आज है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत, इन 16 चीजों से करें मां पार्वती का पूजन
Mangla Gauri Vrat 2026: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। इस महीने में जहां सोमवार का दिन भोलेनाथ की पूजा के लिए खास होता है। वहीं हर मंगलवार का दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप को समर्पित रहता है।
सुहागिन महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से व्रत रखने पर अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है। दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है और जीवन साथी की आयु लंबी होती है।
इस साल 2026 में सावन महीने की शुरुआत 30 जुलाई से हो गई है। ऐसे में महिलाओं के बीच पहले मंगला गौरी व्रत की तारीख को लेकर काफी उत्सुकता है। आइए जानते हैं सावन के पहले मंगला गौरी व्रत की तिथि और पूजा की विधि।
कब से शुरू हो रहा है सावन 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हो गई है। इस दिन गुरुवार का दिन रहेगा। सावन महीने का समापन 27 अगस्त 2026 को होगा।
पूरे महीने भगवान शिव और माता गौरी की भक्ति की जाएगी। भक्तों के लिए यह पूरा महीना बहुत ही फलदायी माना जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन भी किया जाएगा।
पहला मंगला गौरी व्रत कब है
सावन का पहला मंगलवार बहुत ही खास माना जाता है। इस साल पहला मंगला गौरी व्रत आज 4 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती की पूजा करेंगी। पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला या फलाहारी व्रत रखा जाएगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बहुत ही शुभ फल देने वाला है। आप भी इस दिन पूजा की तैयारी समय पर कर लें।
मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व
सावन के मंगलवार को माता पार्वती की पूजा से सुख मिलता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, वैवाहिक जीवन की तमाम परेशानियां और कड़वाहट दूर हो जाती हैं। पति और पत्नी के बीच आपसी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। कुंवारी कन्याओं को इस व्रत से मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष है, वह भी दूर होता है। संतान से जुड़ी समस्याएं भी इस व्रत से हल होती हैं।
पूजा में 16 की संख्या का महत्व
धार्मिक मान्यता के मुताबिक, मंगला गौरी पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व होता है। पूजा में चढ़ाई जाने वाली सामग्री 16 की गिनती में रखी जाती है।
16 श्रृंगार की चीजें मां को अर्पित करना शुभ होता है। साथ ही 16 चूड़ियां, 16 बिंदी और 16 मखाने पूजा में रखे जाते हैं। इसके साथ 16 दिए जलाकर मां की आरती उतारना भी बहुत फलदायी होता है। इस नियम का पालन जरूर करना चाहिए।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
- व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
- इसके बाद लाल या साफ वस्त्र पहनकर व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- इसके बाद रोली, अक्षत, सिंदूर, फल और फूल अर्पित करें।
- मां को 16 प्रकार की श्रृंगार सामग्री जरूर चढ़ाएं।
मां गौरी की ऐसे करें सेवा
देवी मां को आटे का हलवा बहुत प्रिय माना जाता है। इसके अलावा बेसन के लड्डू या पंचमेवा का भोग लगाएं। इसके बाद मंगला गौरी व्रत की कथा ध्यान से सुनें।
कथा के बाद कपूर या घी के दीपक से आरती करें। पूजा खत्म होने के बाद माता से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करना जरूरी होता है।
पूजा पूरी होने के बाद दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है। किसी सुहागिन स्त्री या ब्राह्मण को श्रृंगार का सामान दें। साथ ही अन्न और वस्त्र का दान भी जरूर करें। दान करने से पूजा का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।
घर में सुख और समृद्धि का वास हमेशा बना रहता है। मां पार्वती अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। मंगला गौरी व्रत श्रद्धा और नियम के साथ रखना चाहिए। सच्चे मन से की गई पूजा से घर के क्लेश खत्म होते हैं। इस सावन माता पार्वती की कृपा आप पर बनी रहे।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- सावन 2026 का पहला मंगला गौरी व्रत किस तारीख को है?
सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई को हो रही है। इस साल सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त 2026, दिन मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखेंगी। - मंगला गौरी व्रत में 16 की संख्या का क्या महत्व होता है?
मंगला गौरी व्रत की पूजा में 16 की संख्या का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन माता पार्वती को 16 प्रकार की श्रृंगार सामग्री (जैसे चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर) और 16 की संख्या में फल, फूल व भोग अर्पित किए जाते हैं। - मंगला गौरी व्रत रखने से क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
यह व्रत रखने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है और दांपत्य जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इसके अलावा विवाह में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं, मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और कुंडली का मंगल दोष भी शांत होता है।
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