17 मई से शुरू होगा अधिकमास, बुद्ध पूर्णिमा से बड़ा मंगल तक, जानें May 2026 Vrat Tyohar
May 2026 Vrat Tyohar: मई 2026 का महीना धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। इस महीने की शुरुआत बुद्ध पूर्णिमा के पर्व से होगी। वहीं मध्य में वट सावित्री और शनि जयंती का बड़ा संयोग बनेगा।
इस साल मई 2026 में ज्येष्ठ और अधिकमास का मिलन हो रहा है। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। गंगा दशहरा से लेकर पद्मिनी एकादशी तक, यह पूरा महीना व्रत-त्योहारों से सजा है। साथ ही, मंगल और सूर्य जैसे बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े बदलाव लेकर आएगा। आइए जानें मई 2026 के बड़े व्रत....
मई 2026 के व्रत और त्योहार
- 1 मई (शुक्रवार): बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती
इस पावन दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था और विष्णु जी ने कूर्म अवतार लिया था। इसे वैशाख पूर्णिमा भी कहते हैं, जिसमें पवित्र नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। साथ ही इस दिन चण्डिका जयंती और चित्रा पूर्णिमा भी मनाई जाएगी। - 2 मई (शनिवार): नारद जयंती और ज्येष्ठ माह की शुरुआत
देवर्षि नारद की जयंती के साथ ही हिंदू कैलेंडर के ज्येष्ठ माह प्रारंभ हो रही है। नारद मुनि को देवताओं का संदेशवाहक और संगीत का ज्ञाता माना जाता है। इस दिन से गर्मी का प्रभाव बढ़ता है, इसलिए जल दान करना शुभ होता है। - 5 मई (मंगलवार): एकदंत संकष्टी चतुर्थी, पहला बड़ा मंगल
ये दिन भगवान गणेश को समर्पित है, जिन्हें संकटों को दूर करने वाला देवता कहा जाता है। भक्त अपने दुखों के नाश और सुख-शांति के लिए इस दिन व्रत और पूजा करते हैं। मंगलवार होने से इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी विशेष संयोग रहेगा। - 9 मई (शनिवार): कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा के लिए कालाष्टमी का दिन बहुत खास माना जाता है। साथ ही, हर महीने आने वाली कृष्ण जन्माष्टमी भी इसी दिन मनाई जाएगी। भक्त रात के समय भगवान कृष्ण और भैरव बाबा की विशेष साधना करते हैं। - 12 मई (मंगलवार): तेलुगु हनुमान जयंती, दूसरा बड़ा मंगल
दक्षिण भारत में, विशेषकर तेलुगु राज्यों में, इस दिन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और मंदिरों में भव्य अभिषेक का आयोजन होता है। यह दिन साहस और शक्ति के संचय के लिए सबसे उत्तम माना गया है। - 13 मई (बुधवार): अपरा एकादशी और कृष्ण परशुराम द्वादशी
अपरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को अपार पुण्य मिलता है और उसके पापों का नाश होता है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की द्वादशी तिथि भी मनाई जाती है। इस दिन विष्णु जी के वामन और परशुराम स्वरूप की पूजा की जाती है। - 14 मई (गुरुवार): गुरु प्रदोष व्रत
भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत जब गुरुवार के दिन आता है, तो इसे गुरु प्रदोष कहते हैं। इस दिन व्रत रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है। शाम के समय शिव परिवार की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है। - 15 मई (शुक्रवार): वृषभ संक्रांति और मासिक शिवरात्रि
सूर्य देव जब मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे वृषभ संक्रांति कहते हैं। इसी दिन मासिक शिवरात्रि भी है, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक मानी जाती है। भक्त इस दिन पितृ तर्पण और रात्रि में महादेव का अभिषेक करते हैं। - 16 मई (शनिवार): वट सावित्री व्रत और शनि जयंती
सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इसी दिन शनि देव का जन्म उत्सव भी है, जिससे शनि दोष से मुक्ति पाने का बड़ा मौका मिलता है। यह ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि पितरों के श्राद्ध के लिए भी मुख्य है। - 17 मई (रविवार): अधिक चंद्र दर्शन, अधिकमास शुरू
अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कारण इस दिन नए चंद्रमा के दर्शन करना बेहद शुभ माना गया है। चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है, इसलिए उनके दर्शन से मानसिक शांति प्राप्त होती है। भक्त इस दिन शाम के समय अर्घ्य देकर शुभ फलों की प्रार्थना करते हैं। - 18 मई (सोमवार): रोहिणी व्रत
जैन समुदाय और सनातन धर्म में रोहिणी नक्षत्र के दिन यह व्रत विशेष रूप से रखा जाता है। इस दिन नक्षत्र देव की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। महिलाएं अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए यह व्रत करती हैं।
