बैसाखी से पोहला बैशाख तक, देखें मेष संक्रांति पर भारत के अलग-अलग राज्यों में नववर्ष के रंग

Kaushiki | Apr 07, 2026, 12:34 IST
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आज 14 अप्रैल को मेष संक्रांति है। सूर्य के राशि परिवर्तन से बैसाखी, विशु और बिहू जैसे पर्व मनाए जाएंगे। इस दिन दान-पुण्य और सूर्य पूजा का विशेष महत्व है।

Mesh Sankranti 2026: भारत देश अपनी विविधताओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां हर प्रदेश का अपना अलग अंदाज और अपनी परंपराएं हैं। मेष संक्रांति एक ऐसा ही समय है जब पूरा देश उत्सव मनाता है। आज 14 अप्रैल को सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करने वाले हैं।



इस खगोलीय घटना को ही मेष संक्रांति के रूप में जाना जाता है। इस दिन से सौर वर्ष का नया महीना शुरू होता है। यह पर्व हमें एक-दूसरे के करीब लाने का काम करता है। यह एकता और भाईचारे का सबसे बड़ा उदाहरण है। आइए जानें...



Mesh Sankranti


विभिन्न राज्यों में नववर्ष के अलग-अलग रंग

  • पंजाब और हरियाणा (बैसाखी का पर्व): यहां इसे रबी की फसल कटने की खुशी और सिख खालसा पंथ की स्थापना के उत्सव के रूप में मनाते हैं।
  • पश्चिम बंगाल (पोहला बैशाख): बंगाली समुदाय इसे अपने नए साल के रूप में मनाता है। इसमें नए कपड़े पहनकर और लक्ष्मी-गणेश की पूजा कर खुशियां मनाते हैं।
  • केरल (विशु): यहां इसे मलयाली नववर्ष के रूप में मनाते हैं। यहां लोग सुबह-सुबह विशु कानी (भगवान कृष्ण और शुभ चीजों के दर्शन) देखते हैं।
  • असम (बोहाग बिहू): असमिया समाज इसे फसल उत्सव और नए साल के रूप में मनाता है। इसमें पारंपरिक बिहू नृत्य और पकवानों की धूम होती है।
  • तमिलनाडु (पुथन्डु): तमिल समाज इसे अपने सौर नववर्ष के तौर पर मनाता है और घर के बाहर खूबसूरत कोलम रंगोली सजाकर खुशियां मनाता है।
  • ओडिशा (पणा संक्रांति): ओडिया समाज इसे हनुमान जी के जन्मोत्सव और नए साल के रूप में मनाता है, जहां खास पणा (शरबत) का वितरण होता है।
  • बिहार और झारखंड (सत्तूआनी): यहां इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। यहां लोग सत्तू और गुड़ खाकर गर्मी के आगमन का स्वागत करते हैं।
  • मध्य प्रदेश (मेष संक्रांति): एमपी में इसे दान-पुण्य का दिन माना जाता है। यहां लोग नदियों में स्नान कर सूर्य देव को जल और सत्तू का दान करते हैं।
  • उत्तराखंड (बिखोती): कुमाऊं और गढ़वाल में इसे फसल उत्सव के रूप में मनाया जाता है, जिसमें मेलों का आयोजन और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं।
  • उत्तर प्रदेश (सतुआ संक्रांति): यूपी में इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है और सत्तू, घड़ा व पंखा दान करना बेहद शुभ माना जाता है।

14 अप्रैल को सूर्य का राशि परिवर्तन

खगोलशास्त्र के मुताबिक, सूर्य इस दिन अपनी आधी यात्रा पूरी करते हैं। मेष संक्रांति (सूर्य का मेष में गोचर) से ही हिंदू कैलेंडर का वैशाख महीना शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य का मेष राशि में आना बहुत शुभ फलदायी होता है।



इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। लोग नदियों में स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और पंचांग पठन का आयोजन होता है। यह पर्व प्रकृति और कृषि से भी गहराई से जुड़ा है।



मेष संक्रांति पर क्या करें

  • सुबह जल्दी उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • इस दिन सत्तू, गुड़ और ठंडे पानी का दान करें।
  • नए पंचांग का पूजन कर साल की गणना सुनें।
  • जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र का दान करना चाहिए।
  • घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली (कोलम) बनाएं।

मेष संक्रांति पर क्या न करें

  • इस दिन पर घर में क्लेश न करें।
  • तामसिक भोजन और नशीली चीजों से दूर रहें।
  • किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से बचें।
  • दिन के समय सोने से परहेज करना चाहिए।
  • घर में गंदगी या कबाड़ जमा न रहने दें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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