आज हरियाली अमावस्या पर लगेगा सूर्य ग्रहण, जानें ग्रहण का समय और आपकी राशि का हाल

Kaushiki | Aug 09, 2026, 14:24 IST
Hariyali Amavasya
सावन अमावस्या 12 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस पावन अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से पुण्य मिलता है। शाम को दीपक जलाने से पितृ दोष शांत होता है।

Hariyali Amavasya: हिंदू पंचांग में सावन मास का अपना एक विशेष महत्व होता है। भगवान विष्णु के चार महीने के लिए योगनिद्रा में जाने के बाद देवों के देव महादेव पूरी सृष्टि का संचालन संभालते हैं। इसीलिए सावन का पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति को समर्पित होता है। इस पवित्र महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को हम हरियाली अमावस्या कहते हैं।



इस समय चारों ओर कुदरत की हरियाली फैली होती है और मानसून की फुहारें वातावरण को खुशनुमा बना देती हैं। आइए इस पावन तिथि, इसके शुभ मुहूर्त, पुष्य नक्षत्र के महत्व और हरियाली अमावस्या की पूरी पौराणिक कथा को बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं।



सावन अमावस्या की तारीख

वैदिक पंचांग के मुताबिक, अमावस्या तिथि 12 अगस्त को शुरू होगी। यह तिथि 12 अगस्त को तड़के 01:52 बजे से प्रारंभ होगी। अमावस्या तिथि 12 अगस्त को रात 11:06 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि की मान्यता के कारण सावन अमावस्या 12 अगस्त को ही है।



अमावस्या 12 अगस्त दिन बुधवार को यह पावन पर्व मनाया जाएगा। इसे देश भर में हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है।


इस साल 2026 की सावन अमावस्या बहुत ही खास मानी जा रही है। इस दिन नक्षत्रों के राजा पुष्य नक्षत्र और व्यतीपात योग का बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है।



धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पुष्य नक्षत्र में किया गया स्नान, दान और पितृ तर्पण कई गुना अधिक फलदायी होता है। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है। शाम को पितरों के लिए दीपक जलाने का भी नियम है।



हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है। 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:23 से 05:06 बजे तक रहेगा। जो लोग सुबह जल्दी स्नान न कर सकें वे सूर्योदय के बाद करें।



उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 05:49 से 07:28 बजे तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 07:28 से 09:07 बजे तक रहेगा। इन शुभ समय में स्नान और दान करने से बड़ा पुण्य मिलता है।



Hariyali Amavasya


हरियाली अमावस्या पूजा विधि

  • अमावस्या की तिथि मुख्य रूप से हमारे पितरों को समर्पित होती है।
  • सुबह स्नान करने के तुरंत बाद पितरों का तर्पण करना चाहिए।
  • हाथ में साफ जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर तर्पण करें।
  • कुशा घास की मदद से जल अर्पित करने से पितर प्रसन्न होते हैं।
  • तर्पण करने से घर का पितृ दोष पूरी तरह शांत हो जाता है।
  • शाम को पितरों के नाम से एक दीया जरूर जलाना चाहिए।
  • दीपक जलाने से पितरों का वापस लौटने का मार्ग रोशन रहता है।

पुष्य नक्षत्र का महत्व

इस बार सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र का संयोग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है। यह नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 07:59 बजे तक रहेगा।



इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र की शुरुआत हो जाएगी। पुष्य नक्षत्र में शुरू किए गए सभी काम सफल होते हैं। इस समय में पूजा और धार्मिक कार्य करना बहुत शुभ होता है। इस योग में किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है।



व्यतीपात योग का समय और नियम

अमावस्या के दिन व्यतीपात योग भी बन रहा है। यह योग सुबह से लेकर दोपहर 03:26 बजे तक रहेगा। इसके बाद वरीयान् योग की शुरुआत हो जाएगी। व्यतीपात योग में कोई नया शुभ काम शुरू नहीं करना चाहिए। हालांकि ईश्वर की पूजा और मंत्र जाप के लिए यह उत्तम है। इस समय में केवल धार्मिक और आध्यात्मिक काम ही करने चाहिए।



हरियाली अमावस्या की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के मुताबिक, एक राजा के राज्य में बहुत खुशहाली थी। राजा की एक बहू थी जिसे चोरी-छिपे मिठाई खाने की आदत थी। एक दिन उसने पूजा की मिठाई चुपके से खा ली। पूछने पर उसने इसका दोष घर की एक बीमार गाय पर डाल दिया।



राजा ने गुस्से में आकर उस निर्दोष गाय को सजा दे दी। इस पाप के कारण राजा के राज्य में सूखा पड़ गया। पंडितों ने बताया कि गाय पर झूठा दोष लगाने से यह हुआ है। तब बहू को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माफी मांगी।



सावन अमावस्या पर बहू ने व्रत रखा और पौधे लगाए। उसकी सच्ची भक्ति देखकर भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न हुए। उन्होंने राज्य को फिर से हरा-भरा और खुशहाल बना दिया। तभी से इस दिन पौधे लगाने और व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई।



अमावस्या पर दान की चीजें

अमावस्या के दिन दान करने का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। स्नान के बाद गरीब लोगों को भोजन और वस्त्र दान करें। अपनी क्षमता के हिसाब से फल, बर्तन और छाता भी दे सकते हैं। जूते, चप्पल और कंबल का दान करना भी बहुत शुभ होता है। हरा चारा गायों को खिलाने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन पीपल का पेड़ लगाना बहुत ही फलदायी माना गया है।



हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण

सावन शिवरात्रि के तुरंत बाद खगोलीय घटना होगी। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। आज रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी। इसका समापन अर्धरात्रि 1 बजकर 24 मिनट पर होगा। कुल मिलाकर इसकी अवधि 4 घंटे 24 मिनट की होगी।



यह ग्रहण कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा, लेकिन भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा। फिर भी इसका प्रभाव सभी राशियों पर जरूर देखने को मिलेगा। ग्रहण के समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए।



राशियों पर सूर्य ग्रहण का असर

  • मेष राशि: आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें और सोच समझकर बोलें।
  • वृषभ राशि: धन लाभ के नए अवसर आपको मिल सकते हैं। तरक्की के रास्ते खुलेंगे और मन खुश रहेगा।
  • मिथुन राशि: करियर में नए और अच्छे बदलाव देखने को मिलेंगे। नौकरी में पदोन्नति की संभावना बन रही है।
  • कर्क राशि: भागदौड़ अधिक रहेगी, लेकिन काम में सफलता मिलेगी। धार्मिक यात्रा के योग भी बन रहे हैं।
  • सिंह राशि: सेहत के मामले में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अचानक कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
  • कन्या राशि: व्यापार में नए सौदे और साझेदारी से लाभ होगा। जीवनसाथी का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।
  • तुला राशि: गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की बहुत जरूरत है। मेहनत का पूरा फल आपको अवश्य मिलेगा।
  • वृश्चिक राशि: विद्यार्थियों के लिए समय बहुत ही अच्छा रहेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।
  • धनु राशि: संपत्ति और गाड़ी खरीदने के योग बन रहे हैं। परिवार में खुशहाली और शांति का माहौल रहेगा।
  • मकर राशि: आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि देखने को मिलेगी। छोटे भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा।
  • कुंभ राशि: धन की बचत करने में आपको सफलता मिल सकती है। अपनी मधुर वाणी से काम पूरे करवा लेंगे।
  • मीन राशि: मन में थोड़ा मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। शिवजी की पूजा करने से शांति मिलेगी।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



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