10 मई से लग रहा है रोग पंचक, भूलकर भी न करें ये गलतियां, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Kaushiki | May 09, 2026, 12:35 IST
panchak
मई 2026 में 10 तारीख से रोग पंचक शुरू हो रहा है। इस दौरान दक्षिण दिशा की यात्रा और नए निर्माण कार्यों से बचना चाहिए। यह अवधि 14 मई तक रहेगी।

Panchak May 2026: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले समय देखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में पंचक को एक विशेष और अशुभ समय माना गया है। मई 2026 में पंचक की शुरुआत 10 मई को दोपहर 12:13 बजे होगी। ये समय 14 मई की रात 10:34 बजे तक जारी रहेगा। चूंकि यह पंचक रविवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इसे रोग पंचक कहेंगे।



ज्योतिष शास्त्र में रविवार को शुरू होने वाला पंचक सेहत के लिए काफी भारी माना जाता है। इस दौरान व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा अधिक रहता है।



पंचक कितने प्रकार के होते हैं

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, पंचक जिस दिन शुरू होता है, उसी के आधार पर इसका नाम और प्रभाव बदल जाता है।जैसे-



  • रोग पंचक (रविवार):
    यह रविवार से शुरू होता है और सेहत के लिए बहुत कष्टकारी माना जाता है। इस दौरान शारीरिक और मानसिक बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
  • राज पंचक (सोमवार):
    सोमवार को शुरू होने वाला यह पंचक शुभ माना जाता है और सरकारी कार्यों में सफलता दिलाता है। इसमें जमीन-जायदाद से जुड़े कामों में विजय प्राप्त होती है।
  • अग्नि पंचक (मंगलवार):
    मंगलवार से शुरू होने वाले इस पंचक में आग लगने का डर सबसे ज्यादा बना रहता है। इस दौरान मशीनरी, औजार या निर्माण का काम करना वर्जित होता है।
  • मृत्यु पंचक (शनिवार):
    शनिवार को शुरू होने वाला यह पंचक सबसे ज्यादा घातक और अशुभ माना जाता है। इस दौरान कोई भी जोखिम भरा काम या विवाद करने से बचना चाहिए।
  • चोर पंचक (शुक्रवार):
    शुक्रवार से शुरू होने वाले इस पंचक में धन हानि और चोरी होने की प्रबल संभावना रहती है। इस समय पैसों का लेनदेन, यात्रा या व्यापारिक सौदे नहीं करने चाहिए।
  • सामान्य पंचक (बुधवार और गुरुवार):
    बुधवार और गुरुवार को शुरू होने वाले पंचक को कम अशुभ या सामान्य माना जाता है। इन दिनों में वर्जित कार्यों को छोड़कर बाकी रूटीन काम किए जा सकते हैं।

पंचक का विज्ञान और नक्षत्रों का खेल

जब चंद्रमा पांच विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है, तो पंचक लगता है। ये नक्षत्र धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती कहलाते हैं। इन पांच नक्षत्रों के मेल को ही पंचक की संज्ञा दी गई है।



पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, इन दिनों में किए गए काम पांच गुना बढ़ जाते हैं। इसलिए इस दौरान शुभ या मांगलिक कार्यों की मनाही की जाती है। यदि पंचक में कोई बुरा काम हो, तो वह भी पांच बार होता है। यही कारण है कि इस दौरान विशेष सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।



सेहत का रखें विशेष ध्यान

रोग पंचक के नाम से ही स्पष्ट है कि यह बीमारियां लाता है। इस दौरान खान-पान और दिनचर्या पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। पुराने रोगों के उभरने की आशंका इन पांच दिनों में अधिक रहती है।



यदि संभव हो, तो इन दिनों में कोई भी ऑपरेशन न कराएं। मानसिक तनाव से बचने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें। इस समय लिए गए कर्ज को चुकाने में भी काफी समस्या आती है। अपनी वाणी और व्यवहार को संयमित रखकर विवादों से दूर रहें।



पंचक में क्या करें

रोग पंचक के दोषों को कम करने के लिए कुछ उपाय करें।



  • हनुमान पूजा: पंचक के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए रोज हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
  • सूर्य अर्घ्य: सुबह स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं, इससे सेहत अच्छी रहती है।
  • गायत्री मंत्र: मानसिक शांति और नकारात्मकता दूर करने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी है।
  • पंचमुखी हनुमान: रोग पंचक में पंचमुखी हनुमान जी के चित्र के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
  • दान-पुण्य: यदि पंचक में कोई काम करना बहुत जरूरी हो, तो पहले गुड़ और चने का दान करें।
  • मृत्यु संस्कार: यदि पंचक (Panchak) में किसी की मृत्यु हो जाए, तो अंतिम संस्कार के समय 5 पुतले साथ जलाएं।
  • भगवान का ध्यान: यह समय भक्ति के लिए बुरा नहीं है, इसलिए सात्विक रहकर भगवान का ध्यान करें।

पंचक में क्या न करें

  • लकड़ी का काम: इन दिनों में घर के लिए लकड़ी खरीदना या लकड़ी का फर्नीचर बनवाना वर्जित है।
  • छत डलवाना: घर या दुकान की नई छत (लेंटर) डलवाना अशुभ माना जाता है, इसे टाल दें।
  • दक्षिण की यात्रा: दक्षिण दिशा को यम की दिशा मानते हैं, इधर यात्रा करने से कष्ट हो सकता है।
  • नया बिस्तर: पंचक के दौरान नया पलंग, बिस्तर या गद्दे खरीदना और बनवाना दोनों अशुभ हैं।
  • मांगलिक कार्य: शादी, सगाई या मुंडन जैसे शुभ संस्कारों की शुरुआत इन 5 दिनों में न करें।
  • ईंधन इकट्ठा करना: घास, लकड़ी या कंडा जैसे जलने वाले ईंधन को इकट्ठा करना वर्जित है।
  • गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या नींव पूजन जैसे बड़े काम पंचक खत्म होने के बाद ही करें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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