721 साल बाद पहली बार धार भोजशाला में होगी महाआरती, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Kaushiki | May 22, 2026, 12:56 IST
Dhar Bhojshala
आज शुक्रवार (22 मई) को मध्य प्रदेश के धार भोजशाला में 721 साल बाद मां सरस्वती की अखंड पूजा और महाआरती की जाएगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यहां शुक्रवार को नमाज पर रोक लगा दी गई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना है।
  • कोर्ट के आदेश के बाद अब शुक्रवार को होने वाली नमाज पर पूरी तरह रोक लग गई है।
  • करीब 721 साल बाद आज (22 मई) शुक्रवार के दिन हिंदुओं को परिसर में प्रवेश मिला है।
  • आज गर्भगृह में मां सरस्वती की प्रतीकात्मक मूर्ति रखकर महाआरती और पूजा की जाएगी।
  • मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
721 साल बाद धार का पहला 'शुक्रवार'... भोजशाला में वाग्देवी के जयकारे, अखंड पूजा और महाआरती - dhar b


Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार जिले से आज (22 मई) एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। यहां के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में वर्षों पुराना इतिहास बदल गया है। इस शुक्रवार (22 मई) को वहां एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद यहां पहला शुक्रवार बहुत खास है।



परिसर में सुबह से ही हिंदू श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी है। इतिहास में 721 साल बाद ऐसा हुआ जब आज शुक्रवार को यहां पूजा हुई और अब यहां महाआरती का आयोजन भी होने वाली है। लोग यहां सुबह से ही मां वाग्देवी के जयकारे लगा रहे हैं।



धार भोजशाला: 721 साल बाद भोजशाला में गूंजेंगे मां वाग्देवी के जयकारे, शुक्रवार को पहली बार होगी महा


गर्भगृह में महाआरती के क्या इंतजाम हैं

भोजशाला के गर्भगृह को आज फूलों से बहुत सुंदर तरीके से सजाया गया। हिंदू पक्ष ने वहां मां सरस्वती की एक प्रतीकात्मक मूर्ति स्थापित की। इसके बाद पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान शुरू हुए। यहां आज लगभग एक बजे महाआरती का आयोजन होने वाली है।



इस ऐतिहासिक बदलाव को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। भोजशाला और उसके आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी भी तरह की अफवाह या गड़बड़ी रोकने के पुख्ता इंतजाम हैं।



श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा घेरा कड़ा रखा गया है। पुलिस के बड़े अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहकर स्थिति संभाल रहे हैं। पूजा शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है।



परिसर के बाहर लगा एक पुराना बोर्ड भी अब हटा दिया गया है। उस बोर्ड पर लिखा था कि शुक्रवार को हिंदुओं का प्रवेश बंद है। अब उस जगह पर मां वाग्देवी के जयकारे गूंज रहे हैं।



भोजशाला: वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहली बार 'अखंड पूजा', 1500 जवान और ड्रोन तैनात - dhar bho


एमपी की भोजशाला का इतिहास

इतिहास के पन्नों को पलटें तो यह कहानी 11वीं सदी से शुरू होती है। उस समय परमार वंश के राजा भोज धार पर राज करते थे। उन्होंने ही धार को अपनी राजधानी बनाया था।



राजा भोज ने यहां एक बहुत बड़ा संस्कृत विद्यापीठ बनवाया था। इसी परिसर में मां सरस्वती का एक भव्य मंदिर भी स्थापित किया गया। इसके बाद ही इस जगह का नाम भोजशाला पड़ा था।



प्राचीन समय में यहां देश-विदेश से लोग वेद पढ़ने आते थे। यहां व्याकरण, दर्शन और संस्कृत की उच्च शिक्षा दी जाती थी। कई पुराने डाक्यूमेंट्स में भी इस बात के पुख्ता सबूत मिलते हैं।



धार भोजशाला: 721 साल बाद भोजशाला में गूंजेंगे मां वाग्देवी के जयकारे, शुक्रवार को पहली बार होगी महा


कमाल मौला मस्जिद बनने की पूरी कहानी क्या है

इतिहासकारों के मुताबिक, साल 1305 में मालवा पर मुस्लिम आक्रमण हुआ था। उस समय दिल्ली में अलाउद्दीन खिलजी का शासन काल चल रहा था। इस हमले में मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया गया।



