जगन्नाथ मंदिर में ड्रेस कोड लागू करने की तैयारी, जींस-पैंट पर लगेगी रोक

Anjali Dwivedi | Apr 30, 2026, 14:31 IST
puri jagannath temple
ओडिशा सरकार पुरी के जगन्नाथ मंदिर में नया ड्रेस कोड लागू करने पर विचार कर रही है। विधि आयोग ने महिलाओं के जींस-शर्ट पहनने पर रोक और पारंपरिक कपड़ों को अनिवार्य करने की सिफारिश की है।

दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर अब ओडिशा के विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं के लिए औपचारिक ड्रेस कोड लागू करने की कवायद तेज हो गई है। ओडिशा राज्य विधि आयोग ने राज्य सरकार को सिफारिश भेजी है। आयोग का कहना है कि मंदिर की पवित्रता और हिंदू संस्कृति को बनाए रखने के लिए पहनावे के सख्त नियम बनाए जाएं।



श्री जगन्नाथ मंदिर में जींस-पैंट पर पाबंदी

न्यायमूर्ति विश्वनाथ रथ की अध्यक्षता वाली विधि समिति ने सुझाव दिया है कि मंदिर में प्रवेश के लिए हिंदू सांस्कृतिक परंपरा पर आधारित पोशाक अनिवार्य होनी चाहिए। आयोग ने विशेष रूप से सिफारिश की है कि शर्ट, जींस या पैंट पहनकर आने वाली महिलाओं और पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।



आयोग का मानना है कि वर्तमान में नियमों के प्रभावी न होने का मुख्य कारण प्रवर्तन प्रावधानों की कमी है। इसीलिए, श्री जगन्नाथ मंदिर अधिनियम में संशोधन कर पोशाक संहिता की एक स्पष्ट परिभाषा जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है।



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श्रद्धालुओं के लिए क्या होगा नया ड्रेस कोड?

आयोग द्वारा प्रस्तावित नियमों को आयु और श्रेणी के आधार पर वर्गीकृत किया गया है-



  • महिलाओं के लिए: 10 साल से अधिक आयु की महिलाओं के लिए साड़ी-ब्लाउज या सलवार-कमीज निर्धारित की गई है।
  • लड़कियों के लिए: 10 साल से कम उम्र की बच्चियों को फ्रॉक, गाउन या सलवार-कमीज पहनने की अनुमति होगी।
  • पुरुषों के लिए: पुरुष तीर्थयात्रियों के लिए धोती-कुर्ता, पैंट-शर्ट, चूड़ीदार पजामा या कंधे पर गमछा (पट्टों) रखने का सुझाव दिया गया है।
  • सेवादारों के लिए: मंदिर के पुजारियों और सेवादारों को अपनी ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से पारंपरिक पोशाक ही पहननी होगी।

क्यों महसूस हुई कानून की जरूरत?

गौरतलब है कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने एक जनवरी, 2024 से ही हाफ पैंट, शॉर्ट्स, फटी हुई जींस, स्कर्ट और स्लीवलेस कपड़ों पर प्रतिबंध लगा दिया था।



हालांकि, कानूनी प्रावधानों और स्पष्ट परिभाषा के अभाव में इसे पूरी तरह लागू करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। शोधकर्ताओं का मानना है कि शालीन पोशाक न केवल मंदिर की मर्यादा बनाए रखती है, बल्कि भक्तों के आध्यात्मिक अनुभव को भी एकाग्र करती है।



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मंदिर के पूर्व प्रशासक का क्या कहना है

मंदिर के पूर्व प्रशासक प्रदीप दास बताते हैं कि मंदिरों में वस्त्र धारण करना केवल दिखावा नहीं, बल्कि विनम्रता और भक्ति भाव विकसित करने का साधन है।



जब भक्त सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त वस्त्र पहनते हैं, तो मंदिर परिसर में एक सकारात्मक और अनुशासित वातावरण बनता है। प्रशासन का उद्देश्य किसी को बाहर करना नहीं, बल्कि मंदिर की गरिमा और प्राचीन मर्यादा को सुरक्षित रखना है।



इन बड़े मंदिरों में पहले से लागू हैं नियम

यदि ओडिशा सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार कर कानून बनाती है, तो जगन्नाथ पुरी भी देश के उन चुनिंदा मंदिरों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां ड्रेस कोड का सख्ती से पालन होता है। वर्तमान में इन मंदिरों में विशेष ड्रेस कोड लागू है।



  • पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम)
  • तिरुपति बालाजी मंदिर (तिरुपति)
  • महालक्ष्मी मंदिर (कोल्हापुर)
  • राधारानी की नगरी बरसाना
  • शिमला और उज्जैन के कई जैन मंदिर

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