2026 में कब से शुरू है पितृ पक्ष? भूलकर भी न करें ये काम, वरना लगेगा दोष

Kaushiki | Sept 05, 2026, 16:45 IST
Pitru Paksha 2026 Date
साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस 15 दिन की अवधि में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। जानिए पितृ पक्ष की सभी तिथियां, नियम और इसके पीछे की पौराणिक कथा।

Pitru Paksha 2026:हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह अवधि हमारे पूर्वजों और पितरों की स्मृति को समर्पित होती है। माना जाता है कि इस दौरान पितर धरती पर आते हैं। वे अपने परिजनों के पास रहकर उनका आशीर्वाद देते हैं।



पितृ पक्ष भाद्रपद महीने की पूर्णिमा तिथि से शुरू होता है। इसका समापन आश्विन महीने की अमावस्या पर सर्वपितृ अमावस्या के साथ होता है। श्राद्ध पक्ष के 15 दिनों में परिवार के लोग सात्विक जीवन जीते हैं। इस समय पितरों की शांति के लिए पिंडदान और दान किए जाते हैं। ऐसा करने से परिवार में सुख और खुशहाली बनी रहती है।



पितरों का तर्पण करने से जीवन के कई संकट टल जाते हैं। साल 2026 में पितृ पक्ष को लेकर लोगों में बहुत उत्सुकता है। लोग जानना चाहते हैं कि श्राद्ध की शुरुआत कब से होगी। इस साल सितंबर के अंत में पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष की सही तिथियां और नियम।



Pitru Paksha 2026


पितृ पक्ष 2026 की सही तिथि

साल 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध होगा।



पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध होता है जिनकी तिथि याद नहीं होती। यह पूरे 15 दिनों का समय होता है।



पितृ पक्ष से जुड़ी पौराणिक कथा

महाभारत के युद्ध में जब दानवीर कर्ण वीरगति को प्राप्त हुए, तब उनकी आत्मा स्वर्ग पहुंची। स्वर्ग में कर्ण का भव्य स्वागत हुआ। लेकिन जब उन्हें भोजन परोसा गया, तो थाली में केवल सोना और बहुमूल्य गहने रखे थे। हैरान होकर कर्ण ने देवराज इंद्र से इसका कारण पूछा।



देवराज इंद्र ने मुस्कुराते हुए कहा कि आपने जीवनभर केवल सोने-चांदी और धन-दौलत का ही दान किया है। आपने कभी भी अपने पितरों और पूर्वजों के नाम पर अन्न या जल का दान नहीं किया।



इस पर कर्ण ने बहुत ही विनम्रतापूर्वक कहा कि वे अपने वास्तविक माता-पिता और पूर्वजों के नाम और कुल से अनजान थे, इसलिए उनसे यह भूल हो गई।



कर्ण की बात सुनकर देवराज इंद्र ने उन्हें अपनी भूल सुधारने का एक मौका दिया। इंद्रदेव ने कर्ण को 15 दिनों के लिए वापस पृथ्वी लोक पर भेजा।



धरती पर आकर कर्ण ने 15 दिनों तक अपने पूर्वजों का स्मरण किया और पूरे विधि-विधान से उन्हें अन्न और जल अर्पित किया। कर्ण द्वारा की गई इसी सेवा और तर्पण के बाद से धरती पर हर साल 15 दिनों तक पितृ पक्ष मनाने की पावन परंपरा की शुरुआत हुई।



Pitru Paksha 2026


पितृ पक्ष के मुख्य कर्म और नियम

सनातन धर्म में पितृ पक्ष की अवधि का विशेष धार्मिक महत्व है। इसमें पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ खास कर्म किए जाते हैं। इनमें सबसे मुख्य कर्म तर्पण माना गया है। इसमें जल, काले तिल और कुशा की मदद से पूर्वजों को अर्घ्य दिया जाता है।



दूसरा प्रमुख कर्म पिंडदान है, जिसमें पकाए गए चावल, जौ का आटा और काले तिल को मिलाकर गोल पिंड तैयार किए जाते हैं। ये पिंड पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति और उनकी मुक्ति के लिए अर्पित किए जाते हैं। इस दौरान सात्विकता का पालन करना बेहद जरूरी होता है।



श्राद्ध की तिथि पर ब्राह्मणों और गरीबों को बुलाकर श्रद्धापूर्वक सात्विक भोजन कराया जाता है और उन्हें सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा दी जाती है। इसके साथ ही, बनाए गए भोजन का एक हिस्सा गाय, कौए और कुत्ते को देना अनिवार्य माना गया है।



धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इन पशु-पक्षियों के माध्यम से अर्पित किया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है और वे प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितृपक्ष में पिंडदान



पितृ पक्ष में क्या करें

  • रोज सुबह स्नान के बाद पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें।
  • घर की रसोई में प्रतिदिन पूरी सात्विकता और शुद्धता के साथ सादा भोजन तैयार करें।
  • अपनी क्षमता अनुसार ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और असहाय लोगों को भोजन व वस्त्र दान करें।
  • बनाए गए भोजन में से पंचबली यानी गाय, कौए, कुत्ते, चींटी और देवों के लिए हिस्सा निकालें।
  • जीवित माता-पिता और घर के बड़े-बुजुर्गों की दिल से सेवा करें तथा प्रतिदिन उनका आशीर्वाद लें।

पितृ पक्ष में क्या न करें

  • इस 15 दिन की अवधि में शादी-विवाह, मुंडन और सगाई जैसे मांगलिक कार्य भूलकर न करें।
  • नया मकान खरीदना, गाड़ी लेना, नया सामान खरीदना या गृह प्रवेश जैसे शुभ काम न करें।
  • घर में तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से न करें।
  • किसी भी वृद्ध व्यक्ति, साधु-संत या गरीब व्यक्ति का किसी भी स्थिति में अनादर न करें।
  • श्राद्ध पक्ष के दौरान घर के वातावरण को शांत रखें और आपस में क्लेश या झगड़ा न करें।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। pitru paksh पितृ पक्ष



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