जून की पूर्णिमा को क्यों कहा जाता है स्ट्रॉबेरी मून, जानें इसका पूरा सच
Latest Religious News: जून का महीना खत्म होते समय हमें एक बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है। इस साल 29 जून को बहुत ही खास संयोग बन रहा है। इस दिन देशभर में ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन पूजा और दान के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
इसी पावन दिन आसमान में एक अनोखा नजारा भी देखने को मिलेगा। खगोल विज्ञान की दुनिया में इसे स्ट्रॉबेरी मून कहा जाता है। इस रात चांद का दीदार करना हर किसी के लिए बहुत यादगार होगा। लोग इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए बहुत उत्सुक हैं।
स्ट्रॉबेरी मून का वैज्ञानिक कारण
विज्ञान के नजरिए से देखें तो यह एक सामान्य खगोलीय घटना है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के काफी करीब आ जाता है। पृथ्वी के नजदीक होने के कारण चांद क्षितिज के पास दिखाई देता है। इस स्थिति को विज्ञान में 'पेरिगी' कहा जाता है।
करीब होने से चांद का आकार सामान्य से काफी बड़ा दिखता है। इसकी चमक भी आम दिनों से कई गुना ज्यादा होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय आसमान बिल्कुल साफ होना बेहद जरूरी है। साफ आसमान में चांद का यह रूप अद्भुत लगता है।
क्या सच में लाल दिखाई देगा चांद
बहुत से लोगों को लगता है कि इस दिन चांद लाल हो जाएगा। लेकिन विज्ञान के मुताबिक ऐसा नहीं होता है। चांद का रंग स्ट्रॉबेरी की तरह लाल या गुलाबी नहीं दिखाई देता। इसका नामकरण अमेरिका के पुराने इतिहास से जुड़ा हुआ है।
दरअसल उत्तरी अमेरिका में जून के महीने में जंगली स्ट्रॉबेरी पकती है। वहां की जनजातियां फसल पकने की खुशी मनाती थीं। इसी वजह से उन्होंने जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून कहना शुरू किया। तब से यह नाम पूरी दुनिया में मशहूर हो गया। हिंदू मंदिर
पूर्णिमा का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
हिंदू धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इस दिन कई प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। वे बरगद के पेड़ की पूजा कर धागा बांधती हैं।
धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, बरगद के पेड़ में साक्षात त्रिदेव बसते हैं। इसकी पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। इसी दिन जगन्नाथ पुरी में भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा होती है।
प्रभु को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र स्नान कराया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद गरीबों को दान देने से पुण्य मिलता है।
भद्रा का साया और शुभ मुहूर्त
सनातन धर्म मेंअक्सर पूर्णिमा के दिन लोग भद्रा को लेकर बहुत डरते हैं। भद्रा काल में मांगलिक कार्य करना मना होता है। लेकिन इस बार आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है।
ज्योतिष गणना के मुताबिक, इस दिन भद्रा पाताल लोक में रहेगी। जब भद्रा पाताल में होती है तो उसका असर धरती पर नहीं होता। इसलिए सुहागिनें बिना किसी डर के पूजा कर सकती हैं।
पूर्णिमा तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे शुरू हो जाएगी। यह अगले दिन 30 जून को सुबह 5:26 बजे खत्म होगी। पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय दोपहर 11:57 बजे से रहेगा।
यह शुभ अभिजीत मुहूर्त (धार्मिक आस्था) दोपहर 12:52 बजे तक चलेगा। शाम को पूजा के लिए अमृत काल भी उपलब्ध रहने वाला है। अमृत काल रात 08:53 बजे से 10:40 बजे तक रहेगा।
सुख-समृद्धि के लिए करें ये आसान उपाय
ज्योतिष शास्त्र में इस दिन के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को करने से घर में शांति आती है। ज्येष्ठ माह पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे उत्तम है।
एक लोटे में शुद्ध जल और कच्चा दूध मिलाएं। उसमें थोड़ा सा गंगाजल और सफेद फूल भी डाल सकते हैं। चांद निकलने पर इस मन्त्र के साथ अर्घ्य दें। इससे कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बहुत मजबूत हो जाती है। चंद्रमा मजबूत होने से इंसान का मन हमेशा शांत रहता है।
इस दिन घर में सत्यनारायण भगवान की कथा जरूर सुननी चाहिए। कथा सुनने से घर के सारे क्लेश दूर हो जाते हैं। चूंकि जून में बहुत तेज गर्मी का मौसम होता है।
इसलिए इस दिन ठंडी चीजों का दान करना चाहिए। राहगीरों को ठंडा पानी या मीठा शरबत जरूर पिलाएं। जरूरतमंदों को भोजन कराने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- जून की पूर्णिमा को स्ट्रॉबेरी मून क्यों कहा जाता है?
उत्तरी अमेरिका में जून के महीने में जंगली स्ट्रॉबेरी की फसल पकती है। वहां की पुरानी जनजातियों ने इसी आधार पर जून की पूर्णिमा का नाम स्ट्रॉबेरी मून रखा था, हालांकि चांद का रंग लाल नहीं होता। - वट पूर्णिमा 2026 पर पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है?
वट पूर्णिमा पर पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ समय दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक का है। यह अभिजीत मुहूर्त है। इसके अलावा रात को अमृत काल भी पूजा के लिए शुभ है। - क्या वट पूर्णिमा 2026 पर भद्रा का कोई बुरा प्रभाव पड़ेगा?
नहीं, इस बार भद्रा का कोई बुरा प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भद्रा पाताल लोक में निवास करेगी, इसलिए सभी तरह के मांगलिक कार्य और पूजा बिना किसी डर के किए जा सकते हैं।
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