सावन का पहला सोमवार आज, इस तरह करें भोलेनाथ को प्रसन्न, जानें पूरी विधि
Sawan Somwar Puja Vidhi: हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष धार्मिक महत्व होता है। यह पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए उत्तम माना जाता है। सावन में पड़ने वाले सोमवार के व्रतों का खास स्थान है। मान्यता है कि सावन में शिव पूजा से तुरंत फल मिलता है।
उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा। इस पावन दिन पर शिव भक्त मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने से शिवजी प्रसन्न होते हैं। अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद मिलता है।
विवाहित लोगों के दांपत्य जीवन में सुख और प्यार बढ़ता है। करियर और व्यापार में आने वाली तमाम बाधाएं भी दूर होती हैं। इस बार सावन में चार सोमवार के व्रत रखे जाएंगे। 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को सोमवार हैं।
अगर आप भी सावन सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं। तो आपको सही पूजा विधि और सामग्री की जानकारी होनी चाहिए। साथ ही पूजा के दौरान क्या करें और क्या न करें जानें।
सावन सोमवार का महत्व
शास्त्रों में सावन महीने में शिवजी अपनी ससुराल यानी पृथ्वी पर आते हैं। भगवान शिव इस दौरान पूरी सृष्टि का संचालन स्वयं पृथ्वी लोक से करते हैं। इसलिए इस समय भक्त द्वारा की गई प्रार्थना सीधे भोलेनाथ तक पहुंचती है।
सावन सोमवार का व्रत करने से भक्तों के सारे दुख-दर्द दूर होते हैं। सच्चे मन से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति आती है। अविवाहित कन्याओं को इस व्रत के प्रभाव से मनचाहा वर प्राप्त होता है।
विवाहित महिलाओं के जीवन में प्रेम बढ़ता है और अखंड सौभाग्य मिलता है। व्यापार और करियर में आ रही रुकावटें भी तुरंत समाप्त हो जाती हैं। इन्हीं दिव्य कारणों से भक्त सावन सोमवार का व्रत पूरे उत्साह से रखते हैं।
सावन सोमवार की पौराणिक कथा
सावन सोमवार व्रत रखने के पीछे एक बेहद सुंदर और पावन पौराणिक कथा है। पौराणिक कथा के मुताबिक, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में चाहा था। वे भगवान शिव को अपने जीवनसाथी के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं।
इसके लिए माता पार्वती ने सावन के पूरे महीने में कठोर तपस्या की। उन्होंने भीषण गर्मी और बारिश में भी अपनी कठिन साधना जारी रखी थी। माता पार्वती ने पूरे सावन महीने में सोमवार के निर्जला व्रत रखे थे। उन्होंने बिना अन्न और जल ग्रहण किए लगातार भगवान शिव का ध्यान किया। उनकी इस निश्छल भक्ति और कठिन तप से भगवान शिव बहुत प्रसन्न हुए।
सावन के सोमवार के दिन ही शिवजी माता पार्वती के सामने प्रकट हुए। भगवान शिव ने माता पार्वती को मनोवांछित वर मांगने के लिए कहा। माता पार्वती ने प्रभु से उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने की इच्छा जताई। भोलेनाथ ने मुस्कुराकर उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उन्हें पत्नी का दर्जा दिया।
तभी से सावन सोमवार के दिन व्रत और पूजन करने की परंपरा शुरू हुई। जो भी भक्त यह कथा सुनता है, उसे शिव-पार्वती का पावन आशीर्वाद मिलता है। यह कथा सिखाती है कि सच्ची भक्ति से ईश्वर को आसानी से पाया जा सकता है।
सावन सोमवार पूजा के लिए जरूरी सामग्री
- पूजा की थाली में सही सामग्री का होना बहुत जरूरी है।
- गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चा दूध, दही और शहद रखें।
- देसी घी, शक्कर और पंचामृत भी पूजा में शामिल करें।
- अखंडित बेलपत्र, धतूरा, भांग और आक के फूल लाएं।
- सफेद चंदन, रोली, अक्षत (चावल) और कलावा रख लें।
- धूप, दीप, कपूर, फल और मिठाई भी जरूर चढ़ाएं।
सावन सोमवार की पूजा विधि
- सावन का सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर में दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें।
- अब पास के शिव मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें।
- सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल और गंगाजल चढ़ाएं।
- इसके बाद दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- अब दोबारा शुद्ध जल चढ़ाकर शिवलिंग को साफ करें।
- फिर सफेद चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग और आक के फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
- शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें।
सावन सोमवार में क्या करें
- शुक्ल पक्ष का पहला सोमवार कोसुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान जरूर करें।
- हमेशा साफ और सात्विक वस्त्र पहनकर पूजा में बैठें।
- शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं।
- बेलपत्र की चिकनी सतह शिवलिंग की तरफ रखनी चाहिए।
- पूरे दिन मन में ॐ नमः शिवाय मंत्र जपते रहें।
- शाम को पूजा के बाद ही फलाहार ग्रहण करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को अपनी श्रद्धा अनुसार दान दें।
सावन सोमवार में क्या न करें
- शिवलिंग पर कभी भी केतकी का फूल न चढ़ाएं।
- भगवान शिव (शिव और सावन) को कभी भी हल्दी और सिंदूर न लगाएं।
- शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते कभी नहीं चढ़ाने चाहिए।
- तांबे के बर्तन से शिवलिंग पर दूध कभी न चढ़ाएं।
- दूध चढ़ाने के लिए पीतल या चांदी का बर्तन चुनें।
- व्रत के दिन लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन न खाएं।
- किसी भी इंसान का अपमान या बुराई बिल्कुल न करें।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- साल 2026 में पहला सावन सोमवार कब है?
साल 2026 में पहला सावन सोमवार तीन अगस्त 2026 को पड़ेगा। इस दिन से सावन के पवित्र सोमवार व्रतों की शुरुआत होगी। - सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, सफेद चंदन, अक्षत, तीन पत्तियों वाला बेलपत्र, धतूरा, भांग और आक के फूल चढ़ाने चाहिए। - शिव पूजा में किन चीजों का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
शिव पूजा और शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी के फूल, हल्दी, सिंदूर और नारियल का पानी कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। तांबे से दूध नहीं चढ़ाना चाहिए।
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