विवाह मुहूर्त 2026: शादियों पर लग गया लंबा ब्रेक, 36 दिनों तक कोई मुहूर्त नहीं
विवाह मुहूर्त 2026: मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में मई के महीने में शादियों की भारी धूम रहने वाली है। लेकिन यह रौनक केवल दो दिनों के लिए ही सीमित रहेगी। पंडितों के मुताबिक, 13 और 14 मई को विवाह के आखिरी मुहूर्त थे।
इन दो दिनों में शहर में 300 से अधिक विवाह आयोजन होंगे। इसके बाद शादियों पर एक लंबा विराम लगने वाला है। करीब 36 दिनों तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकेगा। अब अगला शुभ मुहूर्त सीधे 19 जून से शुरू होगा। यह अंतराल अधिकमास की वजह से आ रहा है।
अधिकमास का शादियों पर असर
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई से शुरू हो रहा है। ये 15 जून तक जारी रहेगा। इस काल में विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं होते। इस दौरान केवल पूजा-पाठ और दान का महत्व होता है। सिर्फ अधिकमास ही नहीं, इस साल गुरु तारा भी अस्त होने वाला है। गुरु के अस्त होने पर भी विवाह वर्जित माने जाते हैं। पंडित विष्णु राजोरिया कहते हैं कि मई से दिसंबर तक तीन बार रुकावट आएगी। पहले अधिकमास, फिर गुरु तारा अस्त और फिर देव शयन होगा।
जानिए क्यों 2026 में कम हैं विवाह के शुभ दिन
विक्रम संवत 2083 में ज्येठ अधिक मास होने से गणना बदल गई है। इस बार शादियों के लिए बहुत ही कम दिन मिल रहे हैं। पंडितों का कहना है कि सूर्य की छह संक्रांतियों में विवाह नहीं होते। इसमें कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु और मीन संक्रांति शामिल हैं।
अंग्रेजी कैलेंडर और चंद्र वर्ष के बीच समय का अंतर होता है। इसे संतुलित करने के लिए हर तीन साल में अधिकमास आता है। इसी कारण से साल के बीच के महीनों में मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। लोगों को अब नवंबर और दिसंबर का इंतजार करना होगा।
जून-जुलाई में कब-कब बजेंगी शहनाइयां
36 दिनों के लंबे ब्रेक के बाद 19 जून को मुहूर्त लौटेंगे। जून में 19 से 29 तारीख तक लगातार शादियां हो सकेंगी। जुलाई महीने की बात करें तो यहां भी समय काफी कम है। जुलाई में केवल 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 शुभ हैं।
इसके बाद 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेगा। साथ ही 25 जुलाई से देव शयनी चतुर्मास शुरू हो जाएगा। चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शयन के लिए चले जाते हैं। इस दौरान चार महीने तक शुभ कार्यों पर रोक रहती है।
नवंबर-दिसंबर के शुभ मुहूर्त
देव उठनी एकादशी के बाद नवंबर के अंत में शादी के शुभ मुहूर्त दोबारा लौटेंगे। नवंबर में 20, 21, 22, 24, 25, 26 और 30 शुभ हैं। दिसंबर महीने में साल के आखिरी मुहूर्त उपलब्ध होंगे। इसमें 1 से 6 दिसंबर तक और फिर 9 से 12 तक शादियां होंगी। फिर 12 दिसंबर के बाद मलमास शुरू होने से फिर ब्रेक लग जाएगा।
ऐसे में शादी की योजना बनाने वाले परिवारों को जल्दी करनी होगी। कुल मिलाकर, साल 2026 में शादी के लिए भागदौड़ ज्यादा रहेगी। शुभ दिनों की संख्या कम होने से होटलों की बुकिंग भी मुश्किल होगी।
तो साल 2026 में शुभ मुहूर्तों की कमी शादी-ब्याह करने वाले परिवारों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगी। अधिकमास, गुरु तारा अस्त और देव शयन जैसी खगोलीय घटनाओं के चलते शहनाइयों पर बार-बार लंबे ब्रेक लगेंगे। ऐसे में सीमित दिनों की वजह से होटलों की बुकिंग और अन्य व्यवस्थाओं के लिए लोगों को समय रहते काफी भागदौड़ करनी होगी।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
FAQ
- साल 2026 में मई और जून के बीच शादियों में 36 दिनों का ब्रेक क्यों है?
साल 2026 में 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिकमास में सूर्य संक्रांति नहीं होती, इसलिए इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य निषेध माने जाते हैं। इसी कारण 14 मई के बाद सीधे 19 जून को अगला शुभ मुहूर्त उपलब्ध होगा। - अधिकमास क्या होता है और यह हर तीन साल में क्यों आता है?
चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष (अंग्रेजी कैलेंडर) 365 दिनों का होता है। इन दोनों के बीच हर साल 11 दिनों का अंतर आता है। तीन साल में यह अंतर लगभग एक महीने (33 दिन) के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने और कैलेंडर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहते हैं। - देव शयनी एकादशी के बाद शादियां क्यों रुक जाती हैं?
देव शयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं, जिसे चतुर्मास कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान मांगलिक कार्यों को करने के लिए देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता। इसलिए, जुलाई में देव शयनी एकादशी के बाद शादियां रुक जाती हैं और सीधे नवंबर में देव उठनी एकादशी के बाद ही दोबारा शुरू होती हैं।
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