सोमवती अमावस्या के साथ समाप्त होगा अधिक मास, 19 जून से शुरू होंगे मांगलिक कार्य

Kaushiki | Jun 10, 2026, 13:31 IST
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जून 2026 में धार्मिक और सामाजिक नजरिए से कई बड़े संयोग बन रहे हैं। सोमवती अमावस्या 15 जून के साथ अधिकमास समाप्त होगा। इसके बाद 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ महीना शुरू होगा और 19 जून से शादियों के शुभ मुहूर्त फिर से शुरू हो जाएंगे।

Jyeshtha Month 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक, साल 2026 का ज्येष्ठ महीना धार्मिक रूप से बड़ा बदलाव लेकर आ रहा है। इस साल दो ज्येष्ठ मास होने की वजह से ये पूरा महीना 59 दिनों का हो गया है।



इसमें तीन साल में एक बार आने वाला दुर्लभ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी शामिल है। अब अधिक मास का समापन होने जा रहा है, जो अपने साथ कई शुभ और मांगलिक योग लेकर आ रहा है।



आगामी 15 जून से 19 जून के बीच मात्र पांच दिनों के भीतर चार बड़े धार्मिक संयोग बनने जा रहे हैं। इस दौरान जहां एक तरफ पूजा-पाठ, पवित्र स्नान और दान का महापुण्य मिलेगा।



वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से बंद पड़े शादी और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर लगा ब्रेक भी हट जाएगा। आइए जानते हैं कि इस महीने कौन से बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।



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कब खत्म हो रहा है अधिक मास

भगवान विष्णु को समर्पित अधिकमास अब अपने अंतिम चरण में है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस बार अधिकमास की शुरुआत 17 मई को हुई थी। अब 15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या के साथ इसका समापन होने जा रहा है।



सोमवार (ज्येष्ठ अमावस्या)पूजा विधि 15 जून को अधिक मास का आखिरी दिन है। इसी दिन सोमवती अमावस्या का महासंयोग भी बन रहा है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का बहुत बड़ा महत्व होता है। पितरों के तर्पण के लिए भी ये दिन बहुत अच्छा माना गया है।



शुद्ध ज्येष्ठ मास कब से शुरू होगा

हिंदू पंचांग के मुताबिक, अधिकमास के समाप्त होते ही अगले दिन से नया दौर शुरू होगा। मंगलवार 16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो जाएगी। विद्वानों के मुताबिक, शुद्ध मास ही वास्तविक चंद्र मास होता है जो सूर्य की चाल पर आधारित होता है।



शुद्ध ज्येष्ठ मास में कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। 15 जून को सोमवती अमावस्या के बाद 17 जून को रंभा तृतीया है। फिर 18 जून को विनायकी चतुर्थी और 23 जून को महेश नवमी मनाई जाएगी।



25 जून को एकादशी और 29 जून को पूर्णिमा होगी। सोमवार 29 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यानी 15 दिनों के भीतर श्रद्धालुओं को दो बार सोमवार के दिन पवित्र स्नान करने का मौका मिलेगा।



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कौन-कौन से शुभ कार्य हो सकेंगे

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, अधिकमास के कारण पिछले कई दिनों से शादियों पर रोक लगी हुई थी। अब भक्तों का यह इंतजार खत्म होने वाला है। आगामी 19 जून से फिर से शहनाइयों की गूंज सुनाई देगी। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।



शादियों के अलावा लोग मुंडन और उपनयन संस्कार भी कर सकेंगे। गृह प्रवेश, नामकरण और नए व्यापार की शुरुआत के लिए भी यह समय बहुत शुभ है। अगर आप शादी या गृह प्रवेश की सोच रहे हैं, तो जल्दी कीजिए।



विवाह और अन्य शुभ कार्यों के मुहूर्त केवल 12 जुलाई तक ही हैं। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। चातुर्मास लगते ही चार महीनों के लिए शादियां फिर बंद हो जाएंगी।



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परमा एकादशी कब और क्यों है खास

अधिकमास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहते हैं। ये एकादशी 11 जून को पड़ रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, ये एकादशी तीन साल में एक बार आती है। इसलिए इसका महत्व आम एकादशियों से तीन गुना ज्यादा होता है।



इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 11 जून को रात 12 बजकर 57 मिनट पर होगी। ये तिथि 11 जून की रात 10 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के मुताबिक, व्रत गुरुवार 11 जून को ही रखा जाएगा।



ज्योतिषियों के मुताबिक, इस बार परमा एकादशी पर चार बड़े शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग, रवि योग, सिद्धि योग और शिव योग का महासंयोग है। इन योगों में पूजा करने से हजार गुना अधिक पुण्य मिलता है।



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परमा एकादशी की पौराणिक कथा क्या है

पौराणिक कथा के मुताबिक, काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम के गरीब ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम पवित्रा था। वे दोनों बहुत गरीब थे, लेकिन धर्म मार्ग पर टिके रहे। एक बार उनके घर कौण्डिन्य ऋषि आए और उन्होंने यह व्रत रखने की सलाह दी।



सुमेधा और पवित्रा ने पूरे नियम के साथ परमा एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से एक राजकुमार ने उन्हें एक सुंदर महल और गांव दान में दे दिया। उनकी गरीबी दूर हो गई और अंत में उन्हें विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।



ऋषि कौण्डिन्य ने बताया कि इस व्रत की महिमा अपरंपार है। धनराज कुबेर ने इसी व्रत को करके देवताओं के कोषाध्यक्ष का पद पाया था। राजा हरिश्चंद्र ने भी अपने सबसे कठिन समय में यह व्रत रखकर अपना खोया हुआ राजपाठ वापस पाया था।



डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQ

  1. ज्येष्ठ मास 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य कब से शुरू होंगे और कब तक चलेंगे?
    ज्येष्ठ मास 2026 में अधिकमास समाप्त होने के बाद 19 जून से विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नामकरण जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। विवाह के ये शुभ मुहूर्त केवल 12 जुलाई 2026 तक ही उपलब्ध रहेंगे। इसके बाद 25 जुलाई से चातुर्मास शुरू होने के कारण अगले चार महीनों के लिए शादियों और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
  2. परमा एकादशी 2026 के दिन बनने वाले शुभ योग कौन से हैं?
    परमा एकादशी का व्रत गुरुवार 11 जून 2026 को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 11 जून को मध्यरात्रि 12:57 बजे से शुरू होकर उसी रात 10:36 बजे समाप्त होगी। इस बार परमा एकादशी पर सर्वार्थसिद्धि योग, रवि योग, सिद्धि योग और शिव योग का दुर्लभ महासंयोग बन रहा है।
  3. साल 2026 में दो ज्येष्ठ माह होने का क्या कारण है?
    साल 2026 में हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, अतिरिक्त चंद्र मास जोड़े जाने के कारण दो ज्येष्ठ माह (अधिकमास सहित) का संयोग बना है। इससे यह महीना कुल 59 दिनों का हो गया है। इसकी शुरुआत 2 मई को हुई थी। इस विशेष अवधि में तीन साल बाद पुरुषोत्तम मास आया है। इस पूरे 59 दिनों के चक्र का अंतिम समापन 29 जून 2026 को सोमवार और पूर्णिमा के दुर्लभ संयोग के साथ होगा।

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