शनि जयंती 2026: साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये अचूक उपाय, जानें पूजा विधि

Kaushiki | May 13, 2026, 14:53 IST
Shani Jayanti 2026
16 मई 2026 को शनि जयंती पर ग्रहों का बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। शुक्र और बुध के गोचर से कई राशियों का भाग्य चमकने वाला है। वृषभ, मिथुन और सिंह समेत कई जातकों को धन, करियर और सुख-सुविधाओं में जबरदस्त लाभ मिलने के योग बन रहे हैं।

Shani Jayanti 2026: साल 2026 की शनि जयंती बहुत खास होने वाली है। इस बार शनिदेव के साथ शुक्र और बुध भी मेहरबान रहेंगे। ज्योतिष के मुताबिक, ग्रहों की यह स्थिति बहुत शुभ मानी जा रही है।



शुक्र वैभव और सुख का प्रतीक है। वहीं बुध बुद्धि और व्यापार को संभालता है। जब ये दोनों मिलते हैं, तो जीवन में भौतिक सुख बढ़ते हैं। करियर में भी नए रास्ते खुलते हैं।



वृषभ राशि में इन दोनों ग्रहों का मिलन होगा। इसका सीधा असर शनि जयंती के फलों पर पड़ेगा। आइए जानते हैं किन राशियों की झोली भरने वाली है।



इन भाग्यशाली राशियों पर होगी धन की वर्षा

वृषभ राशि के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। आपकी राशि में शुक्र और बुध की युति हो रही है। इससे धन, आकर्षण और करियर में बड़ा उछाल आएगा। मिथुन राशि वालों को अचानक लाभ मिल सकता है। विदेश से जुड़े काम पूरे होने की संभावना है।



नई योजनाओं में पैसा लगाने के लिए समय बहुत अच्छा है। कर्क राशि के जातकों की आय में बढ़ोतरी होगी। दोस्तों और नेटवर्क के जरिए पुराने रुके काम बनेंगे। निवेश किए गए पैसे से अच्छा रिटर्न मिल सकता है।



करियर और भाग्य में दिखेगा बड़ा सुधार

सिंह राशि के लोगों को ऑफिस में मान-सम्मान मिलेगा। आपकी मेहनत को पहचान मिलेगी और नई जिम्मेदारी मिल सकती है। प्रमोशन के योग भी साफ नजर आ रहे हैं। कन्या राशि वालों को भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।



शिक्षा और यात्रा के मामलों में लाभ होने वाला है। रुके हुए काम अब रफ्तार पकड़ने लगेंगे। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का यह मेल बहुत पावरफुल है। यह बुद्धि और वैभव का एक साथ मिलना है। इससे रिश्तों में भी कड़वाहट दूर होकर प्रेम बढ़ेगा।



ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती का महत्व

हिंदू धर्म में ज्येष्ठ अमावस्या का दिन बेहद पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन कर्मफल दाता शनिदेव का जन्म हुआ था। इसे शनि जयंती के रूप में पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।



धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, शनिदेव न्याय के देवता हैं जो व्यक्ति को उसके अच्छे-बुरे कर्मों के आधार पर फल देते हैं। इस दिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पितरों की शांति और तर्पण के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है।



शनि जयंती पर शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन के बड़े से बड़े कष्ट दूर हो जाते हैं। खासतौर पर वे जातक जो शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं, उन्हें इस दिन पूजा और दान करने से मानसिक और शारीरिक कष्टों में बड़ी राहत मिलती है।



पवित्र नदियों में स्नान और काले तिल, तेल या वस्त्रों का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। इस बार ग्रहों के विशेष संयोग ने इस दिन की महिमा को और भी अधिक बढ़ा दिया है।



शनि जयंती पूजा विधि

  • शनि जयंती पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
  • काले या गहरे रंग के साफ कपड़े पहनें।
  • इसके बाद शनि मंदिर जाकर तेल अर्पित करें।
  • शनिदेव की मूर्ति के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • उन्हें काले तिल, नीले फूल और काली उड़द चढ़ाएं।
  • शनि चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ होता है।
  • अंत में शनि देव की आरती जरूर करें।
  • पूजा के बाद गरीबों को काला छाता या चप्पल दान करें।
  • इस दिन किसी का अपमान न करें और सात्विक रहें।

ज्येष्ठ अमावस्या पर उपाय

ज्येष्ठ अमावस्या और शनि जयंती के पावन अवसर पर जीवन में सुख-समृद्धि लाने और कष्टों को दूर करने के लिए ये उपाय बेहद कारगर माने जाते हैं:



  • शनि देव का तैलाभिषेक: शनि जयंती के दिन शनि मंदिर जाकर भगवान शनि की मूर्ति पर सरसों का तेल अर्पित करें। इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों में बड़ी राहत मिलती है।
  • वट वृक्ष की परिक्रमा: सुहागिन महिलाएं बरगद के पेड़ की 7, 21 या 108 बार परिक्रमा करें और उस पर कच्चा सूत लपेटें। यह उपाय पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए अचूक माना जाता है।
  • बांस के पंखे का दान: इस दिन बांस का पंखा खरीदकर उससे बरगद और यमराज को हवा करें, फिर इसे किसी ब्राह्मण को दान कर दें। यह परंपरा परिवार में शीतलता और शांति लाती है।
  • पितृ तर्पण और स्नान: ज्येष्ठ अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करें और अपने पितरों के नाम पर तर्पण या दान करें। इससे पितृ दोष दूर होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
  • काली वस्तुओं का दान: शनि देव को प्रसन्न करने के लिए गरीबों को काले तिल, काली उड़द, काला छाता या जूते-चप्पल दान करें। यह उपाय आर्थिक बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।
  • सावित्री-सत्यवान कथा का श्रवण: वट वृक्ष के नीचे बैठकर सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा का पाठ करें या सुनें। कथा के बिना इस दिन का व्रत और पूजा अपूर्ण मानी जाती है।
  • दीपदान और मंत्र जाप: शाम के समय पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्रों का जाप करें। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मानसिक शांति मिलती है।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



FAQ

  1. शनि जयंती 2026 की सही तिथि और शुभ समय क्या है?
    साल 2026 में शनि जयंती 16 मई, शनिवार को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 05:11 बजे शुरू होगी। यह तिथि देर रात 01:30 बजे समाप्त होगी। शनिवार का दिन होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। सूर्योदय से लेकर पूरे दिन पूजा करना फलदायी रहेगा।
  2. शुक्र और बुध के गोचर से किन क्षेत्रों में ज्यादा लाभ होगा?
    शुक्र भौतिक सुख और बुध बुद्धि का कारक है। इन दोनों का वृषभ राशि में मिलना व्यापार, बैंकिंग और मीडिया क्षेत्र के लिए अच्छा है। व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की निर्णय क्षमता बेहतर होगी। आर्थिक तंगी दूर होगी और लग्जरी चीजों पर खर्च बढ़ेगा। करियर में अचानक तरक्की के मौके मिलेंगे।
  3. शनि जयंती पर शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए क्या दान करना चाहिए?
    शनि जयंती पर काली वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना जाता है। आप काले तिल, काली उड़द की दाल, लोहा या काले कपड़े दान कर सकते हैं। इसके अलावा सरसों का तेल, काला छाता और चमड़े के जूते-चप्पल दान करना शुभ है। जरूरतमंदों को भोजन कराने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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