Hanuman Ansh: कौन थे नीम करोली बाबा, जिनके मुरीद हैं स्टीव जॉब्स से लेकर विराट-अनुष्का
Neem Karoli Baba Hanuman Ansh: सिनेमाघरों में इन दिनों एक बहुत ही हैरान करने वाला चमत्कार देखने को मिल रहा है। बेहद कम बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी जबरदस्त सफलता से पूरी तरह तहलका मचा दिया है। बड़े-बड़े साउथ सुपरस्टार्स की मेगा-बजट और हैवी-प्रमोशन वाली फिल्मों के सामने ये छोटी सी स्पिरिचुअल ड्रामा मूवी पूरी मजबूती के साथ चट्टान की तरह डटी हुई है।
शुरुआत में सिनेमाघरों में इस मूवी की रफ्तार थोड़ी धीमी और काफी कमजोर दिखाई दे रही थी। लेकिन सिनेमाघरों में दो हफ्ते पूरे होते ही, पावरफुल वर्ड ऑफ माउथ और सोशल मीडिया पर दर्शकों के बेहतरीन रिव्यूज की बदौलत इसकी कमाई में अचानक बहुत तेजी से उछाल आया।
अब ये फिल्म 2026 की सबसे ज्यादा प्रॉफिट देने वाली ब्लॉकबस्टर फिल्मों की लिस्ट में टॉप पर शामिल हो चुकी है। तो ऐसे में बहुत से लोग नीम करोली बाबा के बारे में जानना चाहते हैं। तो आइए नीम करोली बाबा के मिराकुलस लाइफ की इंस्पिरेशनल स्टोरी के बारे में जानें...
सिर्फ दो करोड़ के बजट में बनी सुपरहिट फिल्म
बॉक्स ऑफिस पर Hanuman Ansh Movie का क्रेज थमने का नाम नहीं ले रहा है। Sacnilk की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, इस मूवी ने अपने चौथे मंडे को 5.15 करोड़ रुपए का माइंड-ब्लोइंग नेट कलेक्शन करके नया रिकॉर्ड बना दिया है। इसी के साथ इंडिया में फिल्म का टोटल नेट कलेक्शन 45.28 करोड़ रुपए हो चुका है। जबकि इसका ग्रॉस कलेक्शन 53.43 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है।
सबसे शॉकिंग और अमेजिंग बात ये है कि वर्ल्डवाइड लेवल पर इस फिल्म ने 50 करोड़ का माइलस्टोन आसानी से क्रॉस कर लिया है। ये मूवी 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। मेकर्स ने इस मास्टरपीस को महज 1.75 से दो करोड़ रुपए के बजट में तैयार किया था। बिना किसी हैवी प्रमोशन के ये अपनी सॉलिड स्टोरीलाइन के दम पर इसने थिएटर्स में तहलका मचा दिया।
डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के विजन और लीड एक्टर शोभिनव सत्या की पावर-पैक परफॉर्मेंस की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है। इस छोटे बजट की ब्लॉकबस्टर मूवी ने मेकर्स को करोड़ों का बंपर प्रॉफिट दिया है। दर्शक बाबा नीम करोली के मिराकुलस लाइफ की ये इंस्पिरेशनल जर्नी देखकर पूरी तरह इम्प्रेस हो रहे हैं।
बाबा नीम करोली का शुरुआती जीवन
नीम करोली बाबा का असली नाम श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा हुआ करता था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के पास स्थित अकबरपुर गांव में लगभग 1900 में हुआ था। मास्क और आडंबर से दूर वे बहुत ही सादे और दयालु स्वभाव के संत थे।
महज 11 साल की छोटी उम्र में ही बाबा का विवाह करा दिया गया था। हालांकि उन्हें 17 साल की उम्र में ही बहुत गहरा आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हो चुका था। उनके परिवार में दो बेटे और एक प्यारी बेटी भी शामिल थे।
नीम करोली नाम की पौराणिक कथा
साल 1958 में बाबा ने अपने गृहस्थ जीवन का पूरी तरह से त्याग कर दिया था। इसके बाद वे पूरे उत्तर भारत में एक साधु की तरह विचरण करने लगे। इस यात्रा के दौरान लोग उन्हें तलईया बाबा और हांडी वाले बाबा भी कहते थे।
उनके नीम करोली नाम पड़ने के पीछे एक बहुत ही प्रसिद्ध चमत्कारिक कथा जुड़ी है। एक बार टीटीई ने बिना टिकट होने पर बाबा को नीब करोली स्टेशन पर उतार दिया।
बाबा स्टेशन के पास ही अपना चिमटा गाड़कर शांति से जमीन पर बैठ गए। इसके बाद ट्रेन को चलाने की हर कोशिश पूरी तरह से नाकाम साबित होने लगी।
जब ट्रेन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी तो अफसरों ने बाबा से माफी मांगी। बाबा के वापस ट्रेन में बैठते ही ट्रेन तुरंत आसानी से आगे की ओर चल पड़ी। इस घटना के बाद से ही लोग उन्हें आदर से नीम करोली बाबा कहने लगे।
नीम करोली बाबा का एमपी से था खास लगाव
बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबा का पवित्र अस्थि कलश पिछले 53 सालों से मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सुरक्षित रखा गया है। यह अस्थि कलश उनके बड़े बेटे अनेग सिंह के परिवार के पास है।
बाबा नीम करोली ने 11 सितंबर 1973 को अनंत चतुर्दशी के दिन वृंदावन में अपनी देह का त्याग किया था। समाधि के बाद उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित किया गया था, लेकिन उनका एक हिस्सा उनके बेटे अपने साथ भोपाल ले आए थे।
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा के मुताबिक, बाबा का भोपाल शहर से बहुत गहरा आध्यात्मिक लगाव था। साल 1970 में वे अरेरा कॉलोनी स्थित अपने परिवार के घर पर पूरे 10 दिनों तक ठहरे थे।
इस दौरान उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण किया और नेवरी मंदिर में रात भी बिताई थी। परिवार अब भोपाल में बाबा का एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की तैयारी कर रहा है, जहां इस पावन अस्थि कलश को स्थापित किया जाएगा।
बुलेटप्रूफ कंबल का हैरान करने वाला सच
एक पौराणिक कथा के मुताबिक, बाबा हमेशा अपने शरीर पर एक साधारण सा सूती कंबल ही ओढ़ते थे। साल 1943 में वे फतेहगढ़ के एक गरीब बुजुर्ग दंपत्ति के घर रात को ठहरे। रातभर बाबा उस कंबल के अंदर ऐसे कराहते रहे जैसे कोई उन्हें बेरहमी से पीट रहा हो।
सुबह उन्होंने वह कंबल लपेटकर दंपत्ति को देते हुए गंगा में बहाने को कहा। कंबल ले जाते समय दंपत्ति को उसमें लोहे की भारी गोलियों का एहसास हुआ था। करीब एक महीने बाद उनका बेटा द्वितीय विश्व युद्ध के मैदान से सही-सलामत घर लौटा।
बेटे ने बताया कि भयानक गोलीबारी के बीच भी वो चमत्कारिक रूप से पूरी तरह बच गया। बाबा ने अपने ऊपर गोलियां सहकर उस भक्त के बेटे की जान बचा ली थी।
कैंची धाम की स्थापना
उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम में बाबा पहली बार साल 1961 में आए थे। उन्होंने अपने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिलकर साल 1964 में इस आश्रम को बनाया। पहाड़ियों के बीच बसे इस धाम में हनुमान जी के साथ कई मंदिर बने हैं।
फिर 11 सितंबर 1973 को बाबा ने वृंदावन में अपने इस नश्वर शरीर का त्याग किया। उनका पवित्र समाधि स्थल पंतनगर के पास बहुत ही शांत जगह पर स्थित है। हर साल 15 जून को कैंची धाम में एक बहुत भव्य मेले का आयोजन होता है। box office collection
दुनियाभर में प्रसिद्ध हस्तियां हैं बाबा के भक्त
बाबा नीम करोली की कृपा देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। एप्पल के मालिक स्टीव जॉब्स 1974 में शांति की तलाश में कैंची धाम आए थे। फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग भी अपनी कंपनी के शुरुआती दिनों में यहां माथा टेक चुके हैं।
हॉलीवुड स्टार जूलिया रॉबर्ट्स भी बाबा की तस्वीर देखकर उनकी बहुत बड़ी भक्त बनीं। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अनुष्का शर्मा भी अक्सर कैंची धाम दर्शन करने पहुंचते रहते हैं। बाबा का आश्रम हर इंसान के लिए मानसिक शांति का बहुत बड़ा केंद्र है।
नीम करोली बाबा के उपदेश
- राम नाम का जाप करें:
इंसान को रोजाना प्रभु श्री राम के नाम का जाप करना चाहिए, इससे मन को शांति और शक्ति मिलती है। - विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें:
प्रतिदिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए। - ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान लगाएं:
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान लगाना चाहिए, जिससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। - गौ सेवा करें:
घर में बनने वाली सबसे पहली रोटी हमेशा गौ माता को खिलानी चाहिए, इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। - मौन रहने का अभ्यास करें:
इंसान को दिन में कुछ समय चुप यानी मौन रहने का अभ्यास जरूर करना चाहिए, इससे आत्मबल और एकाग्रता बढ़ती है। - प्रेम और सत्य का मार्ग चुनें:
दुनिया के हर इंसान से बिना किसी भेदभाव के प्रेम करें और जीवन में हमेशा सत्य (सच) के रास्ते पर चलें।
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