विष्णु जी की कृपा पाने के लिए अगस्त में ऐसे करें एकादशी व्रत, ये हैं शुभ मुहूर्त
August Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को बेहद प्रिय होता है। शास्त्रों के मुताबिक, हर महीने में दो एकादशियां आती हैं। एक एकादशी कृष्ण पक्ष में आती है। दूसरी एकादशी शुक्ल पक्ष में पड़ती है। साल 2026 का अगस्त महीना धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है। इस महीने सावन की पवित्र तिथियां पड़ रही हैं।
अगस्त में कामिका एकादशी और श्रावण पुत्रदा एकादशी का संयोग बन रहा है। इन दोनों ही व्रतों का अपना विशेष धार्मिक महत्व होता है। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से सभी पाप मिट जाते हैं। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा होती है।
अगर आप इस सावन में एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं। तो आपको सही तिथियों और शुभ मुहूर्त की जानकारी होनी चाहिए। सही समय पर पूजा और पारण करने से पूरा फल मिलता है। आइए जानें शुभ मुहूर्त, पारण समय और कथा।
कामिका एकादशी की तिथि
अगस्त महीने की पहली एकादशी कामिका एकादशी कहलाती है। यह सावन महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। पंचांग के मुताबिक, एकादशी तिथि 08 अगस्त को शुरू होगी। यह तिथि सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होगी। एकादशी तिथि का समापन 09 अगस्त को सुबह होगा।
यह तिथि सुबह 07 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि का नियम माना जाता है। इसलिए कामिका एकादशी का व्रत 09 अगस्त को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु का जलाभिषेक करना बेहद शुभ होता है। तुलसी पत्र चढ़ाकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना चाहिए।
कामिका एकादशी का पारण
एकादशी व्रत में पारण का विशेष ध्यान रखा जाता है। पंचांग के मुताबिक, कामिका एकादशी व्रत का पारण 10 अगस्त को किया जाएगा। पारण के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम रहेगा।
पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 36 मिनट से शुरू होगा। यह मुहूर्त सुबह 09 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस समय में पूजा करके ही व्रत खोलना चाहिए। किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान देकर व्रत खोलें।
कामिका एकादशी पौराणिक कथा
प्राचीन काल में एक गांव में एक क्रोधी व्यक्ति रहता था। एक दिन उसका झगड़ा एक ब्राह्मण से हो गया। गुस्से में आकर उस व्यक्ति ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। बाद में उसे अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ। वह व्यक्ति अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहता था।
उसने एक महर्षि से पाप मुक्ति का उपाय पूछा। ऋषि ने उसे सावन कामिका एकादशी व्रत करने की सलाह दी। उसने पूरे विधि-विधान से कामिका एकादशी का व्रत किया। भगवान विष्णु की कृपा से उसके सभी पाप नष्ट हो गए। उसे ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिल गई।
श्रावण पुत्रदा एकादशी तिथि
अगस्त की दूसरी एकादशी श्रावण पुत्रदा एकादशी कहलाती है। यह सावन महीने के शुक्ल पक्ष में आती है। पंचांग के मुताबिक, एकादशी तिथि 22 अगस्त को शुरू होगी। यह तिथि रात 10 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ होगी।
एकादशी तिथि का समापन 23 अगस्त को देर रात होगा। तिथि का समापन रात 12 बजकर 48 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर व्रत 23 अगस्त को रखा जाएगा। संतान सुख की चाह रखने वालों के लिए यह खास है।
पुत्रदा एकादशी का पारण
श्रावण पुत्रदा एकादशी का पारण अगले दिन किया जाएगा। पंचांग के मुताबिक, पारण की तिथि 24 अगस्त 2026 रहेगी। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 19 मिनट से शुरू होगा।
यह मुहूर्त सुबह 09 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन सुबह स्नान करके विष्णु जी की आरती करें। भगवान को भोग लगाकर सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
पुत्रदा एकादशी की कथा
भद्रावती नगर में सुकेतुमान नाम का एक राजा राज्य करता था। राजा और उसकी रानी के कोई संतान नहीं थी। संतान न होने से राजा-रानी हमेशा दुखी रहते थे। एक दिन राजा उदास होकर जंगल की ओर चला गया।
जंगल में राजा की मुलाकात कुछ तपस्वी ऋषियों से हुई। ऋषियों ने राजा को अपनी दुख का कारण बताया। ऋषियों ने राजा को श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत करने को कहा।
राजा ने राज्य लौटकर नियम से यह व्रत किया। व्रत के प्रभाव से रानी ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस व्रत का नाम पुत्रदा एकादशी पड़ा।
एकादशी व्रत के अद्भुत लाभ
एकादशी का व्रत भगवान श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इस दिन पूरे नियम से व्रत रखने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से घर में सुख-समृद्धि आती है और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
महीने में दो बार एकादशी व्रत रखने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है। उपवास करने से शरीर प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स होता है, जिससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और पाचन क्रिया मजबूत होती है।
व्रत रखने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार (एकादशी पर पूजा) दूर रहते हैं। इससे मानसिक तनाव कम होता है, आत्म-नियंत्रण बढ़ता है और मन में सकारात्मकता आती है।
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