इस मंदिर में महिलाएं पीरियड्स में भी करती हैं पूजा, गर्भगृह में पुरुषों का प्रवेश वर्जित

Anjali Dwivedi | May 02, 2026, 19:14 IST
linga bhairavi temple woman priest worship
तमिलनाडु के कोयंबटूर के लिंग भैरवी मंदिर में सदियों पुरानी परंपराएं टूट रही हैं। यहां महिला पुजारी ही गर्भगृह संभालती हैं और मासिक धर्म के दौरान भी महिलाओं को पूजा करने की अनुमति है।

हमारे देश में मंदिर और धार्मिक परंपराएं सदियों से पुरुष प्रधान रही हैं। अधिकांश मंदिरों में पुजारी के रूप में केवल पुरुषों की नियुक्ति होती है और महिलाओं के लिए कई कड़े नियम बनाए गए हैं। यहां तक कि पीरियड्स के दौरान महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित माना जाता है।



लेकिन तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक ऐसा मंदिर है, जिसने इन रूढ़ियों को तोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। यह है लिंग भैरवी मंदिर, जहां नारी शक्ति का एक अद्भुत रूप देखने को मिलता है।



स्त्री ऊर्जा का एक शक्तिशाली रूप

कोयंबटूर (coimbatore) स्थित ईशा फाउंडेशन सेंटर परिसर के अंदर सद्गुरु द्वारा स्थापित लिंग भैरवी मंदिर अपनी तरह का इकलौता स्थान है। साल 2010 में स्थापित यह मंदिर देवी के एक अत्यंत उग्र लेकिन करुणामय रूप को समर्पित है।



यहां देवी को लिंग के रूप में पूजा जाता है, जो स्त्री ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पूरा प्रबंधन और पूजा-पाठ महिला पुजारियों द्वारा ही किया जाता है।



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पीरियड्स में भी पूजा की अनुमति

लिंग भैरवी मंदिर को भारत के सबसे विशिष्ट मंदिरों में से एक माना जाता है। जहां देश के कई हिस्सों में पीरियड्स के दौरान महिलाओं को अछूत मानकर धार्मिक कार्यों से दूर रखा जाता है। वहीं इस मंदिर में महिलाएं इन पारंपरिक बंधनों से पूरी तरह मुक्त हैं।



सद्गुरु जग्गी वासुदेव की सोच पर आधारित इस मंदिर में महिलाओं को पीरियड्स के दौरान भी गर्भगृह में प्रवेश करने और अनुष्ठान करने की पूरी अनुमति है।



पुरुषों का प्रवेश है वर्जित

इस मंदिर का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि यहां भक्त के रूप में पुरुष और महिला दोनों का स्वागत है, लेकिन गर्भगृह के भीतर केवल महिलाओं को ही जाने की अनुमति दी गई है।



मंदिर में उपाशिका कही जाने वाली महिला पुजारी ही देवी की सेवा करती हैं। यह व्यवस्था उन सामाजिक मान्यताओं को सीधी चुनौती देती है, जो धार्मिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी को सीमित करती हैं।



कौन हैं मां लिंग भैरवी?

भैरवी का अर्थ है विस्मयकारी। पुराणों के मुताबिक, वे दस महाविद्याओं में से एक और भगवान भैरव की सहचरी हैं। लिंग भैरवी स्तुति में उनके 33 शुभ नामों का वर्णन है, जिसमें उन्हें स्वधारिणी, नागेश्वरी और सर्व जननी कहा गया है। यह मंदिर शारीरिक स्थिरता और सांसारिक समृद्धि के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।



समानता और सशक्तिकरण का केंद्र

ईशा फाउंडेशन की उपाशिका मां निर्मला के अनुसार, इस पूरे सिद्धांत का उद्देश्य महिलाओं को आध्यात्मिक मार्ग पर बराबरी का स्थान देना है। यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का एक जीवंत उदाहरण भी है, जहां प्रकृति के चक्र को बाधा नहीं बल्कि जीवन के एक अनिवार्य हिस्से के रूप में स्वीकार किया गया है।



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