तारीख 8 नवंबर 2023 है, जब अमावस्या तिथि और प्रदोष काल दोनों एक साथ होंगे।
  2. दिवाली पर पूजन विधि में कौन-कौन सी सामग्री की आवश्यकता होती है?
    दिवाली पर पूजन के लिए माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां, लाल कपड़ा, रोली, कुमकुम, चंदन, कलश, ताजे फूल, दीये और मिठाई आदि आवश्यक हैं।
  3. दिवाली का समाजिक महत्व क्या है?
    दिवाली केवल पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम बढ़ाने और जरूरतमंदों की मदद करने का अवसर भी है। इस दिन लोग एक-दूसरे को मिठाई देकर पुराने मनमुटाव भुलाते हैं।
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