14 जुलाई से अस्त होंगे देवगुरु बृहस्पति, इन राशि वालों पर पड़ेगा इसका सीधा असर
Guru Ast 2026: ज्योतिष और धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। ब्रह्मांड के सबसे शुभ ग्रह देवगुरु बृहस्पति जल्द ही अस्त होने वाले हैं। यह खगोलीय घटना इस साल 14 जुलाई 2026 को होने जा रही है। जब कोई ग्रह सूर्य के बहुत करीब आ जाता है तो वह अस्त होता है।
गुरु के अस्त होते ही समाज में सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। इसके बाद लोग कोई भी नया या शुभ काम नहीं कर पाएंगे। जुलाई के इस महीने में अब बहुत ही कम शुभ दिन बचे हैं। आइए जानते हैं कि इस बदलाव का आपके जीवन पर क्या असर होगा।
विवाह के बचे सिर्फ दो दिन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जुलाई में शादी के सिर्फ दो शुभ मुहूर्त बचे हैं। ये शुभ तिथियां आज 8 जुलाई और 11 जुलाई को ही उपलब्ध हैं। इसके बाद 14 जुलाई से गुरु ग्रह पूरी तरह अस्त हो जाएंगे।
इस वजह से मैरिज हॉल और होटलों की बुकिंग बहुत तेजी से बढ़ गई है। हर कोई इन दो दिनों में ही अपने शुभ काम निपटाना चाहता है। इसके बाद शहनाइयां बजने पर अगले चार महीने के लिए ब्रेक लग जाएगा। विवाह के इच्छुक लोगों को अब नवंबर महीने तक का लंबा इंतजार करना होगा।
चातुर्मास से लगेगा लंबा ब्रेक
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गुरु के अस्त होने के तुरंत बाद ही चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा। इस साल 25 जुलाई को बेहद पवित्र देवशयनी एकादशी तिथि पड़ रही है। इसी दिन से चातुर्मास का प्रारंभ आधिकारिक तौर पर माना जाता है।
यह काल 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक लगातार चलता रहेगा। हालांकि 12 अगस्त को गुरु ग्रह दोबारा से उदय हो जाएंगे। लेकिन चातुर्मास लागू रहने के कारण तब भी कोई शुभ कार्य नहीं होगा। अब अगला सबसे बड़ा शुभ मुहूर्त 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर आएगा।
इन कार्यों पर नहीं होगी कोई रोक
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, गुरु अस्त होने के दौरान सभी काम पूरी तरह से बंद नहीं होते हैं। इस काल में आप धार्मिक और सात्विक कार्य आसानी से कर सकते हैं। तीर्थ यात्रा, पूजा-पाठ, दान और व्रत करने पर कोई रोक नहीं है।
इसके अलावा बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी इस समय किया जा सकता है। यदि घर का निर्माण कार्य पहले से चल रहा हो तो वह जारी रहेगा। वाहन, गहने खरीदना या घर की मरम्मत कराना भी इस दौरान पूरी तरह सुरक्षित है। पितरों का श्राद्ध कर्म या तर्पण करने के लिए भी यह समय उत्तम है।
इन कामों को करने की होगी मनाही
गुरु के अस्त रहते समय कुछ विशेष मांगलिक कार्यों की सख्त मनाही होती है। इस दौरान विवाह, सगाई और मुंडन संस्कार बिल्कुल भी नहीं किए जाते हैं। नया गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत या जनेऊ संस्कार भी वर्जित माना जाता है।
किसी नए मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा या भवन का शिलान्यास भी न करें। इस समय नया घर खरीदने या नए व्यापार की शुरुआत से भी बचें। ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में किए गए कार्यों का शुभ फल नहीं मिलता। इसलिए लोग इस समय नए और बड़े निवेश करने से हमेशा बचते हैं।
इन 6 राशियों के लिए बढ़ेगी चुनौती
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, गुरु का कमजोर होना 6 राशियों के लिए भारी है।
- मेष राशि वाले जातकों को अपने बड़े फैसलों पर तुरंत ब्रेक लगाना चाहिए।
- कर्क राशि के लोगों का अनचाहा खर्च बढ़ने से बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है।
- सिंह राशि वालों को अपने वर्कप्लेस पर सीनियर से तनाव मिल सकता है।
- वृश्चिक राशि के लोगों को किसी करीबी से बड़ा धोखा मिलने की आशंका है। पैसों का उधार लेन-देन इस समय आपके आपसी रिश्तों को पूरी तरह खराब कर सकता है।
- धनु और मीन राशि के स्वामी स्वयं देवगुरु बृहस्पति ही माने जाते हैं।
इसलिए इन दोनों राशियों के आत्मविश्वास में अचानक बड़ी कमी आ सकती है। आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर अचानक पूरी तरह अटक सकते हैं। बिना वजह की फिजूलखर्ची से बचें और अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखें।
गुरु के बुरे असर को कम करने के उपाय
गुरु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय बेहद कारगर हैं। भगवान विष्णु और भगवान शिव की नियमित रूप से पूरी श्रद्धा से पूजा करें। हर गुरुवार को अपने माथे पर केसर या हल्दी का तिलक जरूर लगाएं।
इस पूरी अवधि में तामसिक भोजन और शराब से हमेशा दूरी बनाए रखें। अनाथ बच्चों की शिक्षा में मदद करने से गुरु दोष बहुत तेजी से कटता है। किसी भूखे व्यक्ति को आदर सहित भोजन कराना भी बहुत ज्यादा शुभ होता है। विवादों के समय मौन धारण करने से आपकी मानसिक ऊर्जा हमेशा बची रहेगी।
FAQ
- साल 2026 में गुरु ग्रह कब अस्त होंगे और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
देवगुरु बृहस्पति 14 जुलाई 2026 को अस्त होने जा रहे हैं। गुरु के अस्त रहने की अवधि में विवाह, सगाई, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर धार्मिक रूप से पूरी तरह रोक लग जाएगी। - जुलाई के बाद विवाह और अन्य मांगलिक कार्य कितने समय के लिए बंद रहेंगे?
14 जुलाई को गुरु अस्त होने और फिर 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने के कारण करीब चार महीने तक शुभ कार्य बंद रहेंगे। अब 20 नवंबर के बाद देवउठनी एकादशी से दोबारा शादियां शुरू होंगी। - गुरु अस्त और चातुर्मास के दौरान कौन से कार्य किए जा सकते हैं?
इस अवधि में तीर्थ यात्रा, पूजा-पाठ, दान, व्रत, उपवास, बच्चों का अन्नप्राशन, वाहन या गहनों की खरीदारी, घर की मरम्मत और पितरों का श्राद्ध कर्म जैसे कार्य बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
शिवलिंग की पूजा से मिलते हैं अद्भुत लाभ, जानें शिव महापुराण में क्या है लिखा
आखिर क्यों दूर्वा के बिना अधूरी है बप्पा की पूजा, कश्यप ऋषि से जुड़ा है राज
आज से शुरू हुआ आषाढ़ का महीना, सूर्य और भगवान वामन की पूजा का है खास महत्व
इस दिन से शुरू होगा चातुर्मास 2026, चार महीनों तक नहीं होंगे मांगलिक काम