- 19 मई (मंगलवार): तीसरा बड़ा मंगल
- हिंदू धर्म में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही प्रभु श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी।
- 20 मई (बुधवार): वरदा चतुर्थी
इस चतुर्थी को भगवान गणेश की कृपा पाने और मनोकामनाएं पूरी करने वाली तिथि माना जाता है। भक्त 'वरद' विनायक की पूजा कर अपनी बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि की प्रार्थना करते हैं। इस दिन गणेश जी को मोदक और दूर्वा चढ़ाने से विघ्न दूर होते हैं। - 21 मई (गुरुवार): अधिक स्कन्द षष्ठी
भगवान कार्तिकेय (स्कन्द) को समर्पित यह तिथि अधिकमास के कारण बहुत ही फलदायी मानी गई है। भक्त संतान की रक्षा और शत्रुओं पर जीत के लिए भगवान शिव के बड़े पुत्र की पूजा करते हैं। दक्षिण भारत में इस दिन मुरुगन मंदिरों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। - 23 मई (शनिवार): अधिक मासिक दुर्गाष्टमी
हर महीने आने वाली शुक्ल पक्ष की अष्टमी को देवी दुर्गा की शक्ति की पूजा की जाती है। अधिकमास में पड़ने वाली यह अष्टमी मां भगवती की विशेष कृपा पाने के लिए सबसे श्रेष्ठ है। भक्त इस दिन कन्या पूजन और दुर्गा चालीसा का पाठ कर आशीर्वाद लेते हैं। - 25 मई (सोमवार): गंगा दशहरा
राजा भगीरथ की तपस्या के बाद इसी दिन मां गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था। पवित्र नदियों में स्नान करने से दस प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है। गंगा दशहरा पर दान करने का महत्व किसी भी अन्य तीर्थ से कहीं अधिक माना गया है। - 25 मई (मंगलवार): चौथा बड़ा मंगल
- हिंदू धर्म में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही प्रभु श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी।
- 27 मई (बुधवार): पद्मिनी एकादशी (अधिकमास)
पुरुषोत्तम मास की इस एकादशी को बहुत ही दुर्लभ और सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला माना गया है। भगवान विष्णु की भक्ति के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है और इसका फल कई हजार साल की तपस्या के बराबर है। भक्त इस दिन जागरण और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। - 28 मई (बृहस्पतिवार): गुरु प्रदोष व्रत (अधिकमास)
मई महीने का यह दूसरा प्रदोष व्रत है जो अधिकमास के पावन समय में पड़ रहा है। भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा से गृहस्थ जीवन की सभी समस्याएं समाप्त होती हैं। गुरुवार का दिन होने के कारण यह आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी है। - 30 मई (शनिवार): अधिक पूर्णिमा व्रत
अधिकमास की पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनना और दान करना बहुत पुण्यकारी है। इस दिन पवित्र सरोवर में स्नान करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है। भक्त रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण करते हैं। - 31 मई (रविवार): ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा
यह मई महीने का आखिरी दिन है और अधिकमास की पूर्णिमा तिथि का समापन भी है। इस दिन किए गए धर्म-कर्म और जप का फल सीधे भगवान विष्णु तक पहुंचता है। भक्त इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और पितरों का स्मरण करते हैं।
अधिकमास का आगमन
हिंदू पंचांग के मुताबिक, साल 2026 का मई महीना आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहने वाला है। इस दौरान अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का आगमन हो रहा है।
सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच संतुलन बनाने के लिए हर तीन साल में आने वाला यह अतिरिक्त महीना 17 मई से शुरू होगा। पंचांग के मुताबिक ये 17 मई 2026, रविवार से शुरू होकर 15 जून 2026, सोमवार तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, अधिकमास पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित है। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यद्यपि इस समय में विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन दान, जप, और तप के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है।
मई महीने में ग्रहों की चाल
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, मई का महीना ज्योतिष की दृष्टि से भी बहुत खास है। महीने में कई बड़े ग्रह अपनी राशि और नक्षत्र बदलेंगे। इन बदलावों का सभी 12 राशियों पर गहरा असर पड़ेगा। ग्रहों की यह स्थिति करियर और आर्थिक पक्ष को प्रभावित करेगी। आइए जानें...
