सिख विवाह में क्यों लिए जाते हैं चार फेरे, क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व

Kaushiki | May 08, 2025, 16:18 IST
सिख विवाह परंपरा
सिख समुदाय में विवाह के दौरान चार फेरे लिए जाते हैं, जिनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। पहले तीन फेरों में जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं की शिक्षा दी जाती है।

हिंदू विवाह में सात फेरे महत्वपूर्ण होते हैं। यह माना जाता है कि यह सात जन्मों का साथ देता है। लेकिन, भारत के कुछ स्थानों और खास समुदायों में यह परंपरा कुछ अलग होती है।



मान्याता के मुताबिक, सिख समुदाय और राजस्थान के कुछ राजपूत घरानों में 7 की जगह केवल 4 फेरे लिए जाते हैं। इस परंपरा का अपना ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। आइए जानें



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सिख समुदाय में चार फेरे

सिख समुदाय की शादी में चार फेरे लिए जाते हैं और यह परंपरा एक गहरे धार्मिक संदेश से जुड़ी हुई है। इन चार फेरों का महत्व और उनका उद्देश्य अलग-अलग होता है:



  • पहला फेरा: धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है, और यह बताता है कि वैवाहिक जीवन में धर्म से कभी समझौता नहीं करना चाहिए।
  • दूसरा फेरा: सीमित धन में खुश रहने और ज्ञान की महत्वता को समझाता है।
  • तीसरा फेरा: काम से अवगत कराता है, यानी कर्म की सच्चाई को समझाने का प्रयास करता है।
  • चौथा फेरा: मोक्ष की प्राप्ति का संदेश देता है, जो जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य की ओर मार्गदर्शन करता है।

गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चार फेरे

सिख समुदाय में विवाह के दौरान दूल्हा और दुल्हन गुरु ग्रंथ साहिब के चारों ओर चार फेरे लेते हैं, जिसमें पहले तीन फेरों में दुल्हन अग्रणी होती है और चौथे फेरे में दूल्हा अग्रणी होता है। यह एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाता है, जो विवाह को केवल सांसारिक नहीं बल्कि धार्मिक और जीवनोपयोगी बनाता है।



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सिख धर्म में शादी के रीति-रिवाज

सिख धर्म में आनंद कारज से पहले दूल्हा और दुल्हन अपने-अपने घरों में तैयार होते हैं। दूल्हा पारंपरिक शेरवानी या कुर्ता जैकेट सेट पहनता है, जबकि दुल्हन लहंगा या सूट पहनती है।



इसके बाद दूल्हा अपनी बारात लेकर गुरुद्वारा पहुंचता है, जहां दुल्हन का परिवार उसका स्वागत करता है। फिर वरमाला (माला बदली) का आदान-प्रदान किया जाता है।



इसके बाद दूल्हा और दुल्हन गुरुग्रंथ साहिब के सामने बैठते हैं और रागी द्वारा गाए गए लावां फेरे के गीत सुनते हैं। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन चार फेरे लेते हैं, जिनमें से चौथे फेरे में मोक्ष की प्राप्ति की बात की जाती है।



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राजस्थान के राजपूत घरानों में चार फेरे

राजस्थान के कुछ राजपूत घरानों में भी 7 की जगह 4 फेरे लेने की परंपरा है। इसके पीछे एक प्रचलित कथा है...



विवाह में 4 फेरे लेने का महत्व

चार फेरे लेने का उद्देश्य विवाह को एक आध्यात्मिक और कार्यात्मक रूप से जोड़ना है। इस परंपरा में मुख्य रूप से ध्यान धर्म, ज्ञान, काम और मोक्ष पर केंद्रित होता है, जो जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाता है।



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