सावन शिवरात्रि के तुरंत बाद लगेगा सूर्य ग्रहण, कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न
हिंदू धर्म में सावन शिवरात्रि का दिन बेहद खास माना जाता है। हर शिव भक्त इस पावन दिन का पूरे साल इंतजार करता है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा से मन की इच्छाएं पूरी होती हैं। कांवड़िए भी इसी खास दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। लेकिन इस साल सावन शिवरात्रि पर एक बड़ा मोड़ आया है। इस पावन पर्व पर भद्रा काल का साया रहने वाला है।
ज्योतिष शास्त्र में भद्रा काल को बहुत शुभ नहीं माना जाता। इस दौरान कोई भी नया या शुभ काम करने से बचते हैं। ऐसे में भक्तों के मन में बड़ा सवाल उठ रहा है। आखिर भद्रा के साये के बीच शिवलिंग पर जल कब चढ़ाएं?
क्या भद्रा में पूजा करने से शिवजी नाराज हो जाएंगे? इतना ही नहीं, इस बार शिवरात्रि बीतते ही 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है। इस ग्रहण का असर देश और सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। आइए जानें पूजा का सही समय।
सावन शिवरात्रि 2026 की सही तारीख
पंचांग के मुताबिक, इस साल चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को शुरू होगी। यह तिथि सुबह 04:43 बजे से शुरू हो जाएगी। इसका समापन 12 अगस्त को रात 01:51 पर होगा। उदया तिथि के कारण शिवरात्रि 11 अगस्त को होगी। मंगलवार को यह पावन पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।
11 अगस्त को सुबह 05:56 बजे भद्राकाल लगेगा। यह दोपहर 03:24 बजे तक बना रहेगा। भद्रा की कुल अवधि 10 घंटे 28 मिनट रहेगी। भद्रा के समय कोई भी बड़ा शुभ काम न करें। इस समय में शांति से केवल शिव नाम का जाप करें।
जल चढ़ाने के सबसे शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:23 से 06:00 बजे तक है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:58 बजे तक है। गोधूलि मुहूर्त रात 09:13 से 09:32 बजे तक है। इन शुभ समय में जल चढ़ाना सबसे फलदायी होगा। इन मुहूर्तों में पूजा करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
रात्रि पूजा के लिए निशिता मुहूर्त बहुत ही खास है। यह 12 अगस्त की रात 12:05 से शुरू होगा। इसका समापन रात को 12:48 बजे हो जाएगा। यह 43 मिनट का समय शिव साधना के लिए श्रेष्ठ है। इस समय रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य मिलता है।
चार प्रहर की पूजा का पूरा समय
पंचांग के मुताबिक, प्रथम प्रहर शाम 07:04 से रात 09:45 तक है। द्वितीय प्रहर रात 09:45 से 12:26 तक रहेगा। तृतीय प्रहर रात 12:26 से सुबह 03:07 तक है। चतुर्थ प्रहर सुबह 03:07 से 05:49 तक रहेगा। चारों प्रहर में पूजा करने से पाप मिट जाते हैं।
इस दिन पूजा के लिए बहुत शुभ संयोग बन रहे हैं। सिद्धि योग शाम 06:51 बजे तक बना रहेगा। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 10:09 बजे तक रहेगा। इन योगों में किए गए धार्मिक काम सफल होते हैं। रुके हुए काम पूरे होने के योग बन जाते हैं।
समुद्र मंथन और शिवरात्रि की कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक, देवताओं ने समुद्र मंथन किया था। मंथन (शिव और सावन) के दौरान उसमें से सबसे पहले हलाहल विष निकला। विष की गर्मी से पूरी दुनिया जलने लगी थी। तब सभी देवताओं ने भगवान शिव की प्रार्थना की थी। शिवजी ने संसार को बचाने के लिए विष पी लिया। उन्होंने विष को अपने गले में ही रोक लिया था।
विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया था। इसलिए भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाने लगा। विष की जलन को शांत करने के लिए जलाभिषेक हुआ। सभी देवताओं ने शिवजी पर शीतल जल चढ़ाया था। तभी से शिवरात्रि पर जल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने से शांति मिलती है। भद्राकाल
शिव पूजन की आसान और सही विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
- शिवलिंग पर सबसे पहले जल और गंगाजल चढ़ाएं।
- फिर दूध, दही, शहद और शक्कर अर्पित करें।
- इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और भांग चढ़ाएं।
- अंत में ओम नमः शिवाय का जाप करते रहें।
सावन शिवरात्रि के बाद सूर्य ग्रहण
सावन शिवरात्रि के तुरंत बाद खगोलीय घटना होगी। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, 12 अगस्त 2026 को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं रहेगा। इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा। फिर भी इसका प्रभाव सभी राशियों पर जरूर देखने को मिलेगा। ग्रहण के समय शिव मंत्रों का जाप करना चाहिए।
राशियों पर सूर्य ग्रहण का असर
- मेष राशि: आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है। सेहत का ध्यान रखें और सोच समझकर बोलें।
- वृषभ राशि: धन लाभ के नए अवसर आपको मिल सकते हैं। तरक्की के रास्ते खुलेंगे और मन खुश रहेगा।
- मिथुन राशि: करियर में नए और अच्छे बदलाव देखने को मिलेंगे। नौकरी में पदोन्नति की संभावना बन रही है।
- कर्क राशि: भागदौड़ अधिक रहेगी, लेकिन काम में सफलता मिलेगी। धार्मिक यात्रा के योग भी बन रहे हैं।
- सिंह राशि: सेहत के मामले में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अचानक कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
- कन्या राशि: व्यापार में नए सौदे और साझेदारी से लाभ होगा। जीवनसाथी का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।
- तुला राशि: गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की बहुत जरूरत है। मेहनत का पूरा फल आपको अवश्य मिलेगा।
- वृश्चिक राशि: विद्यार्थियों के लिए समय बहुत ही अच्छा रहेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है।
- धनु राशि: संपत्ति और गाड़ी खरीदने के योग बन रहे हैं। परिवार में खुशहाली और शांति का माहौल रहेगा।
- मकर राशि: आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि देखने को मिलेगी। छोटे भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा।
- कुंभ राशि: धन की बचत करने में आपको सफलता मिल सकती है। अपनी मधुर वाणी से काम पूरे करवा लेंगे।
- मीन राशि: मन में थोड़ा मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। शिवजी की पूजा करने से शांति मिलेगी।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- सावन शिवरात्रि 2026 पर भद्रा काल कब से कब तक रहेगा?
सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को भद्रा काल सुबह 05 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर दोपहर 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। भद्रा की कुल अवधि 10 घंटे 28 मिनट की होगी। - सावन शिवरात्रि पर शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सबसे उत्तम समय क्या है?
जल चढ़ाने के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:23 से 06:00 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:06 से 12:58 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त रात 09:13 से 09:32 बजे तक सबसे उत्तम है। - सावन शिवरात्रि 2026 पर शिव पूजा के लिए निशिता मुहूर्त कब है?
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा का निशिता मुहूर्त 12 अगस्त 2026 की सुबह 12 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर सुबह 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा।
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