- 6 मई 2026 - यम ग्रह की वक्री चाल
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, इस दिन यम ग्रह अपनी चाल बदलकर वक्री अवस्था में आ जाएंगे। ग्रहों की वक्री चाल का असर वैश्विक स्तर पर बड़े बदलावों और दूरगामी परिणामों के रूप में देखा जाता है। यह समय आत्म-मंथन और पुराने निर्णयों पर पुनर्विचार करने के लिए काफी अहम माना जाता है। - 7 मई 2026 - बुध का भरणी नक्षत्र में प्रवेश
बुद्धि और तर्क के कारक बुध देव इस दिन भरणी नक्षत्र में गोचर करेंगे, जिसका स्वामी शुक्र है। इस गोचर के प्रभाव से लोगों की रचनात्मक क्षमता और कलात्मक कार्यों में रुचि काफी बढ़ जाएगी। व्यापारियों और संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह बदलाव नए अवसर लेकर आ सकता है। - 8 मई 2026 - शुक्र का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर
सुख और ऐश्वर्य के देवता शुक्र देव इस दिन मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस नक्षत्र में शुक्र का होना प्रेम संबंधों और भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए बहुत सुखद माना जाता है। इस दौरान लोग अपनी सुख-शांति और मनोरंजन पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे। - 11 मई 2026 - मंगल का मेष राशि में गोचर
साहस और ऊर्जा के प्रतीक मंगल देव अपनी स्वराशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिससे उनकी शक्ति बढ़ जाएगी। यह गोचर लोगों में आत्मविश्वास, ऊर्जा और काम करने के प्रति एक नया जोश पैदा करेगा। खिलाड़ियों और सैन्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। - 11 मई 2026 - सूर्य का कृत्तिका नक्षत्र में गोचर
सूर्य देव इस दिन अपने स्वयं के नक्षत्र कृत्तिका में प्रवेश करेंगे, जिससे उनका प्रभाव और अधिक प्रखर हो जाएगा। यह गोचर प्रशासनिक कार्यों में सफलता और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला साबित होता है। इस दौरान लोगों के नेतृत्व करने की क्षमता में काफी निखार देखने को मिलेगा। - 13 मई 2026 - बुध का कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश
बुध ग्रह इस दिन सूर्य के नक्षत्र कृत्तिका में गोचर करेंगे, जिससे वाणी में स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी। यह समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बहुत ही शुभ रहने वाला है। बौद्धिक कार्यों में तेजी आएगी और अटके हुए काम पूरे होने लगेंगे। - 14 मई 2026 - शुक्र का मिथुन राशि में गोचर
लक्जरी और रोमांस के कारक शुक्र देव वृषभ से निकलकर बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करेंगे। इस गोचर के प्रभाव से सामाजिक मेलजोल बढ़ेगा और लोग नए मित्र बनाने में रुचि दिखाएंगे। संचार और मीडिया के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह एक शानदार समय होगा। - 15 मई 2026 - बुध का वृषभ राशि में प्रवेश
बुध ग्रह अपनी चाल बदलते हुए इस दिन वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे, जो कि उनके मित्र शुक्र की राशि है। इस बदलाव से आर्थिक योजनाएं सफल होंगी और निवेश के मामलों में स्थिरता आने की संभावना रहेगी। बोलचाल में मधुरता आएगी जिससे रिश्तों में काफी सुधार देखने को मिल सकता है। - 15 मई 2026 - सूर्य का वृषभ राशि में गोचर (वृषभ संक्रांति)
