सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजा का क्या है असली राज, भूलकर भी न करें ये काम
Parthiv Shivling importance:क्या आप जानते हैं कि कलयुग में भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका क्या है? शास्त्रों और पुराणों में लिखा है कि सावन मास में एक ऐसा विशेष पूजन है, जिसे करने मात्र से इंसान के बड़े से बड़े पाप, बीमारियां और अकाल मृत्यु का भय हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की पार्थिव शिवलिंग पूजा को सबसे महान बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पार्थिव शिवलिंग बनाने के क्या-क्या नियम हैं। आइए इसे अच्छे से समझें...
पार्थिव शिवलिंग क्या है
पार्थिव शिवलिंग का अर्थ है मिट्टी (पृथ्वी तत्व) से निर्मित शिवलिंग। किसी पवित्र स्थान, बेलवृक्ष की जड़ या नदी तट की शुद्ध मिट्टी में गंगाजल, दूध और भस्म मिलाकर हाथों से बनाए गए अस्थायी शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहते हैं।
शिव पुराण के मुताबिक, कलियुग में पार्थिव शिव पूजन को सभी पूजाओं में सबसे श्रेष्ठ और शीघ्र फलदायी माना गया है। त्रेतायुग में भगवान श्री राम ने भी रावण वध के बाद रामेश्वरम में पार्थिव शिवलिंग बनाकर ही महादेव की आराधना की थी।
इसके पूजन से ग्रह-दोष (जैसे शनि या कालसर्प दोष) शांत होते हैं, मानसिक शांति मिलती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। पूजा और जल-अभिषेक के बाद इसे पवित्र जल में विसर्जित कर दिया जाता है।
पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व
शिव पुराण में पार्थिव पूजन (शिव और सावन) की महिमा का बखान मिलता है। मिट्टी के शिवलिंग की पूजा से सुख और शांति मिलती है। यह पूजन जीवन से सभी दुखों को दूर करता है।
जो लोग बीमारी से परेशान हैं, उन्हें यह पूजा जरूर करनी चाहिए। इससे अकाल मृत्यु का भय भी पूरी तरह खत्म होता है। सावन में यह पूजा करने से कई गुना फल मिलता है।
पार्थिव शिवलिंग बनाने के नियम
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए हमेशा शुद्ध मिट्टी लेनी चाहिए। गंगा नदी के किनारे की मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है। बेलवृक्ष के नीचे की मिट्टी भी पूजा के लिए बहुत अच्छी है। मिट्टी को छानकर साफ पानी से अच्छे से गूंथ लें। मिट्टी में थोड़ा सा गंगाजल जरूर मिलाना चाहिए।
इसमें दूध, गाय का गोबर और भस्म भी मिला सकते हैं। शिवलिंग बनाते समय उत्तर दिशा की तरफ मुंह रखें। शिवलिंग का आकार 12 अंगुल से बड़ा नहीं होना चाहिए। छोटा शिवलिंग बनाना ही घर में शुभ माना जाता है।
बेलपत्र पर स्थापना की सही विधि
पार्थिव शिवलिंग को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें। स्थापना के लिए एक साफ थाली या लकड़ी की चौकी लें। उस पर सबसे पहले एक बड़ा और साफ बेलपत्र रखें। बेलपत्र की चिकनी सतह हमेशा ऊपर की तरफ होनी चाहिए।
बेलपत्र का डंठल उत्तर दिशा की ओर रखें। अब इस बेलपत्र के ऊपर ही मिट्टी का शिवलिंग स्थापित करें। ऐसा करने से पूजा का पूरा फल इंसान को मिलता है। बेलपत्र पर स्थापना करने से महादेव बहुत प्रसन्न होते हैं।
पार्थिव शिवलिंग की पूजन विधि
शिवलिंग स्थापित करने के बाद उनका ध्यान लगाएं। ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। फिर साफ जल से शिवलिंग को अच्छे से स्नान कराएं।
स्नान के बाद शिवलिंग पर चंदन और रोली लगाएं। उन्हें भस्म और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, आंकड़ा और फूल चढ़ाएं। शिवलिंग पर सफेद मिष्ठान और फल का भोग लगाएं। अंत में कपूर या देसी घी से धूप-आरती करें।
विसर्जन की सही प्रक्रिया
पार्थिव शिवलिंग की पूजा उसी दिन समाप्त होनी चाहिए। शाम की पूजा के बाद शिवलिंग का विसर्जन करें। विसर्जन से पहले महादेव से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।
पूजा में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें। इसके बाद शिवलिंग को किसी पवित्र नदी या तालाब में बहा दें। अगर नदी न हो तो घर के गमले में विसर्जित करें। विसर्जित मिट्टी में कोई भी पौधा लगाया जा सकता है। इससे शिवलिंग का अनादर बिल्कुल नहीं होता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजा करने से क्या फायदा मिलता है?
सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से सारे पाप मिट जाते हैं। इससे घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। बीमारियों से मुक्ति मिलती है और इंसान की सभी रुकी हुई मनोकामनाएं महादेव की कृपा से पूरी होती हैं। - पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किस तरह की मिट्टी का प्रयोग करें?
पार्थिव शिवलिंग के लिए गंगा नदी या किसी पवित्र नदी के किनारे की मिट्टी सबसे अच्छी होती है। अगर नदी की मिट्टी न मिले तो बेलवृक्ष के नीचे की शुद्ध मिट्टी में गंगाजल, दूध और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाया जा सकता है। - पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन कब और कैसे करना चाहिए?
पार्थिव शिवलिंग की पूजा के बाद उसी दिन शाम को विसर्जन करना चाहिए। भगवान से क्षमा मांगकर शिवलिंग को पवित्र नदी, तालाब या फिर घर में ही साफ पानी के बर्तन या गमले में आदरपूर्वक विसर्जित कर देना चाहिए।
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