क्या है अकाल बोधन और शारदीय नवरात्रि की शुरुआत का सच, श्रीराम से जुड़ी है इसकी कहानी
Kaushiki | Oct 03, 2026, 17:06 IST
शारदीय नवरात्रि का अनसुना रहस्य
श्रीराम ने रावण वध और धर्म की रक्षा के लिए शरद ऋतु में देवी दुर्गा को असमय जगाकर पूजा की थी। बिना मौसम देवी का आह्वान करने की इसी धार्मिक प्रक्रिया को अकाल बोधन कहा गया। इसमें नीले कमल और श्रीराम की अटूट भक्ति से शुरू हुई यह परंपरा आज शारदीय नवरात्रि के रूप में प्रसिद्ध है। आइए जानें कैसे हुई थी शारदीय नवरात्रि की शुरुआत...
लंका युद्ध के दौरान रावण को हराना आसान नहीं था, क्योंकि स्वयं देवी दुर्गा उसकी रक्षा कर रही थीं। तब ब्रह्मा जी और विभीषण की सलाह पर श्रीराम ने आश्विन माह में शक्ति साधना का निर्णय लिया।
शास्त्रों में दक्षिणायन काल में सभी देवी-देवता सो जाते हैं। श्रीराम ने विजय पाने के लिए देवी को समय से पहले यानी असमय जगाया। बिना मौसम देवी का आह्वान करने की इसी धार्मिक प्रक्रिया को अकाल बोधन कहा गया।
श्रीराम ने नौ दिनों तक व्रत रखा। पूजा के अंतिम दिन देवी ने उनकी भक्ति की अद्भुत परीक्षा भी ली। आइए जानें अकाल बोधन और शारदीय नवरात्रि की इस कथा का पूरा सच।
क्या है अकाल बोधन
शास्त्रों में शरद ऋतु में सभी देवी-देवता सो जाते हैं। श्रीराम ने रावण को हराने के लिए देवी को असमय जगाया। किसी देवता को असमय जगाने की प्रक्रिया को अकाल बोधन कहते हैं। रावण बहुत ज्ञानी और देवी दुर्गा का बड़ा भक्त था।
युद्ध के दौरान देवी खुद रावण की रक्षा कर रही थीं। श्रीराम को रावण पर विजय पाना बहुत कठिन लग रहा था। तब विभीषण ने श्रीराम को शक्ति पूजा करने की सलाह दी।
श्रीराम ने समुद्र तट पर नौ दिनों का कठिन व्रत रखा।उन्होंने देवी को प्रसन्न करने के लिए 108 नीले कमल चढ़ाए। पूजा के अंतिम दिन देवी ने उनकी कड़ी परीक्षा ली। इसी घटना से शारदीय नवरात्रि मनाने की शुरुआत मानी जाती है।
क्यों पड़ी देवी को असमय जगाने की जरूरत
छह महीने का दक्षिणायन देवताओं की रात मानी जाती है। आश्विन का महीना दक्षिणायन में पड़ता है। इस दौरान सभी देवी और देवता शयन अवस्था में रहते हैं। रावण के साथ युद्ध के समय श्रीराम बहुत चिंतित और व्याकुल थे।
रावण अधर्म के रास्ते पर था फिर भी देवी उसकी रक्षा कर रही थीं। सत्य और धर्म की रक्षा के लिए रावण का वध जरूरी था। ब्रह्मा जी की सलाह पर श्रीराम ने शक्ति की साधना शुरू की। उन्होंने आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूजा आरंभ की। बिन मौसम देवी का आह्वान करने के कारण इसे अकाल बोधन कहा गया।
नीले कमल और श्रीराम की कठिन परीक्षा
आठ दिनों तक श्रीराम ने नियम और श्रद्धा से पूजा की। महाअष्टमी और महानवमी की संधि बेला पर एक अनोखी घटना घटी। देवी दुर्गा ने श्रीराम की भक्ति की परीक्षा लेने का मन बनाया। उन्होंने पूजा में रखे 108 नीले कमलों में से एक छुपा दिया।
जब श्रीराम 108वां कमल चढ़ाने लगे तो थाल खाली मिला। पूजा के बीच से उठना शास्त्र के अनुसार बहुत बड़ा दोष था। यदि पूजा अधूरी रह जाती तो युद्ध में हार पक्की हो जाती।
श्रीराम पल भर के लिए बहुत उदास और चिंतित हो गए। फिर उन्हें अपनी माता कौशल्या की एक बात याद आ गई। माता कौशल्या उन्हें हमेशा कमलनयन और राजीव लोचन कहती थीं।
