इंदौर के बाद अब उज्जैन का मास्टर स्ट्रोक, 1050 करोड़ के टेंपल बॉन्ड से चमकेगी बाबा महाकाल की नगरी
News In Short
- इंदौर के ग्रीन बॉन्ड की तर्ज पर पहली बार मंदिरों के विकास के लिए बॉन्ड जारी होंगे।
- सिंहस्थ 2028 को देखते हुए यह सारा विकास कार्य समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य है।
- कालभैरव मंदिर में एक साथ 2 लाख लोगों के प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी।
- प्रोजेक्ट के लिए बॉन्ड, बैंक लोन और केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड की मदद ली जाएगी।
- सड़कों के चौड़ीकरण के साथ-साथ सांदीपनि आश्रम में गुरुकुल परंपरा को आधुनिक रूप दिया जाएगा।
News In Detail
इंदौर के सफल ग्रीन बॉन्ड मॉडल के बाद अब धार्मिक नगरी उज्जैन एक बड़ा आर्थिक प्रयोग करने जा रही है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को केंद्र में रखते हुए उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) ने शहर के नौ प्रमुख धार्मिक स्थलों के कायाकल्प के लिए एक हजार 50 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे खास हिस्सा है टेंपल बॉन्ड, जिसके जरिए विकास के लिए फंड जुटाया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार
महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की आवक में भारी उछाल आया है। वर्तमान में यहां रोजाना औसतन 1.25 लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी दबाव को देखते हुए प्रशासन अब कालभैरव और मंगलनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों का समग्र विकास करने जा रहा है। राज्य सरकार को भेजे गए इस प्रस्ताव के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति भी कर दी गई है।
ऐसे जुटाया जाएगा 1 हजार 50 करोड़ का फंड
इतनी बड़ी राशि जुटाने के लिए UDA ने एक ठोस वित्तीय योजना तैयार की है-
- टेंपल बॉन्ड: शुरुआत में बॉन्ड के जरिए 200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे।
- बैंक लोन: लगभग 587.50 करोड़ रुपए का कर्ज बैंकों से लिया जाएगा।
- अर्बन चैलेंज फंड: बाकी बचे 262.50 करोड़ रुपए इस फंड से मिलेंगे, जिसमें 25 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होगी।
कालभैरव और सांदीपनि आश्रम का बदलेगा स्वरूप
इस प्रोजेक्ट के तहत कालभैरव मंदिर परिसर को इतना बड़ा बनाया जाएगा कि वहां एक साथ दो लाख श्रद्धालु रुक सकें। वहीं, भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम को केवल मंदिर नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां गुरुकुल जैसी सुविधाएं होंगी।
रिवर फ्रंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खास फोकस
उज्जैन सिंहस्थ 2028 से पहले क्षिप्रा नदी के किनारों और सिद्धवट घाट का रिवर फ्रंट की तर्ज पर विकास होगा। योजना में केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, नवग्रह मंदिर में पार्किंग और कतार प्रबंधन को बेहतर किया जाएगा। पूरे शहर में ड्रेनेज, पेयजल और लाइटिंग की व्यवस्था को भी अपग्रेड किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि इस कायाकल्प से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे। पीएम एकता मॉल के पीछे के हिस्से को भी विकसित किया जा रहा है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
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