सूर्य देव अपनी राशि बदलकर वृषभ में प्रवेश करेंगे, जिसे हिंदू धर्म में वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य का प्रभाव पृथ्वी पर बढ़ जाता है और यह समय धार्मिक दान-पुण्य के लिए उत्तम है। इस गोचर के साथ ही ज्येष्ठ महीने की गर्मी का असली प्रभाव शुरू होता है। - 15 मई 2026 - शनि का रेवती नक्षत्र में गोचर
न्याय के देवता शनि देव इस दिन बुध के नक्षत्र रेवती में गोचर करेंगे, जो कि उनकी चाल में बड़ा बदलाव है। शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन लोगों को आध्यात्मिक कार्यों और समाज सेवा की ओर प्रेरित करेगा। यह गोचर कर्मों के अनुसार उचित फल और न्याय दिलाने वाला साबित होगा। - 19 मई 2026 - बुध का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश
बुध देव इस दिन चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करेंगे, जिसे बहुत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। इस गोचर से कृषि और व्यापार के क्षेत्र में बड़ी उन्नति और सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। लोगों की कल्पनाशीलता बढ़ेगी और मानसिक रूप से शांति का अनुभव होगा। - 25 मई 2026 - बुध का मृगशिरा नक्षत्र में गोचर
बुध ग्रह मंगल के स्वामित्व वाले मृगशिरा नक्षत्र में गोचर करेंगे, जिससे तर्कशक्ति और साहस का मेल होगा। इस दौरान तकनीकी और रिसर्च के कार्यों में बड़ी सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। लोग नई चीजें सीखने और यात्राएं करने के लिए काफी उत्साहित नजर आएंगे। - 29 मई 2026 - मंगल का भरणी नक्षत्र में गोचर
ऊर्जावान मंगल देव इस दिन शुक्र के भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे इच्छाशक्ति में वृद्धि होगी। यह समय जमीन-जायदाद से जुड़े निवेश करने के लिए बहुत ही सक्रिय और लाभकारी साबित हो सकता है। युवाओं में अपने लक्ष्यों को पाने के लिए एक अलग ही जुनून देखने को मिलेगा। - 29 मई 2026 - बुध का मिथुन राशि में प्रवेश
बुध देव अपनी स्वराशि मिथुन में गोचर करेंगे, जहां वे बहुत अधिक शक्तिशाली और शुभ फल देने वाले होते हैं। इस दौरान संचार के साधन, लेखन और गणितीय कार्यों में जबरदस्त प्रगति देखने को मिलेगी। यह समय नई डील साइन करने और व्यापार विस्तार के लिए सर्वश्रेष्ठ है। - 31 मई 2026 - शुक्र का पुनर्वसु नक्षत्र में गोचर
मई महीने के अंतिम दिन शुक्र देव गुरु के नक्षत्र पुनर्वसु में प्रवेश करेंगे, जो कि अत्यंत शुभ माना जाता है। यह गोचर पारिवारिक जीवन में सुख-शांति और धार्मिक कार्यों के प्रति रुचि बढ़ाने वाला होगा। लोग अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताएंगे और मन प्रसन्न रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
ये खबरें भी पढ़ें....
प्रकृति की गोद में बसा देवी का मंदिर, आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का संगम, नौ दिन, नौ देवियां
पूजा की थाली से लेकर मन की शांति तक, जानें कपूर जलाने के फायदे
घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए कपूर आरती के साथ शामिल करें ये चीज, नेगेटिव एनर्जी रहेगी दूर