आज परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जाने व्रत की तिथि
September Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व माना जाता है। ये पावन व्रत जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि एकादशी व्रत रखने से घर में सुख और शांति आती है।
इसके साथ ही इंसान के जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं। साल भर में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं। हर महीने में दो बार एकादशी का व्रत रखा जाता है। एकादशी तिथि को आम भाषा में ग्यारस भी कहा जाता है।
सितंबर 2026 के महीने में अजा और परिवर्तिनी एकादशी का बहुत सुंदर संयोग बना है। भाद्रपद का महीना भगवान विष्णु की पूजा के लिए अति उत्तम माना गया है। इस महीने में दोनों एकादशी का व्रत रखने से विशेष पुण्य मिलता है।
परिवर्तिनी एकादशी व्रत 2026 की तिथि
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पार्श्व एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के मुताबिक, ये तिथि 21 सितंबर को शाम 04:30 बजे से शुरू होगी।
इसका समापन 22 सितंबर को शाम 06:13 बजे होगा। उदया तिथि के मुताबिक, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की विशेष पूजा की जाती है।
व्रत पारण का समय
परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 को किया जाएगा। इस दिन पारण का शुभ समय सुबह 07:38 बजे से 10:04 बजे तक रहेगा। पारण के दिन द्वादशी तिथि शाम 07:20 बजे समाप्त होगी।
शुभ मुहूर्त में ही पूजा के बाद सात्विक भोजन से पारण करना चाहिए। नियम से व्रत खोलने पर भगवान वामन अत्यंत प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। परिवार में सभी प्रकार के सुख और समृद्धि का वास बना रहता है।
परिवर्तिनी एकादशी की कथा
शास्त्रों के मुताबिक, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में रहते हैं। इस तिथि को भगवान निद्रा के दौरान अपनी करवट बदलते हैं।
इसीलिए इस पावन तिथि को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि का घमंड तोड़ा था।
भगवान ने तीन पग में तीनों लोकों को माप लिया था। इस व्रत को करने से तीनों लोकों की पूजा का फल प्राप्त होता है। यह व्रत वाजपेय यज्ञ के समान ही परम पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। इसे रखने से व्यक्ति को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।
एकादशी व्रत में रखें इन बातों का ध्यान
- चावल का सेवन न करें:
एकादशी के दिन चावल खाना सख्त वर्जित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन चावल खाने से व्रत का पुण्य फल समाप्त हो जाता है। - सात्विक आहार लें:
व्रत के एक दिन पहले (दशमी तिथि की रात) और एकादशी के पूरे दिन केवल सात्विक भोजन ही ग्रहण करें। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से पूरी तरह दूर रहें। - तुलसी के पत्ते न तोड़ें:
एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पौधे में जल चढ़ाना और उसके पत्ते तोड़ना वर्जित होता है। पूजा के लिए तुलसी के पत्ते एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। - क्रोध और चुगली से बचें:
इस दिन अपने मन को शांत रखें। किसी से झगड़ा, कड़वे बोल बोलना, किसी की निंदा या झूठ बोलने से बचें और अपने आचरण को शुद्ध रखें। - दिन में सोने से बचें:
एकादशी व्रत के दौरान दिन के समय सोने की मनाही होती है। दिन भर भगवान विष्णु के नाम का जाप, भजन-कीर्तन या धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना शुभ माना जाता है। - शारीरिक स्वच्छता और ब्रह्मचर्य:
व्रत के दिन पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें। इसके अलावा नाखून, बाल या दाढ़ी काटने से बचें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर ही भगवान की पूजा करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। एकादशी पर पूजा
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