कमलनयन का अर्थ होता है कमल के फूल जैसी सुंदर आंखों वाला। श्रीराम ने बिना देर किए अपना धनुष और बाण उठाया। उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी एक आंख निकालकर देवी को चढ़ाएंगे। जैसे ही उन्होंने तीर आंख के पास पहुंचाया देवी प्रकट हो गईं।
देवी दुर्गा का प्रकट होना और विजयादशमी
देवी ने श्रीराम को युद्ध में सदा विजय होने का महा वरदान दिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि धर्म की जीत अवश्य होगी। देवी का आशीर्वाद मिलते ही श्रीराम की सेना में नया उत्साह भर गया। दसवें दिन श्रीराम ने रावण का वध कर दिया।
अधर्म पर धर्म की इस महान जीत को विजयादशमी कहा गया। उसी दिन से हर साल रावण दहन और दशहरा मनाया जाता है। श्रीराम द्वारा की गई यह पूजा अकाल बोधन परंपरा के नाम से अमर हो गई। आज भारत के कोने-कोने में यह उत्सव धूमधाम से मनाते हैं।
ग्रंथों में अकाल बोधन कथा का वर्णन
ग्रंथों के मुताबिक, श्रीराम के इस कार्य से पूरे ब्रह्मांड को संदेश मिला। जब धर्म पर संकट आए तो सच्ची साधना से शक्ति को जगाया जा सकता है। समय और परिस्थिति चाहे जैसी भी हो भक्ति ही सबसे बड़ा मार्ग है।
आज पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी और पूरे देश में दुर्गा पूजा मनाई जाती है। पंडालों में महाषष्ठी के दिन देवी का बोधन यानी जागरण कराया जाता है। लोग नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना करते हैं। श्रीराम की यह पावन कथा हमें हर परिस्थिति में धैर्य रखना सिखाती है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
- शारदीय नवरात्रि का पर्व कैसे शुरू हुआ?
शारदीय नवरात्रि का पर्व भगवान श्रीराम द्वारा देवी दुर्गा की पूजा करने से शुरू हुआ, जब उन्होंने रावण को हराने के लिए देवी को असमय जगाया। - अकाल बोधन का क्या मतलब है?
अकाल बोधन का मतलब है देवी को असमय जगाना। यह प्रक्रिया तब हुई जब श्रीराम ने रावण को हराने के लिए देवी दुर्गा की पूजा की। - श्रीराम की पूजा के समय देवी दुर्गा ने उनकी भक्ति की परीक्षा क्यों ली?
देवी दुर्गा ने श्रीराम की भक्ति की परीक्षा इसलिए ली ताकि यह दिखा सकें कि उनकी भक्ति और निष्ठा कितनी सच्ची थी, जिसे श्रीराम ने सफलतापूर्वक पार किया।
स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों को 62 साल तक नौकरी का हक नहीं, 60 में ही होगा रिटायरमेंट, HC से 14 याचिकाएं खारिज
By Neel Tiwari
Rent A Garba Partner: गरबा में पार्टनर भी किराए पर? भोपाल-इंदौर में अनोखा ट्रेंड वायरल
By Sumit Kumar
भ्रष्टाचार के खिलाफ जयपुर ACB की ट्रैप कार्रवाई, वनपाल और वनरक्षक रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
By Jageshwar prasad
नाजिया इलाही खान उज्जैन में तर्पण करेंगी, क्या अपनाएंगी सनातन धर्म? भाजपा प्रवक्ता ने दिए ये संकेत
By Sandeep Kumar
एक साल से दस्तावेज पढ़ रही CBI 1000 करोड़ के समाज कल्याण घोटाले में चार्जशीट का इंतजार, बड़े IAS नामों से सवाल
By VINAY VERMA
राजस्थान पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस में दो नेताओं की एंट्री, गोपाल गुर्जर और नेम सिंह फौजदार की घर वापसी
By Saurabh Mishra
सोडाला जेडीए अतिक्रमण विरोध तीसरे दिन भी जारी: जेडीए की अर्थी निकाली, 160 फीट चौड़ीकरण पर सवाल
By Jyoti Mahender Bhardwaj