शारदीय नवरात्र 2026: कहीं आप भी तो नहीं हैं अष्टमी-नवमी पूजन की तारीखों को लेकर कन्फ्यूज, यहां से दूर करें अपना कन्फ्यूजन
Shardiya Navratri 2026: इस साल शारदीय नवरात्र का त्योहार बहुत खास रहने वाला है। हर तरफ मां दुर्गा के स्वागत की तैयारियां बहुत तेजी से चल रही हैं। घरों से लेकर मंदिरों तक में एक अलग ही रौनक दिखाई दे रही है। लेकिन इस बार अष्टमी और नवमी तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम बना हुआ है।
लोग सोच रहे हैं कि व्रत और कन्या पूजन किस दिन करना सही रहेगा। कई लोग अष्टमी के दिन ही घर में खास पूजा और हवन करते हैं। वहीं कुछ लोग नवमी के दिन ही कन्याओं को भोजन कराना सही मानते हैं। इस बार तिथियों के समय में थोड़ा फेरबदल हुआ है।
इस वजह से लोगों के मन में पूजा के दिन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अगर आपके मन में भी ऐसी ही उलझन है तो चिंता छोड़ दीजिए। हम आपकी इस उलझन को पूरी तरह से दूर करने जा रहे हैं।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, इस बार नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। ये पर्व 21 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ पूरा होगा। इस बार अष्टमी तिथि दो दिनों तक रहने वाली है। इसलिए नवरात्र पूरे दस दिनों का होगा। आइए जानें पूजा और व्रत की सही तारीख।
क्या है घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो रही है। इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके अलावा दोपहर 11:44 बजे से 12:31 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है।
इस बार मां दुर्गा का आगमन और विदाई दोनों ही हाथी की सवारी पर हो रहा है। धर्मशास्त्रों के मुताबिक, देवी का हाथी पर सवार होकर आना बेहद शुभ माना जाता है। इससे देश में अच्छी वर्षा होती है और सुख, समृद्धि तथा धन-धान्य की भारी बढ़ोतरी होती है।
19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी पूजा
पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 8:27 बजे से होगा। इसका समापन 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे हो जाएगा। उदया तिथि के नियम मुताबिक, 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी।
इसलिए अष्टमी का विशेष पूजन और व्रत 19 अक्टूबर को ही रखें। मां महागौरी की पूजा इसी दिन करना सबसे शुभ माना गया है। जिनके घर में अष्टमी पर कन्या पूजन होता है, वे भी यही कर सकते हैं। कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर सकते हैं।
धर्मशास्त्रों के मुताबिक, कुछ परिवारों में रात के समय अष्टमी पूजा की परंपरा होती है। वे कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात में ही करते हैं। ऐसे लोग 18 अक्टूबर की रात को अपनी पारिवारिक परंपरा पूरी कर सकते हैं।
महानवमी की पूजा और कन्या पूजन
पंचांग के मुताबिक, 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद नवमी तिथि लगेगी। इसलिए इस समय के बाद नवमी का हवन और पूजन किया जा सकता है। जो लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं, वे भी यह समय चुनें। यानी 19 अक्टूबर को दोनों ही तिथियों का पूजन हो सकता है।
वहीं जो लोग केवल उदया तिथि मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को नवमी मनाएं। 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे तक नवमी तिथि रहेगी। इसलिए दोपहर 12:50 बजे से पहले ही अपने सारे अनुष्ठान पूरे कर लें। इस तरह उदया तिथि मानने वाले 20 अक्टूबर को कन्या भोजन कराएं।
नवमी का व्रत और पारण के नियम
शारदीय नवरात्र में नवमी तिथि का व्रत और पारण शास्त्रों के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार नवमी का व्रत 19 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं।
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मां सिद्धिदात्री का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। दिनभर सात्विक नियमों का पालन करते हुए केवल फल, दूध या फलाहार का ही सेवन करें। इस दिन नवमी की विशेष पूजा, हवन और कन्या पूजन का विधान है।
व्रत के पारण का सबसे सही समय अगले दिन यानी विजयादशमी को माना गया है। पारण हमेशा नवमी तिथि की समाप्ति या सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए। पारण करने से पहले मंदिर में मां दुर्गा की आरती करें और देवी को भोग लगाएं। इसके बाद कन्याओं को कराया गया भोजन या पूजा का हलवा-चोरी और सात्विक भोजन ग्रहण करके ही अपना व्रत खोलें।
संधि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त
संधि पूजा का समय 19 अक्टूबर को सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक रहेगा। यह कुल 48 मिनट का बहुत ही खास और पवित्र समय होगा। अष्टमी का अंत और नवमी की शुरुआत का समय संधि काल कहलाता है।
इसी समय मां दुर्गा ने असुर चंड और मुंड का वध किया था। संधि काल में मां के चामुंडा रूप की आराधना की जाती है। इस समय पूजा करने से देवी की विशेष कृपा तुरंत प्राप्त होती है।
भक्त इस समय मां को 108 कमल के फूल अर्पित करते हैं। तो शारदीय नवरात्र 2026 में सही मुहूर्त, नियमों और विधि-विधान के साथ घटस्थापना से लेकर पारण तक की पूजा करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQs:
- शारदीय नवरात्र 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?
शारदीय नवरात्र 2026 की घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक और दोपहर 11:44 बजे से 12:31 बजे तक है। - अष्टमी और नवमी तिथि के लिए पूजा कब करनी है?
इस बार अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को मनाई जाएगी, इसलिए विशेष पूजन और व्रत भी इसी दिन करना चाहिए। नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद लगेगी, इसलिए इस समय के बाद नवमी का पूजन किया जा सकता है। - संधि पूजा का समय कब है?
संधि पूजा का समय 19 अक्टूबर को सुबह 10:27 से 11:15 बजे तक रहेगा। यह समय अष्टमी के अंत और नवमी की शुरुआत का है।