इसके बाद साल 1514 में महमूद शाह खिलजी द्वितीय ने इसे बदला। उसने मंदिर के हिस्सों को तोड़कर मस्जिदनुमा ढांचा खड़ा करने की कोशिश की। परिसर के ठीक बाहर एक मकबरा भी बनवाया गया।



बाद में यह जगह सूफी संत कमाल मौला के नाम से जुड़ गई। इसी वजह से मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता आ रहा है। हालांकि, हिंदू पक्ष इसे हमेशा अपना मंदिर ही मानता रहा।



धार भोजशाला का बदला इतिहास, वाग्देवी की आरती में उमड़े श्रद्धालु; सुरक्षा के खास इंतजाम | madhya pr


अंग्रेजों के जमाने से लेकर साल 2003 तक क्या व्यवस्था थी

ब्रिटिश शासन काल में इस जगह को एक संरक्षित स्मारक घोषित किया गया। साल 1902 में पहली बार सरकारी कागजों में 'भोजशाला' नाम सामने आया था। इसके बाद से ही विवाद धीरे-धीरे बढ़ता गया।



साल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई ने एक नई व्यवस्था बनाई। इस नियम के तहत मंगलवार को हिंदू यहां आकर पूजा करते थे। वहीं, शुक्रवार के दिन मुस्लिम समुदाय को नमाज की इजाजत थी।



यह व्यवस्था पिछले कई सालों से लगातार ऐसे ही चली आ रही थी। दोनों ही पक्ष अपने-अपने तय दिनों पर यहां आते थे। लेकिन हिंदू पक्ष हमेशा पूरी जगह पर अपना दावा करता रहा।



धार छावनी में तब्दील...हिंदू पक्ष का दावा- भोजशाला में पूजा-हवन रोकने का आदेश नहीं, दिन भर जारी रहे


एएसआई के नए सर्वे में क्या मिला

साल 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई (ASI survey in Bhojshala) ने धार की भोजशाला में फिर सर्वे किया। आधुनिक मशीनों की मदद से पूरे परिसर की बारीकी से जांच की गई। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी थी।



इस रिपोर्ट में परिसर के अंदर मंदिर शैली के खंभे मिले। दीवारों पर संस्कृत और प्राकृत भाषा में लिखे प्राचीन श्लोक मिले। साथ ही हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के अवशेष भी पाए गए।



इन सबूतों के आधार पर हाईकोर्ट ने 15 मई को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर है। इसी के साथ शुक्रवार को नमाज पढ़ने का पुराना आदेश रद्द कर दिया गया।



721 साल बाद भोजशाला में शुक्रवार को गूंजेंगे मां वाग्देवी के जयकारे, महाआरती व विशेष पूजा की तैयारी


कोर्ट के फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं

हाई कोर्ट के फैसले के बाद धार शहर में सुरक्षा बहुत सख्त है। जिला प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। पूरे इलाके में त्योहार जैसा माहौल देखा जा रहा है।



शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1500 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात हैं। बाहर से भी अतिरिक्त पुलिस बल को तुरंत बुलाया गया है। पुलिस के बड़े अधिकारी खुद सड़कों पर गश्त लगा रहे हैं।



दूसरी तरफ मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले में जल्द ही सुनवाई होने की उम्मीद है। हिंदू पक्ष ने भी पहले ही अपनी केविएट याचिका दायर कर दी है।



ये खबरें भी पढ़ें...



धार भोजशाला में ऐतिहासिक जश्न: हाईकोर्ट के फैसले के बाद 365 दिन पूजन का मिला अधिकार



भोजशाला में अभी भी एक रुपए प्रवेश शुल्क, बंद करने और मुस्लिम चिह्न हटाने की मांग



हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार भोजशाला में बदले नियम, ASI ने बदले सभी बोर्ड



भोजशाला में आज नहीं होगी नमाज, फैसले के बाद पहला शुक्रवार, चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात



Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • धार की भोजशाला
  • एमपी की भोजशाला का इतिहास
  • Bhojshala
  • भोजशाला
  • वाग्देवी
  • धार भोजशाला
  • ASI survey in Bhojshala